पंजाब निकाय चुनाव में AAP का दबदबा, लेकिन 27 का रण अभी भी आसान नहीं? Explainer से समझें क्यों उठ रहे ये सवाल
पंजाब निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज कर विपक्ष को पीछे छोड़ दिया है. लुधियाना, जालंधर और धूरी जैसे शहरों में AAP का दबदबा देखने को मिला. पार्टी इसे भगवंत मान सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर बता रही है. हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव अभी आसान नहीं हैं.
पंजाब नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बड़ी राजनीतिक बढ़त हासिल की है. चुनाव नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह जीत 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोहराई जा सकेगी या फिर तस्वीर बदल सकती है. फिलहाल पंजाब की राजनीति में AAP की इस जीत को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
शुक्रवार को हुई मतगणना में AAP ने विपक्षी दलों को पीछे छोड़ते हुए 690 से ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज की. कई अन्य सीटों पर भी पार्टी बढ़त बनाए हुए नजर आई. नतीजे सामने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ जश्न मनाना शुरू कर दिया.
पंजाब निकाय चुनाव में AAP को कितनी बड़ी सफलता मिली?
AAP नेता मनीष सिसोदिया ने इस जीत को जनता द्वारा अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान की नीतियों पर भरोसे की मुहर बताया. उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पंजाब की जनता ने 'ED की राजनीति” को नकार दिया है. निकाय चुनाव में कुल 1,977 वार्डों में मतदान हुआ था, जबकि 80 वार्डों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए. कुल 7,554 उम्मीदवार मैदान में थे. देर शाम तक आए नतीजों के मुताबिक AAP ने 860 से ज्यादा वार्डों में जीत दर्ज कर ली थी. इसके अलावा 63 सीटों पर पार्टी पहले ही निर्विरोध जीत हासिल कर चुकी थी.
किन-किन शहरों आप का दबदबा?
अगर बड़े शहरों की बात करें तो लुधियाना नगर निगम में AAP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. यहां पार्टी ने 46 सीटों पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस को 34 सीटें मिलीं. जालंधर जिले में भी AAP का दबदबा देखने को मिला, जहां पार्टी ने 49 वार्ड जीत लिए. वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह क्षेत्र धूरी में AAP ने 19 वार्ड जीतकर क्लीन स्वीप कर दिया. इसे मान सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों से साफ संकेत मिलता है कि शहरी इलाकों में भगवंत मान सरकार की योजनाओं को समर्थन मिला है. पार्टी ने मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था. हालांकि निकाय चुनाव में मिली इस बड़ी जीत के बावजूद 2027 का विधानसभा चुनाव AAP के लिए आसान नहीं माना जा रहा. इसके पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं.
पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर नाराजगी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. पंजाब सरकार के मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने भी दिल्ली नेतृत्व के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए थे. इससे पार्टी के अंदर असंतोष की चर्चा तेज हुई है. इसके अलावा स्थानीय नेताओं और विधायकों के बीच गुटबाजी की बातें भी सामने आ रही हैं. कई इलाकों में अलग-अलग गुट सक्रिय दिखाई दिए, जिससे संगठन के भीतर खींचतान बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
वहीं विपक्ष फिलहाल कमजोर जरूर नजर आ रहा है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा रणनीतिक गठबंधन करते हैं तो 2027 में मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है. भाजपा भी ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है. राज्य में नशा, गैंगस्टर नेटवर्क, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दे अब भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं. किसानों की समस्याएं और आर्थिक संकट भी ग्रामीण इलाकों में नाराजगी की वजह माने जा रहे हैं.
विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि पंजाब में स्थानीय निकाय और विधानसभा चुनावों के नतीजे हमेशा एक जैसे नहीं रहते. 2021 में कांग्रेस ने निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसे सत्ता गंवानी पड़ी थी यानी फिलहाल AAP की यह जीत शहरी इलाकों में मजबूत समर्थन का संकेत जरूर देती है, लेकिन 2027 की असली राजनीतिक लड़ाई अभी बाकी मानी जा रही है.




