Lawrence of Punjab controversy: कोर्ट के आगे झुके मेकर्स, टाइटल से हटेगा 'बिश्नोई और पंजाब'; अब होगी रिलीज?
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ‘लॉरेंस ऑफ पंजाब’ के निर्माताओं ने टाइटल बदलने पर सहमति जता दी. अदालत ने कहा कि टाइटल से लॉरेंस बिश्नोई का नाम हटाने पर सीरीज की रिलीज़ पर रोक नहीं लगेगी.
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान अपकमिंग डॉक्यूमेंट्री सीरीज 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' के निर्माताओं ने टाइटल बदलने पर अपनी सहमति जता दी है. यह सीरीज जेल में बंद चर्चित गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई पर आधारित बताई जा रही है. सुनवाई के दौरान ज़ी एंटरटेनमेंट की टीम ने अदालत को बताया कि उनकी क्रिएटिव टीम अब एक नया टाइटल तय करेगी. कंपनी ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि नए टाइटल में कहीं भी 'लॉरेंस बिश्नोई' का नाम नहीं होगा. उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि उसने पूरी फिल्म देख ली है. टाइटल के अलावा सीरीज की विषयवस्तु में कोई आपत्तिजनक बात नहीं मिली जैसा की अन्य मीडिया प्रिंट और डिजिटल लेखों में प्रकाशित हुआ था.
अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर टाइटल से 'लॉरेंस बिश्नोई' नाम हटा दिया जाए तो फिल्म या सीरीज की रिलीज़ पर कोई रोक नहीं लगेगी. हालांकि, पंजाब सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने कहा कि राज्य को सिर्फ टाइटल से नहीं, बल्कि पूरी फिल्म पर आपत्ति है. उन्होंने अदालत से मांग की है की कि निर्माताओं को निर्देश दिए जाएं कि सीरीज से 'पंजाब' शब्द पूरी तरह हटा दिया जाए.'
क्या ली है इजाजत
बिश्नोई के वकील ने भी कोर्ट से गुहार लगाई कि सीरीज में गैंगस्टर का नाम और उनकी कोई भी तस्वीरें न दिखाई जाएं. सुनवाई में उच्च न्यायालय ने बिश्नोई के वकील से सवाल किया कि क्या गैंगस्टर द्वारा मीडिया को दिए गए पुराने इंटरव्यू की कोई अनुमति ली गई थी या नहीं. इस मामले में केंद्र सरकार ने भी अदालत को बताया कि इस सीरीज के रिलीज़ होने से पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो सकता है. यही वजह है कि रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की जा रही है.
विवाद की शुरुआत
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीरीज के मूल टाइटल 'लॉरेंस ऑफ पंजाब' पर कई लोगों और संगठनों ने आपत्ति जताई. उनका कहना था कि यह शीर्षक गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा देता है और पंजाब की इमेज को संगठित अपराध से जोड़ता है. बताया जाता है कि यह टाइटल क्लासिक फिल्म 'लॉरेंस ऑफ अरेबिया' से इंस्पायर्ड है, जिसने ऑस्कर अवार्ड जीता था. सुनवाई के दौरान पंजाब के एडवोकेट जनरल ने पहले के एक मामले का जिक्र भी किया, जिसमें उच्च न्यायालय ने खुद संज्ञान लेकर सोशल मीडिया पर गैंगस्टरों के महिमामंडन को रोकने के निर्देश दिए थे. इस पर न्यायालय ने कहा कि 'किसी की ततीफ करना' और 'किसी की आलोचना करना' में बड़ा अंतर होता है. अभी यह देखना बाकी है कि निर्माता आखिरकार नया टाइटल क्या रखते हैं और सीरीज में क्या-क्या बदलाव करते हैं.




