शादी से पहले रिलेशन ख़राब होना रेप नहीं, धारा 376 के तहत नहीं मान सकते क्राइम; हाईकोर्ट ने लड़की को लेकर क्या कहा?
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि आपसी सहमति से बना रिश्ता अगर बाद में शादी तक नहीं पहुंच पाता, तो उसे धारा 376 (रेप) के तहत अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने साफ किया कि केवल रिश्ते के टूट जाने से आपराधिक मामला नहीं बनता
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सामने एक ऐसा मामला आया, जिसमें एक प्रेम संबंध के टूटने के बाद गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया गया था. महिला ने आरोप लगाया कि युवक ने शादी का वादा करके उससे शारीरिक संबंध बनाए और बाद में मुकर गया.
इसी आधार पर IPC की धारा 376 (बलात्कार) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज हुई. मामला बढ़ता गया, चार्जशीट भी दाखिल हुई, लेकिन अंत में हाईकोर्ट ने पूरे केस को ही निरस्त कर दिया.
कोर्ट ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान जस्टिस आलोक जैन ने रिकॉर्ड का गहराई से अध्ययन किया. अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष वयस्क थे और रिश्ते की प्रकृति से पूरी तरह परिचित थे. संबंध किसी दबाव, धमकी या छल से शुरू नहीं हुआ था, बल्कि आपसी सहमति से बना था. यहां तक कि शादी की मंशा दिखाने के लिए रोका समारोह भी किया गया था. बाद में स्वभाव में अंतर और परिस्थितियों के चलते रिश्ता आगे नहीं बढ़ पाया.
“हर टूटता रिश्ता अपराध नहीं होता”
कोर्ट ने साफ कहा कि मानवीय संबंध समय के साथ बदलते हैं. हर वह रिश्ता जो शादी तक नहीं पहुंचता, उसे आपराधिक मुकदमे में नहीं बदला जा सकता. यदि शुरुआत में शादी का इरादा वास्तविक था और बाद में परिस्थितियां बदल गईं, तो इसे रेप की श्रेणी में रखना कानून की भावना के खिलाफ है. अदालत ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता शिक्षित है और उसे पूरी जानकारी थी कि वह एक अविवाहित व्यक्ति के साथ संबंध में है.
दबाव बनाने के लिए दर्ज हुई शिकायत?
अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड से यह भी संकेत मिला कि मतभेद बढ़ने के बाद महिला ने बार-बार शिकायतें कर दबाव बनाने की कोशिश की, और आखिरकार एफआईआर दर्ज कराई. कोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 482 के तहत उसके पास यह अधिकार है कि वह कानून के दुरुपयोग को रोके.
FIR और पूरी कार्रवाई रद्द
सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में बलात्कार या धोखाधड़ी के जरूरी कानूनी तत्व साबित नहीं होते. इसलिए एफआईआर, चार्जशीट और उससे जुड़ी पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया गया. यह फैसला बताता है कि असफल प्रेम संबंध को आपराधिक रंग देना हर बार सही नहीं होता.





