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Bhagwant Mann को Akal Takht ने क्यों घोषित किया 'Anti-Guru'? 4 Points में समझें पूरा मामला

अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु विरोधी’ बताते हुए सिख समुदाय से दूरी बनाने की अपील की है. यह कार्रवाई एक वीडियो मामले के बाद हुई है, जिसे मान ने पहले AI से बनाया गया बताया था.

Akal Takht Declares Punjab CM Bhagwant Mann ‘Anti-Guru’ Over Controversial Video Row
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Akal Takht के सामने पेश हुए Punjab CM Bhagwant Mann

( Image Source:  ANI )

Bhagwant Mann Anti-Guru: पंजाब की राजनीति में बड़ा धार्मिक और सियासी विवाद खड़ा हो गया है. सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर कड़ा फैसला सुनाया है. अकाल तख्त ने उन्हें ‘गुरु विरोधी’ (Anti-Guru) बताते हुए सिख समुदाय यानी ‘पंथ’ से अपील की है कि वह उनसे दूरी बनाए रखें.

अकाल तख्त के इस फैसले की वजह एक कथित वीडियो और उससे जुड़ा विवाद है. आरोप है कि वीडियो में भगवंत मान जैसे दिखने वाले व्यक्ति को सिख गुरुओं की तस्वीरों पर शराब छिड़कते हुए देखा गया था. हालांकि, मान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया था कि वीडियो AI से बनाया गया है.

मान के ऊपर क्यों हुई कार्रवाई?

1- रिपोर्ट के मुताबिक, मामले को लेकर भगवंत मान को अकाल तख्त में पेश होने के लिए बुलाया गया था. वह 15 जनवरी को वहां पहुंचे थे, जहां उनसे वीडियो और कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर सवाल किए गए थे.

2- भगवंत मान ने उस समय वीडियो को फर्जी और AI जनरेटेड बताया था. वहीं अकाल तख्त ने कहा कि इस दावे के समर्थन में मुख्यमंत्री से सबूत मांगे गए थे, लेकिन लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला.

3- अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने बताया कि वीडियो की जांच भारत सरकार से मान्यता प्राप्त दो लैब में कराई गई. जांच रिपोर्ट में वीडियो को फर्जी या AI जनरेटेड नहीं पाया गया. इसके बाद पांच सिंह साहिबानों (सिखों के प्रमुख धार्मिक नेताओं) की बैठक हुई और उसमें फैसला लिया गया.

4-जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि मुख्यमंत्री ने अकाल तख्त के सामने सच नहीं बोला. इसी वजह से उन्हें गुरु के प्रति गलत आचरण का दोषी माना गया. उन्होंने कहा कि सिख समुदाय को अब भगवंत मान से कोई उम्मीद नहीं है और पंथ के अनुयायियों को उनसे दूरी बनानी चाहिए.

इस फैसले के बाद पंजाब में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना है... क्योंकि यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि आगामी चुनावी माहौल से भी जुड़ा माना जा रहा है.

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