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दतिया में BJP की हार के पीछे नरोत्तम मिश्रा कितना बड़ा फैक्टर, टिकट कटने से चुनावी नतीजे तक, जानें Inside Story

दतिया में BJP की हार ने नरोत्तम मिश्रा फैक्टर पर सवाल खड़े किए. टिकट कटने, विरोध, डैमेज कंट्रोल से लेकर नतीजे तक जानें पूरी Inside Story.

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मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर बीजेपी की हार ने पार्टी के भीतर की राजनीति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. जिस दतिया में कभी नरोत्तम मिश्रा का दबदबा माना जाता था, वहीं इस बार बीजेपी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को कांग्रेस के घनश्याम सिंह के हाथों हार का सामना करना पड़ा. कहानी सिर्फ 6,016 वोट की हार की नहीं है. इसकी शुरुआत टिकट बंटवारे से हुई, जब नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा गया. इसके बाद समर्थकों का विरोध, संगठन में नाराजगी और डैमेज कंट्रोल ने चुनाव को दिलचस्प बना दिया. अब सवाल है- क्या ‘नरोत्तम फैक्टर’ बीजेपी पर भारी पड़ा?

दतिया सीट पर चौंकाने वाली बात यह है कि इस सीट पर उपचुनाव का नतीजा सिर्फ बीजेपी की हार और कांग्रेस की जीत तक सीमित नहीं है. असली पहलू तीसरे नंबर पर रही चंद्रशेखर आजाद की 'आजाद समाज पार्टी' का प्रदर्शन है. पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव ‘मंडल’ ने 22 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए. शुरुआती दौर में मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच माना जा रहा था, लेकिन यादव के लगातार बढ़ते वोटों ने तस्वीर बदल दी.

BJP के लिए सियासी हार से बड़ी कहानी

दरअसल, मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में 3 अगस्त 2026 को आया नतीजा बीजेपी के लिए सिर्फ सियासी हार नहीं है, बल्कि बड़ी कहानी है. इस सीट पर कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हरा दिया. घनश्याम सिंह को 66,757 वोट मिले, जबकि आशुतोष तिवारी 60,741 वोट पर रुक गए. अब यह सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि दतिया लंबे समय तक बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पहचान रहा है. उसी सीट पर उन्हें नाराज कर पार्टी ने आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतारा. इसको लेकर बहुत बड़ा बवाल हुआ.

दतिया से तीन बार चुनाव तीत चुके हैं मिश्रा

इस सीट पर 2008, 2013 और 2018 में तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के गृह मंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा यहां से लगातार जीते थे. लेकिन 2023 में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने उन्हें 7,742 वोटों से हरा दिया था. भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद उपचुनाव हुआ, लेकिन बीजेपी ने इस बार नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने के बजाय आशुतोष तिवारी पर दांव लगाया.

टिकट कटते ही बीजेपी में मचा था बवाल

टिकट की घोषणा के बाद दतिया बीजेपी में असंतोष खुलकर सामने आया. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया. मामला इतना बढ़ा कि हाईवे जाम हुआ, पुलिस से टकराव हुआ और आंसू गैस तक चलानी पड़ी. मीडिया रिपोर्ट में मुताबिक नरोत्तम मिश्रा ने दतिया के पुलिस अधिकारियों ने धमकी भी दी थी. बीजेपी के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह और संगठन से जुड़े कई लोगों के सामूहिक इस्तीफे की खबर भी सामने आई. यहीं से बीजेपी की पहली बड़ी समस्या शुरू हुई. उम्मीदवार बदल गया, लेकिन चुनाव लड़ने वाला पूरा संगठन उसी तेजी से नहीं बदला.

आशुतोष के साथ नरोत्तम को क्यों खड़ा करना पड़ा?

उस घटना के बाद बीजेपी ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू किया. मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी नेतृत्व की मौजूदगी में नरोत्तम मिश्रा को आशुतोष तिवारी के नामांकन कार्यक्रम में मंच पर लाया गया, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सामान्य नहीं थी.

13 जुलाई को नामांकन सभा में नरोत्तम मिश्रा भाषण देते हुए भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े. उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाएंगे और बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को जिताने के लिए काम करेंगे. राजनीतिक संदेश साफ था- मिश्रा पार्टी के साथ हैं, लेकिन टिकट कटने का दर्द भी सार्वजनिक हो चुका था.

फिर आया SP और आशुतोष वाला बयान

टिकट विवाद के बाद पुलिस कार्रवाई ने तनाव और बढ़ा दिया. 10 जुलाई के प्रदर्शन में बीजेपी कार्यकर्ताओं पर पुलिस कार्रवाई के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दतिया के एसपी को मंच से चेतावनी दी. उन्होंने कहा था कि “याद रखना नरोत्तम मिश्रा कुछ भूलता नहीं है'. समय आने पर पूरा हिसाब बराबर करूंगा.

इसी तरह दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा द्वारा नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने 16 जुलाई 2026 को दतिया में एक कार्यकर्ताओं की बैठक व जनसभा के दौरान यह बयान दिया था कि, 'आशुतोष तिवारी में इतनी क्षमता या हैसियत नहीं है कि वे उनका टिकट काट सकें.' यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि चुनाव बीजेपी बनाम कांग्रेस से आगे बढ़कर बीजेपी बनाम बीजेपी के असंतोष की चर्चा में भी बदल गया.

क्या नरोत्तम मिश्रा ने बीजेपी को हराया?

इस बात का कोई आधिकारिक रूप से दावा नहीं कर सकता, लेकिन​ टिकट कटने से लेकर नामांकन भरवाने के दौरान तक बहुत कुछ ऐसा हुआ, जिसने दतिया से बीजेपी की हार तय कर दिया था. ये बात है कि सीएम मोहन सिंह यादव व पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के हस्तक्षेप और अमित शाह से मुलाकात के बाद नरोत्तम मिश्रा सार्वजनिक रूप से दतिया में आशुतोष तिवारी के समर्थन में प्रचार करते दिखे.

लेकिन राजनीति में केवल बगावत करना ही नुकसान नहीं पहुंचाता. टिकट कटने के बाद पैदा हुआ असंतोष, समर्थकों की नाराजगी और संगठन में आई दरार चुनावी माहौल को प्रभावित करती है. और वही हुआ. दतिया से बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी उपचुनाव हार गए .

वोटों ने क्या कहानी बताई?

अंतिम नतीजे में कांग्रेस के घनश्याम सिंह को 66,757, बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट मिले. जीत का अंतर 6,016 वोट रहा. इसका मतलब यह भी है कि बीजेपी की हार सिर्फ कुछ हजार वोटों की मामूली तकनीकी हार नहीं थी. पार्टी को अपने पुराने प्रभाव वाले इलाके में कांग्रेस के सामने स्पष्ट अंतर से पीछे रहना पड़ा.

दतिया का नतीजा तीन परतों में समझना चाहिए-

  • पहली 2023 में नरोत्तम मिश्रा की हार के बाद बीजेपी का चेहरा बदलना
  • दूसरी टिकट कटने पर संगठन के भीतर पैदा हुआ असंतोष
  • तीसरी कांग्रेस का अपने पुराने उम्मीदवार घनश्याम सिंह के जरिए सीट बचा लेना.

साफ है कि बीजेपी ने नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले क्षेत्र में नेतृत्व और उम्मीदवार बदलने का प्रयोग किया, लेकिन टिकट विवाद से पैदा हुई अंदरूनी खाई चुनाव तक पूरी तरह नहीं भर पाई. 3 अगस्त का नतीजा इसी असंतोष, कांग्रेस की जमीनी पकड़ और बीजेपी के उम्मीदवार चयन का संयुक्त परिणाम दिखाई देता है.

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