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Explainer: BJP के गढ़ बांकीपुर और दतिया में आखिर कैसे हो गया बड़ा खेला? सवर्ण नाराजगी, पेपर लीक या राम मंदिर विवाद... हार की पूरी कहानी

बांकीपुर और दतिया उपचुनाव में BJP को हार क्यों मिली? क्या सवर्ण नाराजगी, NEET पेपर लीक, राम मंदिर दान चोरी विवाद और स्थानीय संगठन की कमजोरियां इसकी वजह बनीं? जानिए पूरी डिटेल

Explainer: BJP के गढ़ बांकीपुर और दतिया में आखिर कैसे हो गया बड़ा खेला? सवर्ण नाराजगी, पेपर लीक या राम मंदिर विवाद... हार की पूरी कहानी
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बिहार के बांकीपुर (Bankipur) और मध्य प्रदेश के दतिया (Datia) विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिली हार को लेकर पार्टी के भीतर मंथन शुरू हो गया है. सोमवार को कई भाजपा नेताओं ने माना कि इस हार के पीछे कई कारण रहे. इनमें सवर्ण वोटरों की नाराजगी, पेपर लीक का मुद्दा, राम मंदिर में दान चोरी का मामला, स्थानीय स्तर पर संगठन की कमजोरियां और टिकट चयन से जुड़े विवाद शामिल हैं.

बांकीपुर सीट पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के पास थी. इस साल उनके राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी. वहीं दतिया भी लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बांकीपुर सीट भाजपा से छीन ली, जबकि कांग्रेस के कुँवर घनश्याम सिंह ने दतिया सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी.

कैसे पार्टी के लिए चेतावनी है ये हार?

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2023 से पहले दतिया में भाजपा लगातार तीन बार जीत दर्ज कर चुकी थी. उनके मुताबिक यह हार पार्टी के लिए एक बड़ा संकेत है कि जिन वर्गों को भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक माना जाता था, उनमें पार्टी का समर्थन कमजोर हुआ है. उन्होंने कहा कि पार्टी उन इलाकों में भी नहीं जीत सकी जहां रविशंकर प्रसाद, नितिन नवीन और रामकृपाल यादव जैसे बड़े नेताओं का प्रभाव माना जाता है. यह पार्टी के लिए चिंता का विषय है.

बांकीपुर में आखिर ऐसा क्या हो गया?

बांकीपुर सीट पर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी. यहां 42 प्रतिशत से अधिक मतदाता सवर्ण समुदाय से आते हैं. भाजपा के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) और जनता दल (यूनाइटेड) ने भी चुनाव में पूरा जोर लगाया. इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को किसी भी जाति का पूरी तरह समर्थन नहीं मिला. भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि लगभग हर जाति वर्ग में पार्टी के प्रति नाराजगी दिखाई दी.

उनके मुताबिक, कुर्मी समुदाय मुख्यमंत्री पद से नीतीश कुमार को हटाकर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने से नाराज है. सवर्ण मतदाताओं का बड़ा हिस्सा प्रशांत किशोर के साथ चला गया. मुस्लिम वोटर भाजपा के पक्ष में नहीं आए और केवल दलित वोट बैंक को पार्टी ने अपने साथ बरकरार माना. इसके साथ ही पार्टी का मानना है कि सबसे बड़ी चिंता यह रही कि महिला मतदाताओं का समर्थन भी पहले जैसा नहीं दिखा.

क्या NEET और पेपर लीक का मुद्दा भी बना वजह?

दूसरे भाजपा नेता ने कहा कि हाल में छात्रों के प्रदर्शन और पेपर लीक के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने बताया कि बांकीपुर में बड़ी संख्या में कोचिंग सेंटर हैं और बिहार से बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं. इसलिए पेपर लीक और छात्रों के विरोध प्रदर्शन का असर स्थानीय स्तर पर महसूस किया गया.

सवर्ण नाराजगी की वजह क्या बताई गई?

पहले नेता ने कहा कि सवर्ण समुदाय की नाराजगी कई कारणों से बढ़ी. उन्होंने बताया कि जातीय भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए विश्वविद्यालयों में समानता समितियां और इक्विटी स्क्वॉड बनाने वाले UGC के दिशा-निर्देश, जिन्हें बाद में वापस ले लिया गया, भी नाराजगी का कारण बने. इसके अलावा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले से भी सवर्ण समाज का एक वर्ग संतुष्ट नहीं था.

नेता के अनुसार, नीतीश कुमार की जीत में कुर्मी समुदाय की भूमिका अहम रही है, लेकिन सवर्ण समाज, मुख्यमंत्री के तौर पर सम्राट चौधरी के चयन से खुश नहीं था. बाद में UGC के इक्विटी नियमों को लेकर विवाद ने उनकी नाराजगी और बढ़ा दी.

नेताओं के बयान और टिकट चयन भी बना मुद्दा

भाजपा के एक नेता ने कहा कि चुनाव के दौरान कुछ वरिष्ठ नेताओं के बयान, जिनका उद्देश्य पार्टी की मजबूत स्थिति दिखाना था, शहरी मतदाताओं को अहंकारी रवैये के रूप में महसूस हुए. उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही कई गलतियां हुईं. सबसे बड़ी गलती उम्मीदवार चयन में हुई.

उनके मुताबिक पहले भाजपा ने अभिषेक कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बाद में उनका नाम वापस लेना पड़ा क्योंकि विपक्ष उनके परिवार की कथित भूमिका को चारा घोटाले का चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुका था.

दतिया में क्यों हुआ खेला?

दतिया में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया. हालांकि वह 2023 का विधानसभा चुनाव हार गए थे, लेकिन 2008 से लगातार तीन बार इस सीट से विधायक रह चुके थे. मध्य प्रदेश के एक भाजपा विधायक ने कहा कि दतिया की हार केवल उम्मीदवार की वजह से नहीं हुई. उनके अनुसार अगर नरोत्तम मिश्रा को भी टिकट मिलता, तब भी पार्टी को हार का सामना करना पड़ सकता था क्योंकि सवर्ण समुदाय पहले से नाराज था.

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेता कल्लू कुशवाहा की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री मोहन यादव पर आरोप लगाया था कि उन्होंने मामले के आरोपी, जो यादव समुदाय से था, को संरक्षण दिया. इसके बाद कुशवाहा समाज का बड़ा हिस्सा कांग्रेस उम्मीदवार के साथ चला गया.

विधायक ने यह भी कहा कि किसी नेता की व्यक्तिगत लोकप्रियता और पार्टी के संगठन की मजबूती अलग-अलग बातें होती हैं. उनके अनुसार नरोत्तम मिश्रा ने संगठन को उतना मजबूत नहीं किया था, जिसका असर चुनाव परिणाम में दिखाई दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने भी इस बात पर ध्यान दिया था.

हार के बाद क्या बोले नितिन नवीन?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पार्टी जनता के फैसले का सम्मान करती है और हार के कारणों की गंभीरता से समीक्षा करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मांजलपुर की जनता का भाजपा पर भरोसा जताने के लिए आभार व्यक्त करती है. वहीं बांकीपुर और दतिया में अपेक्षित जनादेश नहीं मिला. इन दोनों सीटों के चुनाव परिणामों का गंभीरता से विश्लेषण किया जाएगा और पार्टी नई ऊर्जा तथा दृढ़ संकल्प के साथ जनता के बीच जाकर उनका विश्वास और मजबूत करने का काम करेगी.

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