इंदौर के बाद खंडवा में पानी बना काल, जवानी में बूढ़े हो गए 3000 लोग, जहरीले पानी ने तोड़ दिए रिश्ते
मध्य प्रदेश में इंदौर के बाद अब खंडवा जिले से डराने वाली तस्वीर सामने आई है. यहां के 7 गांवों में पीने का पानी जहर बन चुका है, जिसने धीरे-धीरे हजारों लोगों की सेहत बर्बाद कर दी है. गांव के लोग चलते फिरते मरीज बन गए हैं. इन गांवों जिले के लोग रिश्ता जोड़ने से भी इनकार करने लगे हैं.
एमपी (Madhya) के इंदौर के बाद अब खंडवा से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो रूह कंपा देते वाली है. खंडवा जिले के किल्लोद ब्लॉक के 7 गांवों को भूजल जहरीला हो चुका है. इस क्षेत्र के भूजल में फ्लोरोसिस की मात्रा मानक से कई गुना ज्यादा है. हर घूंट के साथ क्षेत्र के लोक जहर पी रहे हैं. लोग इसे मजबूरी में अमृत समझकर पी रहे हैं, पर यहां का पानी प्यास नहीं बुझाने के साथ जिंदगी ही नहीं रिश्तेदारी भी छीन रहा है. 7 गांवों के 3000 लोग इसी दर्दनाक हकीकत का सामना लंबे समय से कर रहे हैं. जहरीले पानी का असर इतना है कि लोग जवानी में ही लोग बूढ़े हो चुके हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई महामारी नहीं, ना ही कोई युद्ध है, यह एक साइलेंट किलर है, जिसे नाम दिया गया है जहरीला पानी. शासन प्रशासन को सब कुछ पता है, लेकिन कोई कुछ करने को तैयार नहीं है.
7 गांव, 3000 लोगों की एक जैसी कहानी
खंडवा जिले के किल्लोद ब्लॉक के 7 गांवों में रहने वाले करीब 3000 लोग गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं. हालत यह है कि 25–30 साल की उम्र में ही लोग बुज़ुर्गों जैसी बीमारियों का शिकार हो गए हैं. फ्लोराइड युक्त पानी की वजह से बालों का गिरना, बाल सफेद होना, हड्डियों में कमजोरी और चलने-फिरने में दिक्कत आम हो चुकी है. जहरीले पानी की वजह से लोग डेंटल फ्लोरोसिस और स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं.
रिश्ते करने से इनकार, सामाजिक अभिशाप
हालात इतने भयावह हैं कि इन गांवों के युवाओं से शादी करने से लोग इनकार करने लगे हैं. बाहर के इलाकों में इन गांवों की पहचान अब 'बीमार गांव' के रूप में हो चुकी है. रिश्तों की बात आते ही लोग पानी और बीमारी का हवाला देकर पीछे हट जाते हैं.
जहरीले पानी की वजह क्या?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि किल्लोद ब्लॉक के 7 गांवों के भूजल में फ्लोराइड और अन्य जहरीले तत्वों की मात्रा बेहद ज्यादा है. सालों से यही पानी पीने की मजबूरी लोगों को इस हाल तक ले आई है. शुद्ध पानी की कोई स्थायी व्यवस्था अब तक नहीं की गई.
अफसरों की लापरवाही या सिस्टम की नाकामी?
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को शिकायतें दीं, लेकिन सिर्फ सर्वे और कागजी कार्रवाई के अलावा कुछ नहीं हुआ। न तो सुरक्षित पानी मिला और न ही समय पर इलाज. हालांकि डीएम के आदेश में पानी की जांच की प्रक्रिया शुरू हुई है.
इन गांवों के लोग स्थानीय विधायक और सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इन गांवों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? जहरीले पानी की जांच समय पर क्यों नहीं हुई? इंदौर के बाद भी सबक क्यों नहीं लिया गया?
क्या होती है फ्लोरोसिस बीमारी?
फ्लोरोसिस बीमारी फ्लोराइड युक्त पानी पीने की वजह से होता है. पानी की इसकी मात्रा कई गुना ज्यादा होने की वजह से बच्चों के दांत कम उम्र में ही पीले पड़कर टूटने लगे हैं, वहीं युवाओं के दांत पूरी तरह सड़ चुके हैं. कई लोगों की हड्डियों में दर्द, टेढ़ापन और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि उनके सामाजिक भविष्य का भी सवाल बन चुका है.
किल्लोद ब्लॉक के गांवों में फ्लोरोसिस के असर का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि युवाओं के जीवन पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है. दांतों की बदसूरती के कारण कई युवाओं के विवाह नहीं हो पा रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि लड़के-लड़कियों के चेहरे की सुंदरता दांतों की वजह से प्रभावित हो रही हैं, जिसके चलते रिश्ते तय होने से पहले ही टूट जाते हैं. गांव के लोगों का कहना है कि यह बीमारी अब उनके लिए सामाजिक अभिशाप बन चुकी है.





