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क्या MP में फिर चूके कांग्रेस के जीतू पटवारी? 2024 में इंदौर में हाथ से निकला कैंडिडेट, अब राज्यसभा चुनाव में हो गया खेला

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को इंदौर लोकसभा चुनाव के बाद अब राज्यसभा चुनाव में भी बड़ा झटका लगा. जानिए कैसे रणनीति और गुटबाजी बनी चुनौती.

Jitu Patwari MP Congress मीनाक्षी नटराजन Rajya Sabha Election MP
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( Image Source:  @jitupatwari )

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का कार्यकाल अब तक चुनौतियों और झटकों के लिए ज्यादा पहचाना जाएगा. लोकसभा चुनाव 2024 में इंदौर से कांग्रेस उम्मीदवार का अचानक मैदान छोड़ देना, छिंदवाड़ा जैसी परंपरागत सीट का हाथ से निकल जाना, विजयपुर उपचुनाव में कानूनी विवाद और अब राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना, इन घटनाओं ने उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ऐसा हो भी क्यों नहीं, जीती हुई सीट कांग्रेस हार गई.

कांग्रेस इसे राजनीतिक साजिश बता रही है, लेकिन बीजेपी इसे संगठनात्मक विफलता बता रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जीतू पटवारी अपनी ही पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और रणनीतिक चूकों के कारण लगातार राजनीतिक नुकसान झेल रहे हैं?

जीतू पटवारी का खेल किसने बिगाड़ा?

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना कांग्रेस की हार नहीं है.... यह व्यक्तिगत रूप से मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की हार है. छोटी सी चूक से उनके नेतृत्व में पार्टी जीती हुई सीट गवां बैठी है. हालांकि, यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी भी इसी वजह से खतरे में पड़ गई. मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. दिसंबर 2023 में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठने के बाद से उन्हें लगातार झटके लग रहे हैं. बीजेपी का आरोप है कि खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने किया है.

खास बात यह है कि जीतू को भनक तक नहीं लगी और कांग्रेस के हाथ से चली गई राज्यसभा की सीट. राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के बाद जीतू पटवारी अपने नेताओं के साथ मिलकर विधायकों के बाड़ेबंदी में लगे थे. उनके नाक के नीचे चल रहे खेल का उन्हें अंदाजा भी नहीं था.

वहीं, बीजेपी स्क्रूटनी के दिन विधानसभा में रिटर्निंग ऑफिसर के पास उस केस को लेकर पहुंच गई, जिसमें कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी हुआ था. मामला हैदराबाद के एक कोर्ट से जुड़ा था. मीनाक्षी के वकील ने उस मामले में जवाब भी दिया था. रिटर्निंग ऑफिसर ने इस परिवाद के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया. जीतू पटवारी की पूरी रणनीति धरी की धरी रह गई.

अब तक लग चुके हैं तीन बड़े झटके

1. एमपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कमलनाथ को हटाकर पार्टी आलाकमान ने जीतू पटवारी को दिसंबर 2023 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. लोकसभा चुनाव 2024 में मध्य प्रदेश की इंदौर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने मतदान से पहले अपना नामांकन वापस ले लिया था और बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे. जबकि कांति बम जीतू पटवारी के करीबी नेता थे. उनका नामांकन वापस लेने का फैसला 29 अप्रैल 2024 को आया, जो नाम वापस लेने की अंतिम तारीख थी.

इसके बाद कांग्रेस के सामने इंदौर में कोई आधिकारिक उम्मीदवार नहीं बचा. ऐसे में कांग्रेस ने अपने समर्थकों और मतदाताओं से किसी अन्य प्रत्याशी को वोट देने के बजाय NOTA (None Of The Above) का बटन दबाने की अपील की थी. कांग्रेस का तर्क था कि यह भाजपा के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध का प्रतीक होगा.

इस अपील का असर भी दिखा. इंदौर में NOTA को रिकॉर्ड 2,18,674 वोट मिले और वह बीजेपी उम्मीदवार शंकर लालवानी के बाद दूसरे स्थान पर रहा. यह लोकसभा चुनावों के इतिहास में सबसे अधिक NOTA वोटों में से एक था.

2. प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उनसे अलग हो गए. इसके बाद विजयपुर में उपचुनाव हुआ. जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस उम्मीदवार मुकेश मल्होत्रा की जीत हो गई. मगर यह खुशी ज्यादा नहीं रही. कांग्रेस के रणनीतिकारों ने यहां चूक कर दी. विधायक पर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी नामांकन फॉर्म में नहीं भरा. हाइकोर्ट से विधायकी खत्म हो गई. सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली लेकिन मामला अभी चल रहा है.

मीनाक्षी नटराजन के मामले में भी कांग्रेसियों से बड़ी चूक हो गई. उनके मामले को छुपाया गया और बीजेपी ने इसे हथियार बनाकर कांग्रेस को ढेर कर दिया.

3. राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले जीतू पटवारी ने खुद जमीनी स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं. लेकिन हमेशा वह संगठन के अलग-अलग खेमों से जूझ रहे हैं. अपने ही लोगों पर अटूट भरोसा कर जीतू पटवारी हमेशा धोखा खा जा रहे हैं. साथ ही उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा रहा है. पूरे कार्यकाल के दौरान उनके नाम एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं आई, जिससे प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सके.

क्या कांग्रेसियों ने ही किया नटराजन का केस लीक?

अगर बीजेपी के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के दावों में दम है तो यह खेल जीतू पटवारी के साथ कांग्रेसियों ने ही किया है. मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि तेलंगाना के ही कुछ मित्रों ने हमें यह दस्तावेज उपलब्ध करवाए थे. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है. वहां के कांग्रेसी मित्रों ने ही यह दस्तावेज उपलब्ध करवाए हैं. कांग्रेस के लोगों ने ही हमें जानकारी दी है.

इस सीट पर कई सारे कांग्रेसियों की नजर थी, जब उनको सीट नहीं मिली तो यह खेल बिगाड़ने का काम कांग्रेसियों ने किया है. पंच-सरपंच के फॉर्म भरने वाले लोगों को भी अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी होती है.

एमपी की इस सीट पर थे कई दावेदार

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की इस सीट से दिग्विजय सिंह सांसद थे. दिग्विजय ने पहले ही मना कर दिया था कि हमें राज्यसभा नहीं जाना है. इसके बाद इस सीट के लिए दावेदारों के नामों की चर्चा थी. पार्टी नेतृत्व ने इस सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन को चुना. इसके बाद से ही पार्टी के अंदर कथित रूप से मतभेद की खबरें आने लगी थीं. कुछ नेताओं ने खुलकर लिखा भी है.

कथित रूप से इस सीट के दावेदार कमलनाथ भी माने जा रहे थे. उम्मीदवार की घोषणा से पहले उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मिले थे. एक्स पर ही वह मीनाक्षी नटराजन का सपोर्ट करते रहे हैं. लेकिन वह न तो नामांकन के दौरान दिखे और न ही विधायकों की मीटिंग में दिखे. जबकि कमलनाथ छिंदवाड़ा से विधायक हैं. इस नाजुक घड़ी में भी वह मध्य प्रदेश से दूर थे. अधिकांश सीटों पर विधायक भी उनके चहेते हैं. जीतू पटवारी को कमलनाथ के हटाने के बाद ही कुर्सी मिली थी.

दूषित पेयजल, कफ सिरप कांड का नहीं उठा पाए लाभ

मध्य प्रदेश में उनके कार्यकाल के दौरान कई बड़े मुद्दे सामने आए. इंदौर में दूषित जल से लेकर छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की मौत तक के मामले हैं. जीतू पटवारी ने इन मुद्दों पर आक्रमकता तो दिखाए लेकिन जनता के बीच में एक नैरेटिव नहीं गढ़ पाए. जिससे पूरे प्रदेश में एक माहौल बन सके.

अब मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है, जिसके तहत कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गय. इसके बाद बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है.

जीतू पटवारी के 'फेल' होने और खेल बिगड़ने के प्रमुख कारण क्या?

नामांकन का खारिज होना: बीजेपी द्वारा पर्याप्त संख्याबल न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारने से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं. चुनाव अधिकारी ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में हैदराबाद में लंबित एक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए उसे रद्द कर दिया. कांग्रेस इसे बीजेपी की साजिश और अधिकारियों की मिलीभगत बता रही है.

क्रॉस वोटिंग का खतरा: कांग्रेस के पास 62 विधायक थे, लेकिन उन्हें अपने ही विधायकों में भारी 'क्रॉस वोटिंग' (Cross Voting) और टूट का डर सता रहा था. 2020 की तरह विधायकों के इस्तीफे या बगावत की आशंका के चलते कांग्रेस नेतृत्व को अपने विधायकों को आनन-फानन में बेंगलुरू (बेंगलुरु) तक ले जाना पड़ा.

कमजोर रणनीति व प्रबंधन: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी बार-बार विधायकों को एकजुट रखने में पिछड़ते नजर आ रहे हैं. इससे पहले विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. जानकारों का मानना है कि पार्टी के भीतर वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल की कमी और कमजोर चुनावी प्रबंधन के कारण कांग्रेस का खेल लगातार बिगड़ रहा है.

नामांकन रद्द होने और संभावित क्रॉस वोटिंग के संकट के बीच, जीतू पटवारी ने निर्वाचन आयोग और बीजेपी के खिलाफ दिल्ली से लेकर भोपाल तक विरोध प्रदर्शन की कमान संभाली.

जीतू को वरिष्ठ कांग्रेसी पसंद नहीं करते!

दरअसल, जीतू पटवारी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से कांग्रेस गुटबाजी से कभी उबर नहीं पाई है. अनबन की खबरें हमेशा आते रही हैं. दिग्विजय सिंह को छोड़ दें, खुलकर कम ही बड़े नेता साथ दिखते हैं. ऊपर से सब कुछ ऑल इज वेल दिखता है, लेकिन जीतू को अधिकांश वरिष्ठ कांग्रेसी नहीं पसंद करते हैं. वह ढाई साल के कार्यकाल में हमेशा इन्हीं चीजों से जूझते रहे हैं.

जीतू पटवारी भले ही एमपी कांग्रेस के अध्यक्ष हैं लेकिन दबदबा अभी भी सीनियर नेताओं का ही दिखता है. अप्रत्यक्ष तरीके से वे लोग प्रदेश संगठन पर अपना दबदबा चाहते हैं. प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह इसे लेकर बोल चुके हैं. जीतू लगातार सभी को एक मंच पर लाने की कोशिश करते हैं लेकिन सफल होते नहीं दिखे.

मोहन यादव ने 10 दिन पहले क्या कहा था?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 मई 2026 को शुजालपुर में सियासी जनसभा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि सीएम मोहन यादव ने कहा था कि उनकी पार्टी के लिए यह बहुत अच्छी बात है कि जो नेता अपनी खुद की विधानसभा सीट नहीं बचा सका और बुरी तरह हार गया, उसे कांग्रेस ने अपना प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है. इस दौरान उन्होंने जीतू पटवारी पर तीखे हमले करते हुए उन्हें 'टपोरी लाल' भी कहा था.

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