मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर हंगामा! EC के बाहर धरने पर बैठे नेता, कांग्रेस के पास ऑप्शन में क्या-Explainer
मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार Meenakshi Natarajan का नामांकन रद्द होने के बाद सियासी घमासान मच गया है. विरोध में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए. कांग्रेस का आरोप है कि यह लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर हमला है, जबकि भाजपा इसे नियमों के पालन का मामला बता रही है. अब कांग्रेस के पास चुनाव आयोग और अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प है.
मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी लड़ाई अब सीधे चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच गई है. कांग्रेस मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद सियासी बवाल मच गया है. भाजपा इसे 'सत्य की जीत' बता रही है, जबकि कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे 'लोकतंत्र की हत्या' और 'सीट चोरी' करार दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
वहीं इस मामले पर कांग्रेस ने प्रदर्शन भी कर रही है. इसी के साथ भाजपा ने जीत का जश्न भी मनाया है. इसी के साथ नीचे डिटेल में पूरी तरह से बताया गया है अब कांग्रेस क्या करेगी तो वहीं आइए जानते हैं कि इस मामले पर किसने क्या कहा है और कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के लिए आगे का रास्ता खुला है बंद हो गया?
मीनाक्षी नटराजन ने किस केस को छिपा लिया था?
यह मामला वर्ष 2025 का है। श्रीलता की शिकायत के आधार पर Meenakshi Natarajan समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह केस फिलहाल अदालत में विचाराधीन है। आरोप है कि नामांकन दाखिल करते समय मीनाक्षी नटराजन ने इस लंबित मामले का उल्लेख अपने शपथपत्र और नामांकन दस्तावेजों में नहीं किया। यही चूक उनके लिए भारी पड़ गई और अंततः उनका राज्यसभा नामांकन रद्द कर दिया गया।
कांग्रेस को क्यों लगा बड़ा झटका?
कांग्रेस अपने विधायकों को कथित 'ऑपरेशन लोटस' से बचाने के लिए बेंगलुरु भेजने की तैयारी में थी. विधायक एयरपोर्ट तक पहुंच चुके थे और फ्लाइट भी तैयार थी, लेकिन नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही उन्हें वापस बुला लिया गया. बताया गया कि फ्लाइट को रनवे से ही वापस कर दिया गया.
क्या कांग्रेस के पास अभी भी मौका या BJP की जीत
मध्य प्रदेश से कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस आगे क्या कदम उठाती है. हालांकि नामांकन खारिज हो चुका है, लेकिन पार्टी के पास अभी कानूनी और संवैधानिक विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.
BBC में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव Avadhesh Pratap Singh के अनुसार, रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नामांकन वापसी की अंतिम तारीख तक अपील कर सकती है. इस दौरान मामले में हस्तक्षेप करने का अधिकार चुनाव आयोग या अदालत के पास है.
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग या कोई सक्षम अदालत कांग्रेस की अपील पर सुनवाई करते हुए कोई राहत देती है, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं. लेकिन यदि तय समय सीमा के भीतर किसी भी स्तर पर हस्तक्षेप नहीं होता, तो मैदान में बचे तीनों उम्मीदवार निर्विरोध राज्यसभा सदस्य घोषित कर दिए जाएंगे. यानी अब कांग्रेस की उम्मीदें पूरी तरह कानूनी लड़ाई पर टिकी हैं और आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मामला अदालत और चुनाव आयोग तक सीमित रहेगा या फिर मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़े विवाद का रूप लेगा.
मीनाक्षी नटराजन ने क्या आरोप लगाए?
मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारना ही इस बात का संकेत था कि वह लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने की राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि 'यह सिर्फ एक राज्यसभा सीट की लड़ाई नहीं है, बल्कि लोकतंत्र, संघीय ढांचे और 'आइडिया ऑफ इंडिया' को बचाने की लड़ाई है."
जीतू पटवारी ने चुनाव अधिकारी पर क्या सवाल उठाए?
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को पूरी ताकत से लड़ेगी. उनका आरोप था कि कानूनी आधारों को नजरअंदाज किया गया.नामांकन रद्द करना राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम है. चुनाव अधिकारी ने भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया.
केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस नेताओं का विरोध
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता K. C. Venugopal, Sachin Pilot, Jairam Ramesh और Bhupesh Baghel चुनाव आयोग कार्यालय पहुंचे. वेणुगोपाल ने कहा कि यह लोकतंत्र का बुनियादी सवाल है. हम यहां तब तक बैठेंगे जब तक हमें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिलती."
सचिन पायलट ने क्या दावा किया?
सचिन पायलट ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई FIR या चार्जशीट नहीं है. केवल एक नोटिस के आधार पर नामांकन खारिज कर दिया गया. कांग्रेस नेताओं को चुनाव आयोग में प्रवेश तक नहीं दिया गया. उन्होंने इसे अभूतपूर्व फैसला बताया.
मोहन यादव ने कांग्रेस पर पलटवार कैसे किया?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ कोई मामला लंबित है तो उसकी जानकारी शपथपत्र में देना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि जानकारी छिपाना आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने जैसा है. मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं. कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए कि वह ऐसे उम्मीदवार क्यों उतार रही है?"
कैलाश विजयवर्गीय ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि संविधान और संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ाया है." कैलाश विजयवर्गीय ने यह भी दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में खामियों की जानकारी तेलंगाना से मिली. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है. हो सकता है कांग्रेस के लोगों ने ही हमें यह जानकारी दी हो. यही कांग्रेस की स्थिति है." इस बयान को कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है.
चुनाव आयोग के बाहर कांग्रेस की नाराजगी क्यों बढ़ी?
कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि उन्हें चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने नहीं दिया गया. आयोग के अधिकांश अधिकारी शाम 6 बजे के बाद कार्यालय छोड़ चुके थे. उनकी शिकायत सुनने वाला कोई नहीं था. हालांकि सूत्रों के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar कार्यालय में मौजूद थे, लेकिन कांग्रेस ने औपचारिक रूप से मिलने का समय नहीं मांगा था.
क्या है पूरे विवाद का राजनीतिक मतलब?
इस पूरे विवाद ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा चुनावी लड़ाई को कानूनी बहस से निकालकर सीधे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल दिया है. कांग्रेस इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है, जबकि भाजपा इसे चुनावी नियमों के पालन और पारदर्शिता का मामला बता रही है. अब नजर इस बात पर होगी कि कांग्रेस इस फैसले को अदालत या चुनाव आयोग के स्तर पर किस तरह चुनौती देती है और इसका राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर क्या असर पड़ता है.




