MP में सत्ता बनाम अफसरशाही- मंत्री और IAS टकराव सीएम तक पहुंचा; महिला कर्मचारी के आरोपों से मचा बवाल
मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह, आईएएस अधिकारी अरविंद शाह और एक महिला कर्मचारी के बीच विवाद बढ़कर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पहुंच गया है. वेतन विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब प्रशासनिक टकराव और गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है.
मध्य प्रदेश में इन दिनों नेताओं और नौकरशाही के बीच टकराव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे शासन व्यवस्था, प्रशासनिक अनुशासन और जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच संतुलन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ताजा मामला जबलपुर से सामने आया है, जहां कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और स्मार्ट सिटी जबलपुर के सीईओ अरविंद शाह और एक महिला कर्मचारी के बीच विवाद बढ़कर अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन तक पहुंच गया है.
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में पहले भी कई संवेदनशील मामले सामने आ चुके हैं. बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी पहले आईपीएस अधिकारी आयुष जाखड़ के साथ विवाद को लेकर सुर्खियों में रहे थे, वहीं अलीराजपुर में कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इंदर सिंह चौहान पर एक महिला जनपद पंचायत सीईओ को धमकाने के गंभीर आरोप लगे थे.
मौजूदा मामला एक सामान्य वेतन विवाद से शुरू हुआ. स्मार्ट सिटी जबलपुर से जुड़ी कर्मचारी दिलप्रीत भल्ला ने आरोप लगाया कि उनका वेतन लंबे समय से रोका गया था. अपनी शिकायत और हलफनामे में उन्होंने बताया कि जब वह समाधान के लिए सीईओ अरविंद शाह के पास गईं, तो उनके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं.
दिलप्रीत भल्ला ने क्या लगाए आरोप?
दिलप्रीत भल्ला ने आरोप लगाया कि अरविंद शाह ने उन्हें अपमानित किया और उनके लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी हुई. मामला तब और बढ़ गया जब उन्होंने मदद के लिए कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से संपर्क किया. शिकायत के मुताबिक, इसके बाद शाह और ज्यादा आक्रामक हो गए और उन्होंने कथित तौर पर अपनी प्रशासनिक ताकत का हवाला देते हुए टिप्पणी की.
शिकायत में एक गंभीर आरोप यह भी है कि शाह ने कहा कि वह अपनी योग्यता के दम पर आईएएस बने हैं और मंत्रियों के निर्देश नहीं मानते, साथ ही उन्होंने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को जहां चाहें जाने की चुनौती भी दी. विवाद तब और गहरा गया जब सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति भी इस मामले में शामिल हो गई. पीड़ित कर्मचारी ने समिति से संपर्क किया, जिसके बाद समिति ने एक महिला कर्मचारी के साथ हुए व्यवहार पर चिंता जताई और कार्रवाई की मांग की.
आईएएस अधिकारी अरविंद शाह ने इस मामले पर अभी तक सार्वजनिक रूप से विस्तृत टिप्पणी नहीं की है. उन्होंने कहा है कि उन्होंने अपना पक्ष संबंधित प्रशासनिक संघ के सामने रख दिया है.




