Begin typing your search...

ग्वालियर में पति की सगी बहन को बताया 'दूसरी पत्नी', कैसे कोर्ट को गुमराह कर के लिए एकतरफा तलाक

ग्वालियर में एक महिला ने पति से तलाक पाने के लिए उसकी बहन को ही दूसरी पत्नी बताकर कोर्ट को गुमराह किया. फर्जी फोटो के आधार पर मिला एकतरफा तलाक, लेकिन अब सच सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है.

ग्वालियर में पति की सगी बहन को बताया दूसरी पत्नी, कैसे कोर्ट को गुमराह कर के लिए एकतरफा तलाक
X
( Image Source:  AI Generated )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय4 Mins Read

Updated on: 26 April 2026 1:43 PM IST

न्याय की दहलीज पर झूठ बोलकर जीत हासिल करना कितना भारी पड़ सकता है, इसका एक चौंकाने वाला ताजा उदाहरण मध्य प्रदेश के ग्वालियर खंडपीठ में सामने आया है. इस मामले में एक महिला ने अपने पति से तलाक दिलाने के लिए इतनी बड़ी साजिश रची कि सुनने वाले हैरान रह गए. उसने फैमिली कोर्ट में अपने पति की अपनी सगी बहन को ही उसकी 'दूसरी पत्नी' बता दिया और एक साधारण पारिवारिक फोटो को अवैध दूसरी शादी का सबूत बताकर पेश कर दिया. हैरानी की बात यह है कि कोर्ट ने इस झूठ को सच मान लिया और बिना पति की तरफ से कोई सुनवाई किए एकतरफा तलाक की डिक्री भी जारी कर दी.

1998 की शादी और 2021 का मास्टरप्लान

यह पूरा मामला साल 1998 का है. ग्वालियर की रहने वाली इस महिला का विवाह एक मार्केटिंग अधिकारी से हुआ था. शुरू के कुछ साल तो ठीक-ठाक गुजरे, लेकिन पति की नौकरी के कारण उन्हें अक्सर बाहर रहना पड़ता था. धीरे-धीरे पति-पत्नी के रिश्तों में दरार पड़ने लगी. साल 2015 से दोनों अलग-अलग रहने लगे. महिला तलाक लेना चाहती थी, लेकिन पति अभी भी रिश्ते को बचाने की उम्मीद लगाए बैठा था और सुलह की कोशिश कर रहा था. जब महिला को लगा कि सामान्य तरीके से तलाक नहीं मिलेगा, तो उसने2021 में एक बड़ा शॉर्टकट अपनाने का फैसला किया। उसने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि उसके पति ने उसकी जानकारी के बिना दूसरी शादी कर ली है.

ननद को सौतन बनाकर पेश किया सबूत

कोर्ट में अपना दावा मजबूत करने के लिए महिला ने एक साधारण ग्रुप फोटो को सबूत के तौर पर पेश किया. इस फोटो में पति अपनी सगी बहन और परिवार के बाकी सदस्यों के साथ खड़ा था. महिला ने बिना किसी शर्म के कोर्ट में अपनी ही ननद (पति की बहन) की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह महिला पति की दूसरी पत्नी है. चूंकि पति अपनी नौकरी के कारण ज्यादातर समय बाहर रहता था, इसलिए कोर्ट का नोटिस उसे समय पर नहीं मिल पाया. कोर्ट ने महिला की बात और उस फोटो को बिना ज्यादा जांच के सच मान लिया और पति की तरफ से कोई जवाब न आने के कारण एकतरफा फैसला सुना दिया. कोर्ट ने तलाक की डिक्री जारी कर दी.

जब खुला झूठ का पिटारा

यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में पति को अचानक अपने तलाक होने की खबर लगी. जब उसने कोर्ट के रिकॉर्ड देखे और उस फोटो को ध्यान से देखा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई. जिस महिला को कोर्ट में उसकी 'दूसरी पत्नी' बताया गया था, वह असल में उसकी अपनी सगी बहन थी. एक साधारण पारिवारिक तस्वीर को तोड़-मरोड़कर पेश करके महिला ने न सिर्फ कोर्ट को गुमराह किया, बल्कि अपने पति के साथ बहुत बड़ा अन्याय भी किया. अब इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह देखना बाकी है।यह घटना हमें साफ-साफ बताती है कि न्याय की प्रक्रिया में झूठ बोलना कितना खतरनाक और भारी पड़ सकता है. एक छोटे से झूठ ने न सिर्फ पति का जीवन बर्बाद करने की कोशिश की, बल्कि पूरे परिवार को भी मानसिक और सामाजिक रूप से परेशान कर दिया. सच्चाई आखिरकार सामने आ ही जाती है, लेकिन तब तक बहुत नुकसान हो चुका होता है.

अगला लेख