15 मौतें, सैकड़ों बीमार! इंदौर की घटना के बाद जागी सरकार, पूरे MP में होगी पेयजल सिस्टम की समीक्षा; मामले में अब तक क्या-क्या हुआ?
मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी से 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती हैं. कुछ रिपोर्ट्स में 15 लोगों की मौत होने की बात सामने आई है. पानी के पेयजल में सीवेज मिलने से संकट पैदा हुआ, जिस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त कार्रवाई और पूरे प्रदेश में सुधारात्मक कदमों के निर्देश दिए हैं.
स्वच्छता के लिए देश और दुनिया में मिसाल माने जाने वाला इंदौर साल 2026 की शुरुआत में एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है. शहर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने के कारण फैली बीमारी ने प्रशासन, स्वास्थ्य तंत्र और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. हालात ऐसे बने कि उल्टी-दस्त, तेज बुखार और डिहाइड्रेशन से जूझते सैकड़ों लोग अस्पतालों में भर्ती हो गए. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. वहीं, अन्य मीडिया रिपोर्ट्स में 15 लोगों की मौत की बात कही जा रही है.
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भगीरथपुरा, जहां करीब 15 हजार की आबादी रहती है, वहां दिसंबर के मध्य से ही नलों के पानी में बदबू, कड़वाहट और रंग बदलने की शिकायतें आने लगी थीं. स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को कई बार आगाह किया, लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई. मजबूरी में कई परिवारों ने उसी पानी का इस्तेमाल पीने और खाना बनाने में किया, जो बाद में जानलेवा साबित हुआ.
27-28 दिसंबर से आने लगे बीमारी के मामले
25 दिसंबर तक पानी की आपूर्ति जारी रही, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए. 27 और 28 दिसंबर को बीमारी के पहले मामले सामने आए. लोगों को तेज उल्टी-दस्त, कमजोरी और डिहाइड्रेशन की शिकायत होने लगी. शुरू में स्थानीय क्लीनिकों में इलाज हुआ, लेकिन मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती गई.
29 दिसंबर को तीन लोगों की मौत की पुष्टि
29 दिसंबर को संकट और गहरा गया, जब नगर निगम और जिला प्रशासन ने दूषित पानी से जुड़ी कम से कम तीन मौतों की पुष्टि की. इसके बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी. 30 दिसंबर तक 100 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हो चुके थे और रिपोर्ट्स के मुताबिक 1,100 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके थे.
छह महीने के बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर दिया
31 दिसंबर को मौतों के आंकड़ों को लेकर विरोधाभासी जानकारी सामने आई. कहीं चार तो कहीं सात मौतों की बात कही गई. इसी दौरान एक छह महीने के बच्चे की मौत ने सभी को झकझोर दिया, जिसके परिजनों का आरोप था कि दूषित पानी से तैयार दूध पीने से बच्चे की तबीयत बिगड़ी. राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की. साथ ही एक जोनल अधिकारी और सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया, जबकि एक प्रभारी उपयंत्री को बर्खास्त किया गया.
लैब रिपोर्ट्स में पानी में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि
1 और 2 जनवरी 2026 को आई लैब रिपोर्ट्स में पानी में बैक्टीरियल संक्रमण की पुष्टि हुई. शुरुआती जांच में सीवेज लाइन के पेयजल पाइपलाइन में मिलने की आशंका जताई गई, जिसके बाद प्रभावित पाइपलाइन को बंद कर उसकी मरम्मत, सफाई और सैनिटाइजेशन का काम किया गया. लोगों को नल का पानी इस्तेमाल न करने की सख्त सलाह दी गई.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. उन्होंने इंदौर नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को कारण बताओ नोटिस जारी करने, अपर आयुक्त को तत्काल इंदौर से हटाने और प्रभारी अधीक्षण यंत्री से जल वितरण विभाग का प्रभार वापस लेने के निर्देश दिए. साथ ही निगम में रिक्त पदों को तत्काल भरने के आदेश भी दिए गए.
इंदौर की घटना से सबक लेते हुए अन्य शहरों में भी उठाए जाएंगे सुधारात्मक कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर की इस दुखद घटना से सबक लेते हुए प्रदेश के अन्य शहरों में भी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे. इसके लिए सभी 16 नगर निगमों के महापौर, आयुक्त, जिला कलेक्टर, स्वास्थ्य विभाग, नगरीय विकास विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की वर्चुअल बैठक बुलाई गई है, ताकि पूरे प्रदेश में पेयजल सुरक्षा की समीक्षा कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
बुनियादी ढांचे और निगरानी में जरा सी चूक भी पड़ सकती है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां, जैसे बैक्टीरियल गैस्ट्रोएंटेराइटिस, हैजा, टायफाइड और पेचिश, तेजी से जानलेवा रूप ले सकती हैं, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में... इंदौर की यह घटना बताती है कि स्वच्छता के तमगे के बावजूद बुनियादी ढांचे और निगरानी में जरा सी चूक भी कितनी भारी पड़ सकती है.





