Indore Contaminated Water: मासूमों की जान गई तो खुली प्रशासन की नींद, 5 हजार घरों का हुआ सर्वे; क्या नर्मदा पाइपलाइन की देरी बनी वजह?
Indore Contaminated Water: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में दूषित पानी से अब तक छोटे बच्चों सहित 15 लोगों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है. इस त्रासदी के बाद न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में आक्रोश का माहौल है और भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई. हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन मैदान में उतरा है.
Indore Contaminated Water: देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में दूषित पानी से अब तक छोटे बच्चों सहित 15 लोगों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है. इस त्रासदी के बाद न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में आक्रोश का माहौल है और भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई.
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दूषित पानी पीने से फैली बीमारी ने देखते ही देखते जानलेवा रूप ले लिया. हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन मैदान में उतरा है. कलेक्टर शिवम वर्मा खुद प्रभावित इलाकों में पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं, घर-घर जाकर लोगों से बात कर रहे हैं और उन्हें सतर्क कर रहे हैं. बीमार लोगों का इलाज लगातार जारी है.
5,000 घरों का हुआ सर्वे
कलेक्टर शिवम वर्मा ने प्रभावित इलाकों को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 5,000 घरों का सर्वे किया जा चुका है. इस दौरान लगभग 65 लोगों में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं, जिनमें से 17 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उन्होंने कहा "हमारी टीम लगातार लोगों को जागरूक करते हुए कह रही है कि सिर्फ टैंकर के ही पानी का इस्तेमाल करें और पीने से पहले पानी को उबाले."
149 लोगों का इलाज जारी
प्रशासन के मुताबिक फिलहाल 149 लोगों का इलाज चल रहा है. इस पूरे मामले में मेडिकल पुष्टि के आधार पर 6 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि कुल मृतकों की संख्या 15 बताई जा रही है. मुख्यमंत्री के आदेश पर पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता भी दी जा चुकी है. साथ ही लोगों से साफ-सफाई और हेल्थ प्रैक्टिस फॉलो करने की लगातार अपील की जा रही है, ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके.
3 साल से लटकी पाइपलाइन
15 लोगों की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली है और आखिरकार नर्मदा पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कर दिया गया है. यह वही प्रोजेक्ट है जो पिछले तीन साल से फाइलों में अटका हुआ था. साल 2022 में भागीरथपुरा क्षेत्र में नर्मदा पाइपलाइन बिछाने को मंजूरी दी गई थी. 2.4 करोड़ रुपये की लागत वाला यह प्रोजेक्ट दो चरणों में पूरा होना था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसे तीन साल तक टाल दिया गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर तीन साल पहले ही नर्मदा पाइपलाइन बिछा दी जाती, तो दूषित पानी के कारण 15 लोगों की मौत नहीं होती और कई अन्य लोग बीमार नहीं पड़ते. अब सवाल उठ रहे हैं कि इस देरी की जिम्मेदारी कौन लेगा.
प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस घटना ने इंदौर जैसे शहर की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. विपक्ष और आम लोग प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल प्रशासन हालात संभालने और आगे ऐसी घटना न हो, इसके लिए युद्धस्तर पर काम करने का दावा कर रहा है.





