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संवेदनहीनता! इंदौर पानी कांड में आकाश के बयान पर बवाल, जीतू पटवारी बोले- सरकार 2 साल से कुंभकर्णी नींद सो रही

इंदौर पानी कांड में आकाश के बयान को लेकर बवाल मच गया है. कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि इंदौर पानी कांड अब केवल स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी बन गया है. जब लोग जान गंवा रहे हों, तब लोगों को बयान नहीं, जिम्मेदारी और समाधान चाहिए होता है. इसके उलट मंत्री के बेटे आकाश विजयवर्गीय जले पर नमक छिड़क रहे हैं.

संवेदनहीनता! इंदौर पानी कांड में आकाश के बयान पर बवाल, जीतू पटवारी बोले- सरकार 2 साल से कुंभकर्णी नींद सो रही
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मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी से लोगों की मौत के बाद जहां पूरे शहर में गुस्सा है, वहीं इस त्रासदी पर प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे व विधायक आकाश विजयवर्गीय के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया. उन्होंने कहा है कि, ‘पानी गंदा होता तो लोग पीते ही नहीं.’ आकाश के इस बयान को लोग संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बता रहे हैं.

अब इस पर सियासत भी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने एमपी सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा “कुंभकरण तो साल में छह महीने सोता था, मध्य प्रदेश सरकार दो साल से सो रही है.”

इंदौर पानी कांड: क्या है पूरा मामला?

इंदौर के कई इलाकों में नगर निगम की सप्लाई से दूषित पानी कई कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के घरों में पहुंचा. गंदा पानी पीने से लोग उल्टी-दस्त और संक्रमण के शिकार हो गए. गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत होने की जानकारी है. इस मामले में प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगे हैं.

आकाश के बयान से मचा बवाल

विधायक आकाश विजयवर्गीय ने इस समस्या पर कहा कि “अगर पानी गंदा होता तो लोग पीते ही नहीं.” इस बयान को पीड़ितों की पीड़ा को नजरअंदाज करने वाला माना जा रहा है. ऐसा मानना भी जायज है. विजयवर्गीय ने ऐसा बोलकर सिस्टम की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की है.

बयान पर जनता और विपक्ष लाल

आकाश विजयवर्गीय का यह बयान पब्लिक डोमेन में आते ही सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का अंबार लग गया है. पीड़ित परिवारों ने बयान को अपमानजनक बताया है.

उन पर संवेदनशीलता की कमी के आरोप लगे हैं.

मोहन यादव मौन क्यों?

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय के बयान पर पलटवार किया है. उन्होंने मोहन यादव सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा कि त्रेता युग में कुंभकरण तो फिर भी छह महीने सोता था. मध्य प्रदेश सरकार तो पिछले दो साल से सो रही है.

उन्होंने आगे कहा इंदौर में गंदा पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. 1500 लोग बीमार पड़ गए. इसके बावजूद मोहन सरकार के मंत्री मौन हैं. गंदे पानी का मामला सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं है. इंदौर के बाद अब भोपाल में भी लोगों को गंदा पानी पिलाया जा रहा है. शर्मनाक!

जीतू पटवारी ने कहा कि “कुंभकरण तो छह महीने सोता था. एमपी में मोहन यादव की सरकार तो दो साल से सो रही है.” समय रहते पानी की जांच क्यों नहीं हुई? मौतों के बाद ही क्यों जागा प्रशासन? उन्होंने इसे सरकार की निष्क्रियता और लापरवाही को इस हादसे के लिए जिम्मेदार बताया.

आगे क्या मांगें उठ रही हैं?

पीड़ित लोग और स्थानीय नेता दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. साथ ही पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग उठी है. सुरक्षित वैकल्पिक पानी सप्लाई, समस्या का तत्काल समाधान कराने को कहा गया है.

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