UP नहीं झारखंड है खून खराबे के मामले में टॉप पर, जानें किस राज्य में कितनी हो रही हत्याएं
NCRB 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, हत्या दर के मामले में झारखंड देश में सबसे ऊपर है, जबकि कुल मामलों में यूपी आगे है. आंकड़े बताते हैं कि अलग-अलग राज्यों में अपराध का पैटर्न बदल रहा है और गंभीर अपराध अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं.
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देशभर में अपराध के ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर बहस छेड़ दी है. National Crime Records Bureau (NCRB) की 2024 रिपोर्ट में सामने आया है कि झारखंड हत्या दर के मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है. यह आंकड़ा सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक तरफ गंभीर अपराध जैसे हत्या के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुल अपराधों में गिरावट दर्ज की गई है. इसके साथ ही साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि अब अपराध का स्वरूप बदल रहा है. जमीन से डिजिटल तक.
झारखंड में हत्या दर सबसे ज्यादा क्यों?
NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में झारखंड की हत्या दर 3.7 प्रति एक लाख आबादी रही, जो देश में सबसे ज्यादा है. राज्य में कुल 1,472 हत्या के मामले दर्ज हुए, जिनमें 1,484 लोगों की जान गई. यह आंकड़ा 401 लाख की अनुमानित आबादी के आधार पर निकाला गया है. यह स्थिति बताती है कि राज्य में गंभीर अपराधों पर नियंत्रण अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है.
दूसरे राज्यों की स्थिति क्या कहती है?
हत्या दर के मामले में झारखंड के बाद Chhattisgarh दूसरे स्थान पर है, जहां यह दर 3.3 है. वहीं राष्ट्रीय औसत 1.9 दर्ज किया गया. अगर कुल मामलों की बात करें, तो Uttar Pradesh में सबसे ज्यादा 3,218 हत्याएं दर्ज हुईं, लेकिन बड़ी आबादी के कारण वहां हत्या दर सिर्फ 1.3 रही. इससे साफ होता है कि अपराध का विश्लेषण सिर्फ संख्या से नहीं, बल्कि दर से भी किया जाता है.
हत्या के पीछे सबसे बड़ी वजह क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में हत्या की सबसे बड़ी वजह ‘लाभ’ (Gain) रही. इस श्रेणी में 720 मामले सामने आए, जो देश में सबसे ज्यादा हैं. इसके अलावा- व्यक्तिगत दुश्मनी: 294 मामले. विवाद: 225 मामले. इन आंकड़ों से यह साफ है कि आर्थिक स्वार्थ और निजी रंजिशें हत्या के प्रमुख कारण बन रही हैं.
क्या महिलाओं से जुड़े अपराध भी बढ़ रहे हैं?
झारखंड ‘लड़कियों की खरीद-फरोख्त’ के मामले में देश में चौथे स्थान पर रहा. यहां 2.2 की दर से 308 मामले दर्ज किए गए. इस सूची में हरियाणा पहले स्थान पर (8.1), उसके बाद Tripura (3.3) और असम (2.7) रहे. राष्ट्रीय औसत 0.4 रहा, जो इस अपराध की गंभीरता को और उजागर करता है.
कुल अपराध घटे, फिर भी डर क्यों?
जहां हत्या के मामलों ने चिंता बढ़ाई, वहीं कुल संज्ञेय अपराधों में गिरावट दर्ज की गई.
- 2024: 47,250
- 2023: 56,187
- 2022: 48,726
यह ट्रेंड बताता है कि अपराधों की संख्या भले कम हो रही हो, लेकिन उनकी गंभीरता और प्रकृति अधिक खतरनाक होती जा रही है.
क्या साइबर क्राइम बन रहा है नया खतरा?
झारखंड में साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं-
- 2022: 967
- 2023: 1,079
- 2024: 1,423
हालांकि 3.5 की दर राष्ट्रीय औसत 7.3 से कम है, लेकिन बढ़ती संख्या यह संकेत दे रही है कि डिजिटल अपराध आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकते हैं.
क्या अंधविश्वास से जुड़ी हत्याओं में कमी आई है?
‘डायन प्रथा’ से जुड़े मामलों में राहत भरी खबर है.
2023: 22 मामले
2024: 5 मामले
2024 में इस मामले में झारखंड चौथे स्थान पर रहा. इससे आगे Madhya Pradesh (17), Chhattisgarh (10) और Odisha (7) रहे.
पुलिस क्या कह रही है?
अपर पुलिस महानिदेशक (CID) Manoj Kaushik ने कहा कि 'हम नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं, खासकर महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. हत्या जैसे गंभीर अपराधों को रोकना भी हमारी प्राथमिकता है.' उनके मुताबिक, पुलिस गंभीर अपराधों पर नियंत्रण और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है.




