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पत्नी की प्राइवेट फोटो खींचकर बार-बार संबंध बनाने का दबाव डालना अपराध; HC ने सुनाया ये फैसला

झारखंड हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि पति या पत्नी की निजी तस्वीरों को बिना इजाजत के देखना, उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी और शारीरिक या यौन उत्पीड़न के काम हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता की श्रेणी में आते हैं. न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे काम पति द्वारा पत्नी के चरित्र हनन के समान हैं और मानसिक क्रूरता के तहत गंभीर माना जाएगा.

पत्नी की प्राइवेट फोटो खींचकर बार-बार संबंध बनाने का दबाव डालना अपराध; HC ने सुनाया ये फैसला
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( Image Source:  AI: Sora )
स्टेट मिरर डेस्क
By: स्टेट मिरर डेस्क

Published on: 10 Jan 2026 6:13 PM

झारखंड हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया है कि पति या पत्नी की निजी तस्वीरों को बिना इजाजत के देखना, उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी और शारीरिक या यौन उत्पीड़न के काम हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता की श्रेणी में आते हैं. न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे काम पति द्वारा पत्नी के चरित्र हनन के समान हैं और मानसिक क्रूरता के तहत गंभीर माना जाएगा.

हाई कोर्ट ने यह फैसला पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 19(1) के तहत सुनाया, जिसमें महिला द्वारा दायर पहली अपील को स्वीकार किया गया. अपील में पारिवारिक न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी, जिसमें क्रूरता के आधार पर विवाह विच्छेद की याचिका खारिज कर दी गई थी.

मामला और शिकायत का विवरण

विवाहिता ने दावा किया कि उनका विवाह 13 मार्च, 2020 को धनबाद जिले के झारी में संपन्न हुआ. शादी के बाद पति-पत्नी साथ रहने लगे, लेकिन विवाह के एक दिन बाद ही पति ने महिला के मोबाइल फोन में अनधिकृत रूप से प्रवेश कर उसके गूगल ड्राइव की निजी तस्वीरें देखीं. महिला के अनुसार, पति ने उसकी अनुमति के बिना ये तस्वीरें अपने फोन में ट्रांसफर कर लीं और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर साझा करने की धमकी दी. इसके अलावा, महिला पर बार-बार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया और कई मौकों पर यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला गया.

पति का पक्ष और विवाद

पति ने सभी आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि विवाहिता देर रात तक किसी और से बात करती थी. उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी ने अवैध संबंध की बात स्वीकार की थी और इसे खत्म नहीं करेगी. हालांकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि क्रूरता का मूल्यांकन केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न भी इसमें शामिल है.

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने कहा “क्रूरता शारीरिक या मानसिक, जानबूझकर या अनजाने में हो सकती है. इसका मूल्यांकन प्रत्येक मामले की परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर किया जाता है. जीवनसाथी की प्रतिष्ठा को होने वाली हानि इस मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा है.” न्यायालय ने यह भी गौर किया कि पति ने आपत्तिजनक तस्वीरें अपने परिवार को दिखाईं, जिससे पत्नी का अपमान हुआ. कोर्ट ने कहा कि यह पति द्वारा पत्नी के चरित्र का हनन है और स्पष्ट रूप से मानसिक क्रूरता का गठन करता है.

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