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डॉक्टर ने रची देश हिला देने वाली साजिश! फरीदाबाद में 300 किलो विस्फोटक, गुजरात में ‘जहर से हमले’ की तैयारी, एजेंसियां अलर्ट

जम्मू-कश्मीर पुलिस और गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में देश में दो बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. फरीदाबाद में डॉक्टर के घर से 300 किलो विस्फोटक और एके-47 बरामद, जबकि गुजरात में तीन संदिग्ध आतंकी ‘रिकिन जहर’ से हमला करने की साजिश रच रहे थे. चार राज्यों में फैले इस नेटवर्क से खुफिया एजेंसियां अलर्ट हैं.

डॉक्टर ने रची देश हिला देने वाली साजिश! फरीदाबाद में 300 किलो विस्फोटक, गुजरात में ‘जहर से हमले’ की तैयारी, एजेंसियां अलर्ट
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नवनीत कुमार
Edited By: नवनीत कुमार5 Mins Read

Updated on: 10 Nov 2025 12:26 PM IST

देश में आतंक की एक ऐसी परत खुली है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हिला कर रख दिया है. जम्मू-कश्मीर पुलिस और गुजरात एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में दो अलग-अलग राज्यों से बड़े आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है. एक तरफ हरियाणा के फरीदाबाद में एक डॉक्टर के घर से 300 किलो विस्फोटक और एके-47 जैसे हथियार बरामद हुए, वहीं गुजरात में रासायनिक जहर से देश को दहलाने की साजिश करने वाले तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है.

पहली बार देश में डॉक्टरों की आड़ में छिपे आतंकी नेटवर्क का चेहरा सामने आया है. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक ये आरोपी पेशे से डॉक्टर होने के बावजूद आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे और देश में बड़े धमाके और जैविक हमले की योजना बना रहे थे. इस खुलासे के बाद से चार राज्यों जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात की खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर हैं.

फरीदाबाद में 300 किलो विस्फोटक बरामद

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में एक गुप्त ऑपरेशन के तहत बड़ी कार्रवाई की. रविवार देर रात एक डॉक्टर के किराए के कमरे से करीब 300 किलो विस्फोटक, एके-47 राइफल, 84 कारतूस और पांच लीटर केमिकल बरामद किया गया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपी डॉक्टर की निशानदेही पर यह बरामदगी हुई. इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया ताकि किसी को भनक तक न लगे.

किराए के मकान से चलाता था आतंक का ठिकाना

सूत्रों के अनुसार आरोपी डॉक्टर ने तीन महीने पहले फरीदाबाद में यह कमरा किराए पर लिया था. उसने मकान मालिक को बताया था कि कमरे में केवल उसका सामान रहेगा. रविवार को 10 से 12 पुलिस वाहनों के साथ टीम ने जब कमरे में छापा मारा तो 14 भारी बैग बरामद किए गए. स्थानीय पुलिस ने शुरुआती तौर पर गिरफ्तारी से इनकार किया, लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे ऑपरेशन को अपने नियंत्रण में रखा.

जैश-ए-मोहम्मद से कनेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार डॉक्टर का नाम मुजाहिल शकील बताया जा रहा है, जबकि दूसरा नाम डॉ. आदिल का सामने आया है, जो जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग का रहने वाला है. डॉ. आदिल को श्रीनगर पुलिस ने सहारनपुर से गिरफ्तार किया था. उस पर जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने और आतंकी संगठनों से संपर्क रखने का आरोप है. एजेंसियां अब सहारनपुर से श्रीनगर तक उसके नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं.

देश को ‘जहर’ से दहलाने की साजिश भी नाकाम

दूसरी बड़ी कार्रवाई गुजरात एटीएस ने की. अहमदाबाद से तीन संदिग्ध आतंकियों को पकड़ा गया जो रासायनिक जहर से देश में हमला करने की योजना बना रहे थे. इनके पास से तीन विदेशी पिस्तौल, 30 कारतूस और चार लीटर कैस्टर ऑयल बरामद हुआ जिसका उपयोग ‘रिकिन (Ricin)’ नामक घातक जैविक जहर तैयार करने में होता है. रिकिन शरीर में प्रवेश कर कोशिकाओं की प्रोटीन निर्माण प्रक्रिया रोक देता है, जिससे इंसान के अंग काम करना बंद कर देते हैं.

डॉक्टर समेत तीन गिरफ्तार

गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में तेलंगाना निवासी डॉ. अहमद मोहीउद्दीन सैयद, यूपी के आजाद सुलेमान शेख और सुहैल शामिल हैं. ये तीनों ‘जहर के जरिये’ देश में बड़े पैमाने पर तबाही मचाने की तैयारी कर रहे थे. शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इनका संपर्क पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलरों से था.

चार राज्यों में फैला नेटवर्क

फरीदाबाद, सहारनपुर, श्रीनगर और अहमदाबाद में एक साथ हुए इन खुलासों ने इशारा दिया है कि आतंक का नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था. एनआईए, आईबी और एटीएस की टीमें अब इन चार राज्यों में संदिग्ध संपर्कों की तलाश में जुटी हैं. प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, यह नेटवर्क आरडीएक्स और रासायनिक हथियार दोनों के जरिए देश को अस्थिर करने की साजिश रच रहा था.

खुफिया एजेंसियों की निगरानी में मेडिकल नेटवर्क

इस पूरे प्रकरण ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नया खतरा पैदा कर दिया है. आतंकी संगठन अब शिक्षित पेशेवरों की भर्ती कर रहे हैं. डॉक्टर जैसे जिम्मेदार पेशों का दुरुपयोग कर ये आतंकी न सिर्फ फंड जुटा रहे हैं, बल्कि अपनी वैज्ञानिक योजनाओं को भी अंजाम दे रहे हैं. एजेंसियां अब मेडिकल कॉलेजों और हॉस्पिटल नेटवर्क पर भी निगरानी बढ़ा रही हैं ताकि भविष्य में ऐसी कोई साजिश पनप न सके.

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