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5100 रुपए दिए और वीडियो कॉल किया, पिता के अंतिम संस्कार में ऐसे शामिल हुईं बेटियां, 3 साल पहले ही वृद्धाश्रम में रहने को छोड़ दिया था

सोनीपत के वृद्धाश्रम में एक पिता ने अंतिम सांस ली, वहीं उनकी तीन बेटियों में से कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुई. बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए पिता का अंतिम संस्कार देखा.

Father Last Rites Daughters Video Call
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Father Last Rites Daughters Video Call

( Image Source:  X/ @priyarajputlive )

एक पिता के लिए उसके जीवनभर की पूंजी उसके बच्चे होते हैं. पूरा जीवन अपने बच्चों का बेहतर फ्यूचर बनाने के लिए पिता निकाल देते हैं लेकिन जब अंतिम समय में उस पिता के पास उसकी कोई औलाद ही न आए तो बहुत अफसोस होता है. ऐसा ही एक मामला हरियाणा के सोनीपत से सामने आया है. सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रहने वाले पूर्व कपड़ा व्यापारी शिवचरण राम रतन गुप्ता का निधन हो गया, लेकिन उनकी तीनों बेटियां अंतिम संस्कार में नहीं आई, बल्कि तीनों बेटियों ने अपने पिता को नेपाल, उत्तर प्रदेश और मुंबई से वीडियो कॉल के जरिए अंतिम विदाई दी.

मुंबई के रहने वाले शिवचरण गुप्ता पिछले करीब डेढ़ साल से सोनीपत के पश्चिम राम नगर स्थित समाज कल्याण शिक्षा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम में रह रहे थे. उनकी पत्नी मीना का पहले ही निधन हो चुका था. लंबी बीमारी के बाद मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन के बाद वृद्धाश्रम मैनेजमेंट ने उनकी बेटियों को सूचना दी, लेकिन वे सोनीपत नहीं पहुंच सकीं.

क्या बोला वृद्धाश्रम मैनेजमेंट?

शिवचरण राम रतन गुप्ता मूल रूप से मुंबई के रहने वाले थे और पहले कपड़ा व्यवसाय से जुड़े थे. पत्नी के निधन के बाद वह सोनीपत के वृद्धाश्रम में रहने लगे थे. वृद्धाश्रम प्रबंधन के अनुसार, गुप्ता अपनी बेटियों से बेहद लगाव रखते थे और अक्सर वहां रखे फोन के जरिए उनसे बातचीत किया करते थे. वह अपनी बेटियों की उपलब्धियों पर गर्व महसूस करते थे और बताते थे कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी उनकी पढ़ाई और परवरिश में लगा दी.

गुप्ता के निधन के बाद वृद्धाश्रम प्रशासन ने उनकी तीनों बेटियों से संपर्क किया और उन्हें सोनीपत आने के लिए कहा। हालांकि, बेटियां अंतिम संस्कार में पहुंच नहीं सकीं. इसके बाद वृद्धाश्रम मैनेजमेंट और स्थानीय लोगों की मदद से अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई. तीनों बेटियों ने अलग-अलग जगहों से वीडियो कॉल के माध्यम से अपने पिता की अंतिम विदाई देखी.

बेटियों को कब दी गई थी बीमारी की जानकारी?

आनंद कुमार के अनुसार, शिवचरण गुप्ता की हालत बिगड़ने की जानकारी उनकी बेटियों को पिता की मृत्यु से करीब 20 दिन पहले ही दे दी गई थी. उन्होंने बताया कि मैनेजमेंट ने बेटियों को पिता से मिलने आने के लिए कहा था, लेकिन वे नहीं पहुंच सकीं. गुप्ता के निधन के बाद भी उन्हें सोनीपत आने का विकल्प दिया गया था, मगर बेटियों ने समय की कमी का हवाला दिया. कुमार ने बताया कि बेटियों ने कहा कि उनके पास यात्रा करने का समय नहीं है.

अंतिम संस्कार के लिए किसने भेजे पैसे?

गुप्ता की सबसे बड़ी बेटी अनीता नेपाल में रहती हैं और वे एक टीचर हैं. उन्होंने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए ऑनलाइन 5,100 रुपये भेजे और पिता का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान से कराने का अनुरोध किया. अन्य दो बेटियां निशा उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहती हैं, जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती हैं. तीनों बेटियां शादीशुदा हैं और अपने-अपने परिवारों के साथ रहती हैं.

फोन पर क्या बोली बेटी?

अंतिम संस्कार के बाद बेटियों ने वृद्धाश्रम मैनेजमेंट से पूरी प्रक्रिया का वीडियो मांगा. इसी दौरान फोन पर एक बेटी की आवाज रिकॉर्ड हुई, जिसमें वह कह रही थी कि "इसमें और कितना समय लगेगा? हमें खाना भी खाना है और नहाना भी है." यह बात वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाली थी.

क्या थी शिवचरण गुप्ता की इच्छा?

शिवचरण गुप्ता के निधन के बाद उनकी आंखें दान कर दी गईं. परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान का फैसला लिया. इस पहल के जरिए उनकी आंखें भविष्य में किसी जरूरतमंद व्यक्ति को रोशनी देने में मदद कर सकती हैं. इस तरह अंतिम विदाई के समय भी गुप्ता मानवता की मिसाल छोड़ गए.

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