CJP का नहीं LGBTQ का Protest, वायरल ट्रांस महिला ने तोड़ी चुप्पी; बिना इजाजत बनाया वीडियो, AI में भी इस्तेमाल हुआ चेहरा
दिल्ली LGBTQ प्रदर्शन के वायरल वीडियो पर ट्रांस महिला ने चुप्पी तोड़ी. कहा- बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्ड हुआ, तस्वीरों का AI में भी इस्तेमाल किया गया.
दिल्ली में हुए एक LGBTQ प्रदर्शन का वीडियो पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. वीडियो में एक कंटेंट क्रिएटर और प्रदर्शन में शामिल एक ट्रांस व्यक्ति के बीच हुई बातचीत तेजी से वायरल हुई थी. अब इस पूरे विवाद पर ट्रांस व्यक्ति ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और दावा किया है कि उनकी सहमति के बिना वीडियो रिकॉर्ड और प्रसारित किया गया.
उन्होंने कहा कि वर्षों से वे अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक नजरों से दूर रखकर जी रहे थे, लेकिन एक वायरल वीडियो ने उनकी पहचान को अचानक सोशल मीडिया की बहस का हिस्सा बना दिया. उनका आरोप है कि वीडियो के फैलने के बाद न केवल उनकी तस्वीरें बड़े पैमाने पर शेयर की गईं, बल्कि कुछ लोगों ने उनकी छवि का इस्तेमाल एआई आधारित कंटेंट बनाने में भी किया.
वर्षों से बचाकर रखी थी निजी पहचान
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में ट्रांस व्यक्ति ने कहा कि उन्होंने कभी अपनी तस्वीरें या निजी वीडियो इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं किए. उनका कहना है कि वे शांत जीवन पसंद करते हैं और अपना अधिकांश समय कला, डिजाइन, पढ़ाई और शिक्षण जैसे कार्यों में बिताते हैं. उनके मुताबिक, ट्रांस समुदाय के लोगों को ऑनलाइन ट्रोलिंग और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, इसलिए उन्होंने हमेशा अपनी पहचान को सीमित दायरे में रखा. लेकिन वायरल वीडियो के बाद यह नियंत्रण अचानक खत्म हो गया.
'बिना सहमति रिकॉर्डिंग करना गलत'
ट्रांस व्यक्ति का कहना है कि किसी की अनुमति के बिना उसका वीडियो रिकॉर्ड करना और फिर उसे व्यापक स्तर पर प्रसारित करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है. उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने उसे डाउनलोड, शेयर और रीपोस्ट किया, जिससे उनकी व्यक्तिगत जानकारी और पहचान और अधिक लोगों तक पहुंच गई. उनका दावा है कि उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल एआई टूल्स में भी किया गया, जिसे वे अपनी निजता पर अतिरिक्त हमला मानते हैं. उन्होंने इसे कानूनी और नैतिक दोनों स्तरों पर गलत बताया.
प्रदर्शन का मकसद क्या था?
ट्रांस व्यक्ति के अनुसार, जिस कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ, वह कोई प्राइड परेड नहीं थी. उनका कहना है कि यह प्रदर्शन ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े अधिकारों और कानूनों को लेकर आयोजित किया गया था, जिसमें मुख्य रूप से समुदाय के सदस्य शामिल थे. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कंटेंट क्रिएटर उनके पास आया और कुछ सवाल पूछने लगा. उनके मुताबिक, सवालों का तरीका ऐसा था जिससे उन्हें लगा कि बातचीत का उद्देश्य जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि प्रतिक्रिया उकसाना था.
वायरल हुई तीखी प्रतिक्रिया
वायरल क्लिप में ट्रांस व्यक्ति की ओर से तीखी भाषा का इस्तेमाल भी सुनाई देता है. इस पर उन्होंने कहा कि उस समय वे असहज और परेशान महसूस कर रहे थे. उनका आरोप है कि कई लोग उन्हें घेरकर देख रहे थे, जिसके कारण उनकी प्रतिक्रिया आक्रामक हो गई.
सोशल मीडिया पर बंटी राय
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की राय सामने आई है. कुछ लोग मानते हैं कि सार्वजनिक स्थान पर रिकॉर्डिंग करना कंटेंट क्रिएशन का हिस्सा है और इसमें कुछ असामान्य नहीं है. वहीं दूसरी ओर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका वीडियो बनाकर उसे लाखों लोगों तक पहुंचाना निजता के अधिकार का उल्लंघन माना जाना चाहिए. इसी बहस के बीच यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक रिकॉर्डिंग और व्यक्तिगत निजता की सीमाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ रहा है.




