सिर्फ दिवाली-पराली नहीं... वो गलतियां जो खत्म नहीं होने दे रहीं दिल्ली-NCR का प्रदूषण, एक्सपर्ट ने बताया पूरा एक्शन प्लान
दिल्ली-NCR में जहरीली हवा के लिए सिर्फ पराली जलाने और दिवाली को जिम्मेदार ठहराना कितना सही है? IPCA के संस्थापक आशीष जैन ने बताया कि हर साल क्यों प्रदूषण का स्तर बढ़ाता ही जा रहा है और साथ ही पूरा एक्शन प्लान समझाया है.
दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है. दिवाली आने में अभी पांच दिन बाकी हैं, लेकिन हवा की गुणवत्ता अभी से दमघोंटू होने लगी है. हालात ऐसे हैं कि दिल्ली-NCR में ग्रैप-2 (GRAP-2) लागू करना पड़ा है और कई इलाकों में AQI 300 के पार पहुंच चुका है. इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने विंटर एक्शन प्लान भी लागू कर दिया है, जिसके तहत प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कई पाबंदियां और उपाय शुरू किए गए हैं.
हर साल सर्दियों की शुरुआत होते ही दिल्ली-NCR में प्रदूषण को लेकर पराली का मुद्दा गरमाने लगता है. पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने को इसकी बड़ी वजह बताया जाता है और इस पर सियासी बयानबाजी भी खूब होती है. लेकिन इस बार दिवाली से पहले ही हवा की हालत बिगड़ने लगी है, जबकि सर्दियों का असली मौसम अभी आना बाकी है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दिल्ली-NCR की जहरीली हवा के लिए सिर्फ पराली जिम्मेदार है, या फिर इसके पीछे गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम से जुड़े दूसरे कारण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं?
आखिर दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने की असली वजह क्या है? GRAP-2 लागू होने के बावजूद हालात कैसे सुधरेंगे और पराली के अलावा कौन से कारक हवा को जहरीला बना रहे हैं? इन तमाम सवालों पर स्टेट मिरर हिंदी ने इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन (IPCA) के संस्थापक और निदेशक आशीष जैन से खास बातचीत की. आइए जानते हैं उन्होंने प्रदूषण के बढ़ते संकट, इसके वास्तविक कारणों और इससे निपटने के उपायों को लेकर क्या कुछ बताया.
- आशीष जैन ने बताया कि दिल्ली इस वक्त गैस चैंबर में तब्दील हो गई है. सर्दियों ने इस बार जल्दी दस्तक दे दी है और हवा में प्रदूषण के कण जमा हो रहे हैं, जिससे जहरीली हवा से लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं.
- आगे कहा कि पराली और दिवाली को प्रदूषण बढ़ने का दोष नहीं दे सकते. इस वक्त हवा की गति कम होने और तापमान में गिरावट के चलते प्रदूषण के कण वातावरण में ही ठहरे हुए हैं. ऐसे में केवल विंटर एक्शन प्लान लागू करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए पूरे साल ठोस कदम उठाने होंगे.
- इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन ने कहा कि सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम दूरगामी नहीं हैं. सबसे बड़ी कमी यह है कि जो योजनाएं बनाई जा रही हैं, उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू भी नहीं किया जा रहा है.
- आगे उन्होंने कहा कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति भी काफी अलग है, जो प्रदूषण बढ़ने की एक वजह बनती है. इसके अलावा गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, स्टेबल बर्निंग, कूड़ा जलाना और निर्माण कार्य प्रदूषण के सबसे बड़े कारकों में शामिल हैं.
- दिल्ली NCR में बढ़ते प्रदुषण को लेकर आशीष जैन ने कहा कि सड़कों की सफाई के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रोड स्वीपिंग मशीनें कई बार प्रदूषण कम करने के बजाय उसे और बढ़ा देती हैं, जबकि सरकार इन्हें प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से लगाती है.
- आशीष जैन ने आगे बताया कि सरकार एक्शन प्लान के नाम पर सिर्फ आईवॉश कर रही है. सरकार की ओर से उठाए गए मौजूदा कदमों से प्रदूषण की समस्या पर बहुत ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है. प्रदूषण किसी एक सरकार या राज्य की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इससे निपटने के लिए आम जनता को भी आगे आना होगा. लोगों को जागरूक करना, उन्हें शिक्षित करना और बड़े स्तर पर अवेयरनेस फैलाना बेहद जरूरी है.
- जनता से यह सवाल पूछना चाहिए कि पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट क्या होता है और सरकार ने इसे क्यों अनिवार्य किया है? सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए जो नियम बनाए हैं, क्या लोग उनके बारे में जानते हैं और क्या वे इन नियमों का सही तरीके से पालन कर रहे हैं? लोगों को इन नियमों के प्रति जागरूक करना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.
- इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन के मुताबिक हर चीज के लिए जनता को जिम्मेदार ठहराना भी ठीक नहीं है. सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए बनाए गए नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा. सरकार और जनता, दोनों की साझा जिम्मेदारी और भागीदारी से ही प्रदूषण की समस्या को कम किया जा सकता है.
- सरकार को सबसे पहले जनता का विश्वास जीतना होगा. प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सरकार और जनता, दोनों को मिलकर काम करना होगा. तभी इस दिशा में प्रभावी और स्थायी बदलाव लाया जा सकता है.
- दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि सड़कों की स्थिति सुधारी जाए. सड़कें जितनी बेहतर होंगी, वाहनों की आवाजाही उतनी सुगम होगी और जाम की समस्या कम होगी. ट्रैफिक जाम कम होने से वाहनों से निकलने वाले धुएं और प्रदूषण में भी कमी आ सकती है. इसके लिए सड़कों को बेहतर बनाने के साथ ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना और जरूरत के मुताबिक सिग्नल-फ्री कॉरिडोर विकसित करना भी जरूरी है.
- इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन ने कहा कि, सरकार ने 1 नवंबर से जो नियम लागू किए हैं, उन्हें सिर्फ सर्दियों तक सीमित रखने के बजाय पूरे साल लागू किया जाना चाहिए, ताकि प्रदूषण पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सके.
- सिर्फ दिल्ली के एक्शन प्लान से प्रदूषण की समस्या का समाधान नहीं होगा. इसके लिए पूरे उत्तर भारत के स्तर पर एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार करने की जरूरत है. आज के हालात में प्रदूषण को मेडिकल इमरजेंसी के तौर पर देखा जाना चाहिए. जब तक इसे स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट मानकर प्राथमिकता के आधार पर कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक इसके खिलाफ लड़ाई का अपेक्षित फायदा नहीं मिलेगा.
- आखिर में इंडियन पॉल्यूशन कंट्रोल एसोसिएशन ने बताया कि, अस्पतालों में जाकर देखिए कि प्रदूषण के चलते मरीजों की संख्या कितनी बढ़ गई है. हालात बेहद खराब हैं और लोग प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं.




