दीवाली से पहले दिल्ली NCR की हवा में जहर! GRAP-2 में क्या बदलेगा क्या नहीं? FAQ से जानिए AQI से लेकर पाबंदियां तक
दीवाली से पहले दिल्ली-NCR में GRAP-2 लागू हो गया है. जानिए AQI 300 पार होने पर पार्किंग, गाड़ियों, डीजल जनरेटर और निर्माण कार्यों पर क्या बदलाव होंगे.
दिल्ली NCR में हल्की-हल्की सर्दी शुरु हो गई है तो वहीं दीवाली से ठीक 6 दिन पहले दिल्ली NCR की हवा धीरे-धीरे जहरीली होती जा रही है. इन्हीं सब को देखते हुए प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण यानी GRAP-2 को लागू कर दिया है. इसके तहत सड़कों पर उड़ने वाली धूल को कम करने, गाड़ियों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सख्ती बढ़ाई जाएगी.
सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ेगा. निर्माण स्थलों पर निगरानी तेज होगी और निजी गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है. सरकारी दफ्तरों के समय में भी बदलाव की सलाह दी गई है. ऐसे में सवाल है कि GRAP-2 आखिर क्या है, इसे किस AQI पर लागू किया जाता है और इसके तहत आम लोगों की जिंदगी में क्या बदलाव होंगे? जानिए प्रदूषण से जुड़े 10 जरूरी सवालों के जवाब.
GRAP-2 से जुड़े 10 जरूरी सवाल
GRAP-2 लागू होने पर सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाएगा. निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियमों की सख्ती से जांच होगी. प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट पर विशेष अभियान चलेंगे. खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी. निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे.
लोगों को निजी गाड़ियों के बजाय बस, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. बेवजह गाड़ी लेकर बाहर निकलने से बचें और ट्रैफिक जाम वाले रास्तों के बजाय कम भीड़ वाले रास्ते चुनें. खुले में कचरा या पत्तियां न जलाएं. धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों से बचें और जहां संभव हो, घर से काम करें.
पार्किंग शुल्क बढ़ाने का मकसद निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करना है. जब गाड़ियों की संख्या कम होगी तो सड़कों पर ट्रैफिक और उनसे निकलने वाले धुएं को कम करने में मदद मिल सकती है. इससे लोगों को सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहन मिलता है.
GRAP-2 के दौरान बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है, ताकि बिजली कटने पर डीजल जनरेटर के इस्तेमाल की जरूरत कम पड़े. डीजल जनरेटर के संचालन पर लागू उत्सर्जन मानकों और CAQM के निर्देशों का पालन जरूरी है. इसका मतलब यह नहीं है कि GRAP-2 लगते ही सभी डीजल जनरेटर पर एक जैसी पूर्ण पाबंदी लग जाती है.
GRAP के चार चरण वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर लागू किए जाते हैं: GRAP-1: AQI 201 से 300 के बीच यानी खराब श्रेणी. GRAP-2: AQI 301 से 400 के बीच यानी बेहद खराब श्रेणी. GRAP-3: AQI 401 से 450 के बीच यानी गंभीर श्रेणी. GRAP-4: AQI 450 से ऊपर यानी गंभीर से भी ज्यादा श्रेणी. इन चरणों को लागू करने का फैसला AQI के मौजूदा स्तर के साथ-साथ मौसम और प्रदूषण के पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर भी किया जा सकता है.
GRAP-1 प्रदूषण बढ़ने की शुरुआती स्थिति में लागू होता है. GRAP-2 में धूल और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के उपाय तेज किए जाते हैं. GRAP-3 में ज्यादा सख्त कदम उठाए जाते हैं, जिनमें निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कई कामों पर पाबंदियां शामिल हो सकती हैं. GRAP-4 सबसे गंभीर स्थिति में लागू होता है, जब प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए और कड़े प्रतिबंध लगाए जाते हैं.
प्रदूषण कई स्रोतों से हवा में पहुंचता है. वाहनों का धुआं, फैक्ट्रियों और बिजली संयंत्रों से निकलने वाला उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल, सड़कों की मिट्टी, कचरा और पराली जलाना इसके प्रमुख कारण हैं. ये प्रदूषक हवा में मौजूद रहते हैं और सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकते हैं. सर्दियों में हवा की रफ्तार कम होने और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक जमीन के करीब जमा हो सकते हैं.
सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाना, निजी वाहनों की संख्या कम करना, सड़कों की नियमित सफाई, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, कचरा न जलाना और उद्योगों के उत्सर्जन पर निगरानी जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं. इसके साथ ही स्वच्छ ईंधन और बेहतर कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना भी जरूरी है.
GRAP-2 के तहत दिल्ली सरकार और NCR के संबंधित राज्य सरकारों को दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में सरकारी दफ्तरों और नगर निकायों के कामकाज का समय अलग-अलग रखने की सलाह दी गई है. केंद्र सरकार भी दिल्ली-NCR में अपने कार्यालयों के समय में बदलाव पर फैसला ले सकती है. इसका उद्देश्य एक ही समय पर सड़कों पर भीड़ और वाहनों का दबाव कम करना है.
GRAP-2 में सभी निर्माण कार्यों पर अपने आप पूरी तरह रोक नहीं लगती. हालांकि, निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के नियमों का सख्ती से पालन करना होता है. संबंधित एजेंसियां निरीक्षण बढ़ाती हैं और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई कर सकती हैं. प्रदूषण का स्तर बढ़कर GRAP-3 या GRAP-4 तक पहुंचने पर निर्माण गतिविधियों पर ज्यादा सख्त पाबंदियां लगाई जा सकती हैं.




