Delhi-NCR में GRAP-1 लागू: नोएडा में AQI 258, जानें गाड़ी से लेकर निर्माण तक क्या-क्या बदला?
दिल्ली-NCR में GRAP-1 लागू होने के बाद जानें नोएडा के AQI, गाड़ियों, PUC, निर्माण कार्य, तंदूर, पार्किंग और प्रदूषण से बचाव के जरूरी नियम.
दिल्ली-NCR में सर्दियों से पहले ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है. दशहरे के ठीक अलगे दिन हवा की गुणवत्ता बिगड़ने को लेकर खबरें आने शुरु हो गई है. 21 अक्टूबर 2026 को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया. दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) दोपहर 2 बजे 244 दर्ज किया गया, जबकि नोएडा में भी AQI 200 के पार पहुंच गया. स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक, नोएडा का AQI 258 था. दोनों शहरों की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई है तो वहीं दिल्ली कि पर्यावरण मंत्री ने प्रदुषण को लेकर कुछ नियम भी लागू कर दिए हैं.
GRAP-1 लागू होने के बाद प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण स्थलों, सड़कों की धूल, खुले में कचरा जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर निगरानी बढ़ेगी. संबंधित एजेंसियों को मशीनों से सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल जैसे उपाय तेज करने होंगे. होटल, ढाबों और रेस्तरां में कोयले या लकड़ी से चलने वाले तंदूर पर भी प्रतिबंध लागू रहेगा. हालांकि, GRAP-1 का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली-NCR में सभी निर्माण कार्य बंद हो गए हैं या निजी गाड़ियों के चलने पर पूरी तरह रोक लग गई है. दिल्ली सरकार की ओर से 1 नवंबर से लागू किए जाने वाले अतिरिक्त शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपायों को भी मौजूदा GRAP प्रतिबंधों से अलग समझना जरूरी है.
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों को क्या करना चाहिए?
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में AQI 200 के पार पहुंचने के बाद लोगों को रोजाना वायु गुणवत्ता की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. GRAP-1 के तहत प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की है, लेकिन नागरिक भी कुछ कदम उठाकर प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं.
- छोटी दूरी के लिए पैदल चलने, साइकिल या सार्वजनिक परिवहन का विकल्प चुनें, जहां ऐसा करना सुरक्षित हो.
- गाड़ी का PUC प्रमाणपत्र वैध रखें और वाहन की नियमित सर्विसिंग कराएं.
- कचरा, पत्ते या प्लास्टिक खुले में न जलाएं.
- निर्माण सामग्री या मलबा सड़क और खाली प्लॉट पर न फैलाएं.
- अपने इलाके में धूल, कचरा जलाने या नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित स्थानीय निकाय को सूचना दें.
- AQI खराब होने पर सुबह और शाम की बाहरी गतिविधियों को सीमित करने पर विचार करें, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों के लिए.
- GRAP-1 क्या है और इसे क्यों लागू किया गया?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तैयार की गई चरणबद्ध व्यवस्था है. जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है, वैसे-वैसे इसके तहत सख्त कदम उठाए जाते हैं. इसका उद्देश्य प्रदूषण को और गंभीर होने से रोकना है. CAQM के मुताबिक, दिल्ली का AQI 20 अक्टूबर को 179 था, जो मध्यम श्रेणी में आता है. अगले दिन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे यह बढ़कर 244 हो गया. मौसम संबंधी पूर्वानुमान में आने वाले दिनों में भी हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई. इसी के बाद GRAP-1 लागू किया गया.
GRAP-1 लागू होने के बाद किन चीजों पर पाबंदी रहेगी?
- खुले में कचरा जलाने पर रोक-सड़कों, खाली प्लॉट, पार्कों और अन्य खुले स्थानों पर कूड़ा, प्लास्टिक, सूखे पत्ते या अन्य अपशिष्ट जलाने की अनुमति नहीं है. लैंडफिल और कचरा डालने वाली जगहों पर आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए भी निगरानी बढ़ाई जाएगी. नियम तोड़ने पर संबंधित नियमों के तहत जुर्माना या दूसरी कार्रवाई हो सकती है.
- होटल, ढाबों और रेस्तरां के तंदूर में कोयला-लकड़ी पर रोक- दिल्ली-NCR में होटल, रेस्तरां, ढाबों और खुले भोजनालयों में कोयले या लकड़ी से चलने वाले तंदूर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू रहेगा. ऐसे कारोबार चलाने वालों को नियमों के अनुरूप वैकल्पिक ईंधन या खाना पकाने की व्यवस्था अपनानी होगी.
- निर्माण स्थलों पर धूल उड़ाने वाले कामों की निगरानी- निर्माण और तोड़फोड़ वाली जगहों पर धूल रोकने के उपायों का सख्ती से पालन कराना होगा. निर्माण सामग्री को ढककर रखना, उसे ढके हुए वाहनों में ले जाना, पानी का छिड़काव करना और जहां आवश्यक हो वहां एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना इन उपायों में शामिल है. हालांकि, GRAP-1 लागू होते ही हर निजी मकान, दुकान या बिल्डिंग का निर्माण अपने आप पूरी तरह बंद नहीं हो जाता. निर्माण कार्य पर रोक संबंधित गतिविधि, लागू नियमों और प्रशासन के अलग आदेशों के आधार पर तय होगी.
- सड़कों की सफाई और पानी का छिड़काव- नगर निकायों और संबंधित एजेंसियों को सड़कों पर मशीनों से सफाई बढ़ानी होगी. जमा हुई धूल को हटाने के साथ पानी का छिड़काव किया जाएगा, ताकि वाहनों के चलने से धूल दोबारा हवा में न फैले.
- प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर निगरानी- वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच तेज की जाएगी. स्पष्ट रूप से ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है. ट्रैफिक जाम वाले इलाकों में यातायात का प्रवाह बेहतर करने के उपाय भी किए जाएंगे.
- उद्योगों और बिजली संयंत्रों पर निगरानी- औद्योगिक इकाइयों, बिजली संयंत्रों और ईंट-भट्ठों को निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करना होगा. नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं.
1 नवंबर से दिल्ली में किन वाहनों की एंट्री पर रोक लगेगी?
दिल्ली सरकार की घोषित शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण योजना के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों की राजधानी में एंट्री पर प्रतिबंध लगाया जाना है. CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को इस व्यवस्था में छूट देने की घोषणा की गई है. इसलिए नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद या किसी अन्य शहर से दिल्ली जाने वाले लोगों को अपनी गाड़ी का उत्सर्जन मानक जरूर जांच लेना चाहिए. यह अतिरिक्त प्रतिबंध दिल्ली में प्रवेश से संबंधित है; इसे पूरे NCR में सभी BS-VI से नीचे के वाहनों पर स्वतः लागू प्रतिबंध नहीं समझना चाहिए.
क्या 1 नवंबर से पार्किंग चार्ज दोगुना हो जाएगा?
दिल्ली सरकार की घोषणा के अनुसार, 1 नवंबर से निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क दोगुना किया जाना है. दिल्ली मेट्रो की पार्किंग सुविधाओं को इससे छूट देने की बात कही गई है. प्रस्तावित व्यवस्था 28 फरवरी 2027 तक लागू रखने की घोषणा की गई है. इसका उद्देश्य निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है. यह कदम GRAP-1 लागू होने के कारण उसी दिन से स्वतः लागू नहीं हुआ है. इसके लिए घोषित तारीख और संबंधित पार्किंग स्थल के नियमों को ध्यान में रखना होगा.
खराब हवा में सेहत का ध्यान कैसे रखें?
AQI 201–300 के बीच होने पर हवा को खराब श्रेणी में रखा जाता है. इस स्तर पर संवेदनशील लोगों को सांस लेने में परेशानी या अन्य लक्षण हो सकते हैं. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
- बाहर व्यायाम या दौड़ने के बजाय घर के भीतर व्यायाम करने पर विचार करें.
- सांस फूलने, सीने में परेशानी या आंखों में तेज जलन होने पर प्रदूषण के संपर्क से दूर जाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सलाह लें.
- बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क उपयोगी हो सकता है, लेकिन यह प्रदूषण से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता.
- बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रदूषण वाले स्थानों पर लंबे समय तक रहने से बचाएं.
- घर में धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों से बचें और जहां संभव हो, घर के भीतर की हवा साफ रखने के उपाय अपनाएं.




