मंच पर बोल रहे थे केशव प्रसाद मौर्य, सामने से बोले युवक- UGC पर भी कुछ बोलेंगे, पुलिस ले गई, डिप्टी सीएम ने क्या दिया जवाब?
प्रयागराज में यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक कार्यक्रम में उस वक्त हंगामा मच गया जब 2 युवकों ने डिप्टी सीएम से यूजीसी पर भी कुछ बोलने को कहा. इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों को कार्यक्रम से बाहर निकाल दिया.
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उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य 2 नवंबर को प्रयागराज में पहुंचे, जहां उन्होंने एक प्रबुद्ध सम्मेलन में हिस्सा लिया. वहीं अब उनका इस सम्मेलन में शामिल होना काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. क्योंकि कार्यक्रम में दो युवकों ने UGC को लेकर डिप्टी सीएम से सवाल पूछ लिया, फिर क्या था पुलिस आई और दोनों युवकों को पकड़ कर बाहर ले गई, जानकारी ये भी सामने आ रही है कि दोनों युवक ब्राह्मण थे. जिनमें से एक का नाम रोहित तिवारी बताया जा रहा है.
अब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसको लेकर यूजर्स को सरकार पर सवाल भी उठा रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि क्या अब नेताओं से सवाल पूछना भी अपराध हो गया है? वहीं युवकों के सवाल पर डिप्टी सीएम ने भी मंच से जवाब दिया.
कार्यक्रम में क्या हुआ?
प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक कार्यक्रम में उस वक्त हंगामा हो गया, जब एक युवक ने उनसे UGC के मुद्दे पर सवाल पूछ लिया. आरोप है कि सवाल पूछने वाले युवक रोहित तिवारी को जवाब देने के बजाय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. इतना ही नहीं, अल्लापुर से बीजेपी पार्षद विनय मिश्रा पर भी रोहित तिवारी को थप्पड़ मारने का आरोप लगा है. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद बीजेपी और यूपी सरकार को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय परशुराम परिषद की ओर से आयोजित प्रबुद्ध सम्मेलन बताया जा रहा है. घटना ऐसे समय हुई है, जब उत्तर प्रदेश में UGC के मुद्दे को लेकर सामान्य वर्ग के एक हिस्से में पहले से ही नाराजगी देखने को मिल रही है. अब प्रयागराज की इस घटना ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है.
केशव मौर्य ने मंच से क्या कहा?
कार्यक्रम के दौरान हंगामे के बीच डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने लोगों से शांत रहने की अपील की. उन्होंने मंच से कहा कि वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटते और लोगों को सच्चाई बताना चाहते हैं. केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, "अभी आप चुप रहो चलो, मैं सबकुछ बोलूंगा, मैं कुछ भी बोलने से पीछे नहीं हटता. ध्यान में रखो इस बात को. मैं आपके सामने जो बाते कर रहा हूं वो केवल इसलिए कर रहा हूं कि आपको सच्चाई पता लगनी चाहिए, देश के दुश्मन चाहते क्या है? देश के दुश्मन तो यही चाहेंगे कि समाज बट जाए, समाज को बांटकर राजनीति करें."
मंच को लेकर भी क्यों उठे सवाल?
इस घटना के बाद सम्मेलन के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. आलोचकों का आरोप है कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने के बजाय राजनीतिक समर्थन जुटाने का माध्यम बनते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा गया कि "यह जो राष्ट्रीय परशुराम की मंच सजी है दरसअल यह समाज के लिए नहीं बल्कि यह वोटों के कोल्ड स्टोरेजों के लिए है, एकता और अखंडता से इनका कोई मतलब नहीं है, देखिए जिन ब्राह्मणों के लिए यह मंच लगाया जा रही है उन्ही को मात्र सवाल पूछने पर गिरफ्तार किया जा रहा है."




