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क्या है Form 6 और कब भरा जाता है, चुनाव आयोग ने अब कैसे दी बड़ी राहत, SIR के बाद क्या था डर, FAQ

SIR के बाद वोटर लिस्ट से नाम कट गया है तो Form 6 के जरिए दोबारा जुड़वा सकते हैं. जानिए कौन फॉर्म भर सकता है, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की पूरी प्रक्रिया.

क्या है Form 6 और कब भरा जाता है, चुनाव आयोग ने अब कैसे दी बड़ी राहत, SIR के बाद क्या था डर, FAQ
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भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब हो गए हैं, उनके लिए चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है. आयोग ने 3 नवंबर 2026 को साफ किया है कि पहले से वोटर रहे लोग भी अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं. इसे झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा और सिर्फ इस आधार पर उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी. दरअसल, फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से जुड़ी घोषणा होने के कारण पुराने वोटर इसे भरने से डर रहे थे. अब चुनाव आयोग ने इस कानूनी भ्रम को दूर कर दिया है. ऐसे में जानिए क्या है फॉर्म-6, इसे कौन और कब भर सकता है, SIR के बाद पुराने मतदाताओं को क्या राहत मिली है और नाम जुड़वाने के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होगी? आइए FAQ से जानते हैं...

Form 6 से जुड़े सवाल-जवाब

Form 6 भारत निर्वाचन आयोग का आधिकारिक आवेदन पत्र है, जिसके जरिए कोई पात्र भारतीय नागरिक अपना नाम मतदाता सूची (Voter List) में जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है. आमतौर पर 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवा पहली बार वोटर बनने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा, SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के बाद जिन पुराने मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, वे भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं. चुनाव आयोग के 3 नवंबर 2026 के स्पष्टीकरण के मुताबिक, ऐसे पुराने मतदाताओं का फॉर्म-6 भरना झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा. Form 6 (फॉर्म-6) चुनाव आयोग का एक आधिकारिक फॉर्म है, जिसके जरिए पात्र भारतीय नागरिक अपना नाम वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में जुड़वाने के लिए आवेदन करते हैं. इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से 18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के पहली बार मतदाता बनने के लिए किया जाता है. इसके अलावा, जिन पुराने मतदाताओं का नाम किसी वजह से मतदाता सूची से हट गया है, वे भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं.

फॉर्म-6 मुख्य रूप से इन परिस्थितियों में भरा जाता है: - जब कोई व्यक्ति पहली बार 18 साल की उम्र पूरी करके मतदाता बनना चाहता है. - जब पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है. - जब SIR के बाद किसी पुराने मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब हो गया है. - जब किसी पात्र व्यक्ति को मतदाता सूची में अपना नाम पहली बार दर्ज कराना है.

SIR के दौरान कई पुराने मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब हो गए थे. ऐसे लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की जरूरत थी. लेकिन इस फॉर्म में एक घोषणा होती है कि आवेदक का नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है. पहले से वोट डाल रहे लोगों को डर था कि अगर वे यह घोषणा करके फॉर्म भरते हैं तो इसे झूठा बयान माना जा सकता है. उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मुकदमा चलने और एक साल तक की सजा होने का डर सता रहा था. इसी वजह से कई पुराने मतदाता फॉर्म-6 भरने से हिचक रहे थे.

चुनाव आयोग ने 3 नवंबर 2026 को साफ किया कि SIR के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पुराने मतदाता भी फॉर्म-6 भर सकते हैं. सिर्फ इस आधार पर कि उनका नाम पहले भी मतदाता सूची में दर्ज था, इसे झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा. आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि किसी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) की ओर से केवल इसी वजह से पुराने मतदाता के खिलाफ धारा 31 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.

हां. चुनाव आयोग के नए स्पष्टीकरण के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति पहले से मतदाता था, लेकिन SIR के बाद उसका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, तो वह दोबारा फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकता है. हालांकि, शर्त यह है कि उसका नाम किसी दूसरी लोकसभा या विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज नहीं होना चाहिए.

नहीं. चुनाव आयोग ने साफ किया है कि सिर्फ पुराने मतदाता होने के बावजूद फॉर्म-6 भरने को झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा. ऐसे मतदाता के खिलाफ केवल इसी आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाएगी.

फॉर्म-6 मूल रूप से पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए बनाया गया है. इसलिए इसमें आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसका नाम पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा रहा है. यह घोषणा 1 अगस्त 2022 से लागू फॉर्म का हिस्सा है. SIR के बाद पुराने मतदाताओं के सामने इसी घोषणा को लेकर कानूनी भ्रम पैदा हुआ था. अब चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि पुराने मतदाता का दोबारा आवेदन करना अपने आप में झूठी घोषणा नहीं है.

हां. दिल्ली हाईकोर्ट ने नीलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग (W.P. No. 14955/2026) मामले में 14 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया था. अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले से मतदाता रहे व्यक्ति का फॉर्म-6 भरना केवल इस आधार पर झूठी घोषणा नहीं माना जा सकता कि वह पहली बार वोटर नहीं बन रहा है.

नहीं. SIR पूरा कर चुके राज्यों में चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 के साथ मांगे जा रहे अतिरिक्त घोषणा-पत्र (Annexure-D) को हटा दिया है. पहले इस अतिरिक्त घोषणा में आवेदक से उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में होने से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही थी. अब इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र की जरूरत नहीं होगी. आवेदक को मूल फॉर्म-6 के तहत आवेदन करना होगा.

फॉर्म-6 भरते समय आवेदक को अपनी पहचान, उम्र और निवास से जुड़े जरूरी दस्तावेज देने होते हैं. इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: - पासपोर्ट साइज फोटो. - उम्र का प्रमाण, जैसे जन्म प्रमाणपत्र या मान्य शैक्षणिक दस्तावेज. - पते का प्रमाण, जैसे आधार कार्ड या अन्य स्वीकार्य दस्तावेज. - चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित अन्य जरूरी दस्तावेज. SIR के दौरान उम्र और परिवार के पुराने रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत संबंधित निर्देशों के अनुसार अलग हो सकती है.

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