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Explainer: क्या है GRAP और कितने AQI पर लागू होती है कौन सी स्टेज, वर्क फ्रॉम होम और ऑड-ईवन की भी आ सकती है स्थिति

दिल्ली में इस वक्त प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते GRAP-1 लागू किया गया है. हालांकि दिवाली के बाद दिल्ली की हवा की स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है और GRAP की अलग-अलग स्टेज देखने को मिल सकती है.

delhi AQI
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दिल्ली-NCR में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. दिवाली के बाद हवा की गुणवत्ता और बिगड़ने की आशंका रहती है. कई बार प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ जाता है कि लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगती है. हर साल सरकार प्रदूषण पर काबू पाने के लिए कई कदम उठाती है और करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती. नवंबर 2026 की शुरुआत में दिल्ली-NCR का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 300 के पार पहुंचने के बाद ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP का दूसरा चरण लागू कर दिया गया है.

इसके तहत प्रदूषण रोकने के लिए कई तरह की पाबंदियां लगाई जाती हैं. अगर आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और खराब होती है, तो GRAP-3 और GRAP-4 के कड़े नियम भी लागू किए जा सकते हैं. ऐसे में जानना जरूरी है कि किस AQI पर कौन-सी पाबंदियां लगती हैं और वर्क फ्रॉम होम या ऑड-ईवन का फैसला कब लिया जा सकता है?

क्या है GRAP और क्यों किया जाता है लागू?

GRAP दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तैयार की गई व्यवस्था है. इसका मकसद हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाना और प्रदूषण को गंभीर स्तर तक पहुंचने से रोकना है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से इस योजना को चार चरणों में बांटा गया है. AQI का स्तर बढ़ने के साथ ही पाबंदियां भी सख्त होती जाती हैं. इसमें निर्माण कार्यों, वाहनों, उद्योगों और अन्य प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर अलग-अलग तरह की रोक लगाई जाती है.

कितने AQI पर कौन सा GRAP होगा लागू?

GRAP-1: जब AQI 200 से 300 के बीच होता है तो GRAP-1 लागू होता है. इस चरण में निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के उपाय किए जाते हैं. खुले में कूड़ा जलाने पर रोक, वाहनों के प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) की जांच और सड़कों पर पानी का छिड़काव जैसे कदम उठाए जाते हैं.

GRAP-2: जब AQI 300 से 400 तक पहुंच जाता है, तो GRAP-2 लागू किया जाता है. इसको खराब स्तर माना जाता है. इसमें डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर सख्ती की जाती है. निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाया जा सकता है. साथ ही, मेट्रो और बसों के फेरे बढ़ाने के अलावा सरकारी और निजी कार्यालयों के कामकाज के समय में बदलाव जैसे कदम उठाए जाते हैं.

GRAP-3: जब AQI 400 से 450 तक पहुंच जाता है तो GRAP-3 लागू किया जाता है. इसे बेहद खराब स्थिति माना जाता है. इस दौरान गैर-जरूरी निर्माण कार्यों और खनन पर रोक लगाई जाती है. BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर भी पाबंदी लग सकती है.

GRAP-4: जब AQI 450 से ज्यादा पहुंच जाता है तो GRAP-4 लागू किया जाता है. जिसमें हवा की स्थिति बेहद गंभीर मानी जाती है. इस दौरान जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को छोड़कर अन्य ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है. निर्माण कार्य पूरी तरह बंद किए जा सकते हैं और कक्षा 11 तक के स्कूलों को ऑनलाइन चलाने का फैसला लिया जा सकता है. जरूरत पड़ने पर ऑड-ईवन जैसे आपातकालीन कदम भी उठाए जा सकते हैं.

कब लागू हो सकता है वर्क फ्रॉम होम?

संशोधित नियमों के मुताबिक, GRAP-3 के दौरान वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू की जा सकती है. इस चरण में राज्य सरकारें और दिल्ली प्रशासन सरकारी, निजी और नगर निगम के कार्यालयों को 50 फीसदी कर्मचारियों के साथ चलाने का फैसला ले सकते हैं. बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जा सकती है.

किस स्थिति में लागू होगा ऑड-ईवन?

ऑड-ईवन योजना को प्रदूषण पर काबू पाने के लिए उठाए जाने वाले आखिरी इमरजेंसी कदमों में गिना जाता है. GRAP-4 लागू होने और AQI के 450 से ऊपर पहुंचने पर सरकार इस व्यवस्था पर विचार कर सकती है. इसके तहत सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए नंबर प्लेट के आखिरी अंक के आधार पर गाड़ियों को अलग-अलग दिनों में चलाने की अनुमति दी जाती है. हालांकि, इसे लागू करने का अंतिम फैसला सरकार ही लेती है.

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