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'पत्नियों से पीड़ित पतियों को न्याय कौन देगा, जब जज ही परेशान होकर कर रहे हैं सुसाइड' अमन शर्मा की आत्महत्या के बाद उठा सवाल

दिल्ली में युवा जज अमन शर्मा द्वारा किए गए सुसाइड के बाद सवाल उठ रहा है कि जब जज ही अपनी पत्नियों से तंग आकर सुसाइड कर रहे हैं तो ऐसे पतियों को न्याय कौन देगा?

judge aman sharma suicide case
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judge aman sharma suicide case

( Image Source:  X/ @NeelamMahajanS1, @dr_a_p_singhLaw )

देश में आए दिन कोई न कोई ऐसा मामला सामने आता रहता है जहां कोई न कोई पति अपनी पत्नी या घर के कलेशों के चलते आत्महत्या कर अपनी जान दे देता है. कई बार ऐसे व्यक्ति सुसाइड तो कर लेते हैं लेकिन पीछे जो नोट छोड़कर जाते हैं या वीडियो छोड़कर जाते हैं वो काफी हैरान, परेशान करने वाला होता है. जिससे कई गंभीर सवाल भी उठते हैं कि आखिरी हमारे समाज को क्या हो गया है, जिस पत्नी को पति के लिए कभी यमराज से लड़ते हुए देखा जाता था, आज वहीं कई पत्नी अपने ही पतियों की मौत का कारण बन रही है.

ताजा मामला दिल्ली का है जहां एक युवा जज अमन कुमार शर्मा ने बीते कुछ दिनों पहले घर के कलेश, पत्नी और पत्नी की बहन से तंग आकर सुसाइड कर लिया था. इस घटना ने दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश को झकझोर के रख दिया. बता दें, उनकी पत्नी खुद एक न्यायिक अधिकारी हैं और साली आईएएस अधिकारी है. ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि जब जज ही अपनी पत्नियों से तंग आकर सुसाइड कर रहे हैं तो ऐसे पतियों को न्याय कौन देगा?

इसको लेकर क्या बोले सुप्रीम कोर्ट के वकील?

इस सवाल का जवाब देते हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एपी सिंह ने कहा, "देखिए हमारा प्राइवेट बिल पिछली बार लोकसभा में पेश किया गया, संसद में रखा गया कि मेन्स आयोग बनना चाहिए. जैसे महिला आयोग है, महिला हेल्पलाइन है, महिला थाना है जैसे ये सब कुछ है वैसे ही पुरुष आयोग, पुरुष हेल्पलाइन, पुरुष स्पेशल डेस्क, पुरुष थाना होना चाहिए."

क्या होगा कानून?

जब उनसे पूछा गया कि जब तक ये पुरुष आयोग बनेगा, संविधान में बदलाव होगा तब तक तो कई सारे अमन शर्मा पत्नियों से पीड़ित होके मर जाएंगे, इसको लेकर आखिर कानून क्या है. इस पर जवाब देते हुए एपी सिंह ने बताया "अब न्यायधीशों को सजग होना पड़ेगा, जागरूक होना पड़ेगा. पुलिस को अपनी जांच की तरीब बदलनी होगी और साथ में एक हेल्पलाइन जारी करने पड़ेगी कि अगर अतुल सुभाष, मानव शर्मा, एयरफोर्स ऑफिसर अभिनंदर जैसे लोगों की मौत हुई, जिसमें अब फास्ट कोर्ट में केस चलेंगे और न्याय मिलेगा. अपराधी, अपराधी होंगे चाहे महिला हो या पुरुष उससे कोई फर्क नहीं पड़ता. अब इसमें जज को थोड़ा सख्त होना पड़ेगा, उनमें जो महिलाओं लेकर थोड़ा नरम पक्ष होता था उसके बदलना पड़ेगा."

क्या पुरुषों पर अत्याचार कर रहा महिला कानून?

क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए बना कानून पुरुषों पर अत्याचार कर रहा है? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने कहा "पुरुषों के लिए प्रोटेक्शन न होना ये कानून की लचर व्यवस्था है. कानून आमंत्रित कर रहा अतुल सुभाष, मानव शर्मा और अमन शर्मा जैसे युवकों को मरने के लिए, जिनकी शादी को जुम्मा-जुम्मा 4 दिन हुए हो. इसके लिए कानून, सरकार, सिस्टम अदालतें हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जिम्मेदार है."

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