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द्वारका SUV हादसा: आरोपी नाबालिग को नहीं साहिल धनेशरा की मौत का पछतावा; फिर क्यों मिली अंतरिम जमानत?

दिल्ली के द्वारका इलाके में तेज रफ्तार महिंद्रा स्कॉर्पियो से हुई दर्दनाक दुर्घटना में 23 वर्षीय बाइकर साहिल धनेशरा की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. 17 वर्षीय आरोपी को अंतरिम जमानत दी गई है.

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Dwarka SUV accident

( Image Source:  X/ @BeingLegitMan )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 19 Feb 2026 7:16 AM

Dwarka SUV Accident: दिल्ली के द्वारका इलाके में तेज रफ्तार महिंद्रा स्कॉर्पियो से हुई दर्दनाक दुर्घटना में 23 वर्षीय बाइकर साहिल धनेशरा की मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. हादसे के एक दिन बाद 17 वर्षीय आरोपी किशोर को किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) के समक्ष पेश किया गया, जहां बोर्ड की टिप्पणियों ने मामले को और गंभीर बना दिया.

बोर्ड के आदेश में यह उल्लेख किया गया कि आरोपी नाबालिग ने साहिल की मौत पर कोई पछतावा नहीं दिखाया। हालांकि, 6 दिन बाद उसे कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई, जिससे यह मामला कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है.

क्या बोला किशोर न्याय बोर्ड?

4 फरवरी को पारित आदेश में बोर्ड ने कहा “कानून से संघर्ष कर रहे 17 वर्षीय नाबालिग से पूछताछ करने पर पता चला कि वह किसी व्यक्ति के जीवन के महत्व को नहीं समझता और अपने इस काम के लिए पश्चाताप नहीं करता.” आदेश में यह भी दर्ज किया गया कि किशोर को रिहैबिलिटेशन के साथ-साथ उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मॉनिटरिंग हाउस भेजा गया.

क्यों दी गई अंतरिम जमानत?

10 फरवरी को जेजेबी ने आरोपी किशोर को कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति देते हुए अंतरिम जमानत प्रदान की. उसे निर्देश दिया गया कि परीक्षा समाप्त होने के बाद 9 मार्च को आत्मसमर्पण करे. यह राहत उसके वकील की उस दलील के बाद दी गई, जिसमें कहा गया था कि ऑब्जर्वेशन होम का वातावरण पढ़ाई के लिए नहीं है और लड़का वहां पढ़ाई नहीं कर पाएगा. प्रधान मजिस्ट्रेट चित्रांशी अरोरा ने स्पष्ट किया कि बोर्ड किशोर के छात्र होने की स्थिति से अवगत है और उसकी शिक्षा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.

क्या है जमानत की शर्तें और जिम्मेदारियां?

अंतरिम व्यवस्था के तहत किशोर को 10,000 रुपये के निजी बांड और समान राशि के एक जमानती पर उसके पिता की निगरानी में रिहा किया गया है. यह राहत 9 मार्च तक प्रभावी रहेगी, जब अगली सुनवाई निर्धारित है. बोर्ड ने सख्त शर्तें भी लगाई हैं. पिता को यह सुनिश्चित करना होगा कि किशोर आवश्यकतानुसार बोर्ड के समक्ष उपस्थित हो. साथ ही, अंतरिम अवधि में वह किसी भी प्रकार के कानूनी उल्लंघन में शामिल न हो और अपना समय केवल परीक्षा तैयारी में लगाए.

कब हुआ था हादसा?

यह दुर्घटना 3 फरवरी को हुई थी, जब साहिल धनेशरा अपनी बाइक पर था. पुलिस के अनुसार, आरोपी किशोर द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार एसयूवी ने उन्हें टक्कर मारी और इसके बाद एक खड़ी टैक्सी से जा भिड़ी. इस टक्कर में टैक्सी चालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया था. जांच में सामने आया कि नाबालिग के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. घटना के बाद उसे हिरासत में लेकर मॉनिटरिंग हाउस भेज दिया गया.

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत लापरवाही से वाहन चलाने, लापरवाही से मौत का कारण बनने और मानव जीवन को खतरे में डालने के आरोप में मामला दर्ज किया है. साथ ही, पुलिस ने किशोर के पिता को भी हिरासत में लिया है.

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