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दिल्ली में रोज 496 चोरी, अपहरण के मामलों में भी टॉप; NCRB रिपोर्ट ने क्या किए बड़े खुलासे?

NCRB रिपोर्ट 2024 के अनुसार दिल्ली में अपराध के मामले 15% घटे, लेकिन हत्या, अपहरण और चोरी जैसे अपराधों में राजधानी अब भी सबसे आगे है. जानें पूरी रिपोर्ट, आंकड़े और चौंकाने वाले खुलासे.

दिल्ली में रोज 496 चोरी, अपहरण के मामलों में भी टॉप; NCRB रिपोर्ट ने क्या किए बड़े खुलासे?
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( Image Source:  X-@ANI )

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की हालिया रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में 2024 के दौरान कुल दर्ज आपराधिक मामलों में करीब 15 प्रतिशत की गिरावट आई है. 2023 में जहां करीब 3.24 लाख केस दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर लगभग 2.75 लाख रह गई. इन मामलों में भारतीय दंड संहिता के साथ-साथ नए आपराधिक कानून Bharatiya Nyaya Sanhita के तहत दर्ज केस भी शामिल हैं, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुआ.

यह पहली बार है जब एनसीआरबी की रिपोर्ट में बीएनएस के तहत दर्ज मामलों को शामिल किया गया है. हालांकि कुल अपराध में कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली देश के 19 बड़े शहरों में हिंसक अपराध के मामले में अब भी सबसे आगे बनी हुई है.

दिल्ली में क्या हैं हत्या के आकंड़े?

हत्या के मामलों पर नजर डालें तो 2024 में दिल्ली में 504 केस दर्ज हुए, जो 2023 के 506 और 2022 के 509 मामलों से थोड़ा कम हैं. इसके बावजूद यह आंकड़ा अन्य शहरों की तुलना में काफी ज्यादा है. बेंगलुरु में 176 और सूरत में 114 हत्या के मामले सामने आए. कुल 504 मामलों में 522 लोगों की मौत हुई, जिनमें सबसे बड़ी वजह आपसी दुश्मनी रही, इसके बाद अवैध संबंध और लूटपाट जैसे कारण सामने आए.

अपहरण के मामलों में क्या है दिल्ली का स्थान?

अपहरण और अगवा करने के मामलों में हल्की गिरावट जरूर दर्ज हुई है. 2024 में ऐसे 5,580 केस सामने आए, जबकि 2023 में यह संख्या 5,715 थी. फिर भी दिल्ली इस श्रेणी में सबसे ऊपर रही. तुलना करें तो मुंबई में 1,854 और बेंगलुरु में 1,215 मामले दर्ज हुए. दिल्ली में सिर्फ 8.5 प्रतिशत मामलों में ही चार्जशीट दाखिल हो सकी और ज्यादातर पीड़ित 12 से 18 साल की लड़कियां थीं.

दिल्ली में चोरी के आंकड़े क्या कहते हैं?

संपत्ति से जुड़े अपराधों में चोरी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. 2024 में दिल्ली में 1,80,973 चोरी के मामले दर्ज हुए, यानी औसतन हर दिन करीब 496 मामले. यह देश के सभी शहरों में दर्ज चोरी के मामलों का 73.3 प्रतिशत है. इसके मुकाबले मुंबई में 10,854, बेंगलुरु में 9,229 और जयपुर में 9,051 मामले दर्ज हुए.

इन चोरी के मामलों में करीब 3,105 स्नैचिंग और लगभग 40,000 वाहन चोरी के केस शामिल हैं. हालांकि सड़क अपराधों में थोड़ी कमी देखने को मिली और लूट के मामले 2023 के 1,660 से घटकर 2024 में 1,510 हो गए. इसके विपरीत, रंगदारी के मामलों में बढ़ोतरी हुई और यह संख्या 207 से बढ़कर 228 पहुंच गई.

बीएनएस लागू होने के बाद अपराध के दो नए वर्ग सामने आए हैं, जो दिल्ली की स्थिति को समझने में अहम हैं. धारा 111 के तहत संगठित अपराध, जैसे गिरोह द्वारा किए गए अपहरण, लूट और रंगदारी के 20 मामले सामने आए, जो सभी महानगरों में सबसे ज्यादा हैं. लखनऊ और सूरत में ऐसे 9-9 मामले दर्ज हुए. वहीं धारा 112 के तहत छोटे संगठित अपराध यानी गैंग से जुड़े 180 मामले सामने आए.

क्या दंगों के मामलों में आई गिरावट?

दंगों के मामलों में भी गिरावट दर्ज की गई है. 2024 में 33 मामले सामने आए, जबकि 2023 में यह संख्या 44 थी. इस साल आतंकवाद निरोधक कानून या गैरकानूनी जमावड़े के तहत कोई केस दर्ज नहीं हुआ.

दिल्ली में लापता बच्चों के आंकड़े क्या हैं?

लापता बच्चों के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं. 2024 के अंत तक दिल्ली में 10,843 बच्चे लापता दर्ज किए गए. इनमें से 5,491 मामले उसी साल के हैं, जबकि 5,352 मामले पिछले वर्षों से लंबित हैं. इनमें 7,649 लड़कियां, 3,192 लड़के और दो ट्रांसजेंडर बच्चे शामिल हैं. 2023 में कुल 6,284 बच्चे लापता थे.

लापता बच्चों की बरामदगी दर 2024 में 62.4 प्रतिशत रही. देशभर में लंबित 1,47,175 मामलों में दिल्ली की हिस्सेदारी 7.36 प्रतिशत है. नए मामलों की संख्या 2024 में 5,491 रही, जो 2023 के 6,284 से कम है, जबकि कुल मामलों की संख्या 12,324 से घटकर 10,843 रह गई.

कुल मिलाकर 2024 के अंत तक दिल्ली में 55,939 लोग लापता दर्ज थे, जिनमें वयस्क भी शामिल हैं. इनमें 23,058 मामले 2024 में दर्ज हुए, जबकि 32,881 मामले पहले के वर्षों से लंबित हैं. सभी लापता लोगों की रिकवरी दर 2024 में 50.8 प्रतिशत रही, जो 2023 में 47 प्रतिशत थी. साइबर अपराध के मामलों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है. 2024 में 404 साइबर क्राइम केस दर्ज हुए, जो पिछले साल के लगभग बराबर ही हैं.

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