क्या Vote Deletions बन रहा मुख्यमंत्रियों की हार की वजह, केजरीवाल से लेकर ममता-स्टालिन तक के नंबर चौंकाने वाले?
क्या वोटर लिस्ट से नाम कटना 2026 के चुनाव नतीजों में बड़ा फैक्टर बना? Arvind Kejriwal, Mamata Banerjee और M. K. Stalin की हार के बीच SIR और वोट कटने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं.
Vidhan Sabha Elections: पांच राज्यों में चुनाव के नतीजे आने के बाद आरोप लग रहे हैं कि वोट डिलीट होना मुख्यमंत्रियों की हार की एक बड़ी वजह बना है. 2024 में Arvind Kejriwal पहले मुख्यमंत्री थे जो हारे थे और उनके मामले में भी यह आरोप लगा था कि वोटों के कटने की वजह से उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
अब पांच राज्यों के चुनाव नतीजों में भवानीपुर सीट से Mamata Banerjee को करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उनके खिलाफ Suvendu Adhikari मैदान में थे. वहीं दूसरी तरफ M. K. Stalin को भी हार का सामना करना पड़ा. खास बात यह है कि इन दोनों दिग्गज नेताओं की हार कुछ हजार वोटों के अंतर से हुई.
केजरीवाल ने वोट काटने पर क्या कहा था?
जब ये आरोप लगाए जा रहे थे, उसी दौरान अरविंद केजरीवाल का एक पुराना बयान भी चर्चा में रहा. 2014 में दिल्ली चुनाव के दौरान उन्होंने यह मुद्दा उठाया था और कहा था कि जब वह जेल में थे, तब उनकी विधानसभा सीट से कई हजार वोट काट दिए गए थे.
बीजेपी पर क्या लगाए थे गंभीर इल्जाम?
अरविंद केजरीवाल ने दिसंबर 2024 में वोट काटे जाने के मुद्दे पर Election Commission of India से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा था कि उन्होंने चुनाव आयोग को 3,000 पन्नों के सबूत सौंपे हैं, जिनसे यह साबित होता है कि Bharatiya Janata Party दिल्ली के असली निवासियों के वोट हटाने की कोशिश कर रही है. जिस समय केजरीवाल ने यह आरोप लगाए थे, उस वक्त दिल्ली में SIR को लेकर कोई मुद्दा नहीं था.
कितने वोटों से हारे तीनों सीएम और क्या लग रहे आरोप?
- M. K. Stalin को कोलाथुर सीट पर 8,795 वोटों से हार का सामना करना पड़ा, जबकि करीब 1.02 लाख वोट गायब होने का दावा किया गया.
- Mamata Banerjee भवानीपुर सीट से 15,000 वोटों से हार गईं, जहां लगभग 51,000 वोट हटाए जाने की बात कही गई.
- Arvind Kejriwal नई दिल्ली सीट से सिर्फ 4,000 वोटों से हारे, जबकि करीब 38,000 वोटों के गायब होने का दावा किया गया.
असदुद्दीन ओवैसी ने उठाया मुद्दा?
Asaduddin Owaisi ने एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा कि SIR को नागरिकता से जोड़ना गलत है, क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेना जरूरी है और यह सिर्फ वोट डालने का मामला नहीं है. ओवैसी ने यह भी कहा कि ममता बनर्जी और एम. के. स्टालिन की सीटों पर SIR हुआ और दोनों ही चुनाव हार गए.
वेस्ट बंगाल में SIR ममता की हार की वजह?
चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जिन 169 विधानसभा सीटों पर 25,000 से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए, वहां 2021 में All India Trinamool Congress का दबदबा था और उसने 128 सीटें जीती थीं, जबकि Bharatiya Janata Party को सिर्फ 41 सीटें मिली थीं. लेकिन 2026 में स्थिति पूरी तरह बदल गई.
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक अब इन्हीं सीटों पर बीजेपी 104 सीटों तक पहुंच गई, जबकि टीएमसी घटकर 63 सीटों पर सिमट गई. Indian National Congress को 2 सीटें मिलीं.
वहीं, जिन 124 सीटों पर 25,000 से कम नाम हटाए गए, वहां भी बीजेपी ने 2021 में 36 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार उसकी सीटों की संख्या 100 से ज्यादा हो गई. यानी इन सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन करीब तीन गुना बढ़ गया.
कहां काटे गए सबसे ज्यादा नाम?
जिलों के स्तर पर देखें तो सबसे ज्यादा नाम काटे जाने के मामले मुर्शिदाबाद में सामने आए, जहां 4.55 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. 2021 में इस जिले की 22 सीटों में से 20 सीटें टीएमसी के पास थीं, लेकिन इस बार उसकी सीटें घटकर 9 रह गईं.
उत्तर 24 परगना में 3.25 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए. यहां 2021 में 33 में से 28 सीटें टीएमसी ने जीती थीं, जबकि अब उसके पास सिर्फ 8 सीटें बचीं.
मालदा जिले में 2.39 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए. यहां 12 सीटों में से टीएमसी की संख्या 8 से घटकर 6 रह गई, जबकि बाकी सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की.




