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गले का कांटा बनी TMC को क्या RSS-BJP ने खड़ा किया? चुनाव चिन्ह से लेकर वाजपेयी कनेक्शन तक, लेफ्ट नेता ने बताया पूरा खेल

पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद All India Trinamool Congress की हार के बीच सीपीआई नेता Hannan Mollah ने बड़ा दावा किया है, उन्होंने लिंक जोड़ते हुए साफ किया टीएमसी को बीजेपी और आरएसएस के जरिए इस्टेब्लिश किया गया था.

गले का कांटा बनी TMC को क्या RSS-BJP ने खड़ा किया? चुनाव चिन्ह से लेकर वाजपेयी कनेक्शन तक, लेफ्ट नेता ने बताया पूरा खेल
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समी सिद्दीकी
By: समी सिद्दीकी3 Mins Read

Published on: 6 May 2026 12:18 PM

West Bengal: पश्चिम बंगाल में ममता का किला ढह गया है. 15 सालों तक गले का कांटा बनी All India Trinamool Congress को Bharatiya Janata Party ने जबरदस्त शिकस्त दी है. ऐसा माना जाता है कि कभी टीएमसी को बीजेपी और Rashtriya Swayamsevak Sangh ने ही खड़ा किया था. हालांकि, इसके कोई आधिकारिक सबूत नहीं मिलते हैं. इस मसले को लेकर सीपीआई नेता Hannan Mollah ने बताया कि बीजेपी और आरएसएस कांग्रेस को तोड़ना चाहते थे और इस दौरान टीएमसी को खड़ा किया गया.

1 जनवरी 1998 को टीएमसी यानी त्रिणमूल कांग्रेस बनी, जो कांग्रेस से अलग होकर बनी थी. 1999 में Mamata Banerjee ने एनडीए ज्वाइन किया और रेल मंत्री बनीं. 2000 में उन्होंने अपना पहला रेलवे बजट पेश किया और कई वादे भी पूरे किए.

क्या बोले सीपीआई नेता Hannan Mollah?

Hannan Mollah ने कहा कि बीजेपी की हमेशा से यह रणनीति रही है कि वह मूल पार्टी को तोड़ती है और टूटे हुए हिस्से को अपने साथ रखती है. उन्होंने कहा कि 1980 में आरएसएस ने बीजेपी को खड़ा किया. इसके बाद 1991 में मुकुल रॉय को लेकर कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश की गई.

इस दौरान उन्हें ममता बनर्जी एक तैयार विकल्प के रूप में मिलीं और फिर उन्हें आगे बढ़ाया गया. मुकुल रॉय, जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए थे, उनकी मदद से टीएमसी बनाई गई. जो ममता बनर्जी के एकदम करीबी माने जाते थे.

पार्टी सिंबल का चुनाव कैसे हुआ?

उन्होंने कहा कि उस समय पार्टी के चुनाव चिन्ह को लेकर भी एक अहम बात हुई और कहा गया कि हमारा चिन्ह फूल है, आप भी फूल ही लें. इसी वजह से पार्टी के सिंबल में छोटे फूल शामिल किए गए.

ममता बनर्जी के घर पहुंचे वाजपेयी?

उन्होंने दावा किया कि इस दौरान पूरी योजना के तहत काम किया गया और Atal Bihari Vajpayee ममता बनर्जी के घर पहुंचे. वह उनके गांव कोटी गए और उनकी मां के पैर छुए. इसके बाद धीरे-धीरे ऐसा माहौल बनता गया कि ममता को आरएसएस और बीजेपी ने खड़ा किया और इसी रिश्ते के चलते उन्हें मंत्री बनाया गया.

उन्होंने कहा कि इसी समर्थन की वजह से टीएमसी को बंगाल में एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर स्थापित किया गया और कई आंदोलन किए गए. सिंघूर में टाटा की फैक्ट्री के खिलाफ भी विरोध हुआ. उस समय ममता बनर्जी बीजेपी के तत्कालीन अध्यक्ष Rajnath Singh के साथ धरने पर बैठी थीं.

उन्होंने कहा कि इस तरह ममता बनर्जी की छवि बनाई गई और यह दिखाया गया कि पश्चिम बंगाल को बचाने वाली वही हैं. इसका असर यह हुआ कि 2011 में करीब 35 साल से सत्ता में रही लेफ्ट सरकार को बंगाल से बाहर होना पड़ा.

15 साल बाद ममता का किला ढहा?

15 साल बाद ममता बनर्जी सत्ता से हट गई हैं. टीएमसी ने विधानसभा चुनाव में 80 सीटें हासिल की हैं वहीं बीजेपी ने डबल सेंचुरी लगाते हुए 207 सीटें हासिल की हैं. 30 साल से ज्यादा बंगाल पर राज करने वाले लेफ्ट ने केवल एक सीट हासिल की है.

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