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भिखारी कहने पर बहू ने की थी आत्महत्या, SC बोला- लड़की का अपमान करना कतई बर्दाश्त नहीं- क्यों करते हों शादी?

छत्तीसगढ़ दहेज मृत्यु केस में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी. जस्टिस नागरत्ना ने कहा- बहुओं और उनके परिवार का अपमान अब बर्दाश्त नहीं होगा.

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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी6 Mins Read

Updated on: 29 May 2026 5:57 PM IST

भारत में दहेज…एक ऐसा शब्द, जिसने न जाने कितनी बेटियों की हंसी छीन ली. कितने घर उजाड़ दिए और अब एक बार फिर इसी दहेज की आग पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा फूट पड़ा है. कोर्ट ने साफ कह दिया है- अब बहुओं और उनके परिवारों का अपमान करने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, लेकिन अदालत के भीतर जो बातें कही गईं, उन्होंने पूरे देश को झकझोर दिया. जजों की सख्त टिप्पणियां सिर्फ एक केस पर फैसला नहीं थीं…बल्कि उस मानसिकता पर हमला थीं, जहां शादी को रिश्ता नहीं, बल्कि सौदे की तरह देखा जाता है.

आखिर लड़के शादी क्यों करते हैं?

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में बैठे जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां उस वक्त बेहद नाराज नजर आए, जब दहेज मौत मामले में दोषी परिवार राहत मांगने पहुंचा. कोर्ट ने तीखे शब्दों में पूछा कि लड़के शादी क्यों करते हैं, अगर बाद में लड़कियों और उनके परिवार का अपमान ही करना है? अब ऐसा कड़ा संदेश जाना चाहिए कि दुल्हन और उसके परिवार का अपमान लगातार नहीं किया जा सकता.' कोर्ट रूम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया. यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं थी… यह उन लाखों परिवारों का दर्द था, जो दहेज के नाम पर सालों से अपमान सहते आए हैं.

फांसी पर लटकी मिली थी बहू…

पूरा मामला छत्तीसगढ़ के साल 2010 के एक दहेज मृत्यु केस से जुड़ा है. एक लड़की… जिसने सपने लेकर शादी की थी. लेकिन शादी के कुछ ही साल बाद उसकी जिंदगी नरक बन गई. आरोप लगे कि पति और ससुराल वाले लगातार कैश और कार की मांग कर रहे थे. लड़की को रोज ताने दिए जाते थे… दबाव डाला जाता था… और फिर एक दिन वह अपने ही घर में फंदे से लटकी मिली.

मौत शादी के तीन साल के भीतर हुई थी. परिवार टूट चुका था. लेकिन लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई. लड़की के घरवालों ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया गया. उसे मानसिक रूप से तोड़ा गया… और आखिरकार उसने जिंदगी हार दी.

दहेज नहीं… बेटी की जान मांगी जा रही थी

ट्रायल कोर्ट में सुनवाई हुई. मेडिकल रिपोर्ट आई. पोस्टमार्टम में मौत की वजह फांसी से दम घुटना बताई गई. लेकिन अदालत ने सिर्फ मौत नहीं देखी… अदालत ने उस दर्द को देखा, जो मौत से पहले लड़की झेल रही थी. गवाहों ने बताया कि लड़की के परिवार से लगातार पैसे मांगे जा रहे थे. यहां तक कि मौत से ठीक पहले भी पैसों को लेकर दबाव बनाया गया.

कोर्ट ने माना कि यह सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज प्रताड़ना का नतीजा था. तुम्हें खुश होना चाहिए कि सिर्फ 498A लगी है. मामले में मृतका के छोटे देवर ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की. उसके वकील ने दलील दी कि उसके खिलाफ सिर्फ धारा 498A लगी है और उसे राहत मिलनी चाहिए. लेकिन जस्टिस नागरत्ना इस दलील से बिल्कुल संतुष्ट नहीं दिखीं. उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि तुम्हें खुश होना चाहिए कि तुम्हारे खिलाफ सिर्फ 498A की धारा लगी है और सजा भी केवल तीन साल की हुई है.' यह सुनते ही कोर्ट रूम का माहौल बदल गया. साफ था कि अदालत अब दहेज मामलों में नरमी दिखाने के मूड में नहीं है.

कोशिश सिर्फ बहू और उसके परिवार को निचोड़ने की होती है

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने समाज की उस सोच पर सवाल उठाया, जहां लड़की वालों को शादी के बाद भी पैसे देने की मशीन समझ लिया जाता है. उन्होंने कहा कि कोशिश सिर्फ दुल्हन और उसके परिवार को निचोड़ने की होती है.' फिर कोर्ट ने वो बातें दोहराईं, जिन्हें सुनकर हर कोई सन्न रह गया. आखिर लड़के वालों ने क्या कहा था? तुम लोग भिखारी हो, पैसे नहीं दे सकते। लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की गुहार लगा रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था. ' कोर्ट के ये शब्द सिर्फ बयान नहीं थे… ये उस क्रूर सच का आईना थे, जो देश के कई घरों में आज भी जिंदा है.

आपको चुप रहना चाहिए था…

जब आरोपी पक्ष के वकील ने बीच में अपनी सफाई देने की कोशिश की, तब जस्टिस नागरत्ना ने तुरंत टोका. उन्होंने कहा कि 'आपको चुप रहना चाहिए था। दुल्हन के पिता कह रहे थे कि वे 60 हजार रुपये दे सकते हैं और आप उन्हें भिखारी कह रहे हैं? यह टिप्पणी सुनकर कोर्ट रूम में मौजूद कई लोग भावुक हो गए. एक संदेश जाना चाहिए…”आरोपी पक्ष ने एफआईआर में देरी का मुद्दा भी उठाया. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया. बेंच ने साफ कहा कि 'एक संदेश जाना चाहिए। आखिर बहुओं और बेटियों के साथ इसी तरह का व्यवहार किया जाता है. जस्टिस उज्जल भुइयां ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि 'ये पढ़े-लिखे लोग हैं, फिर भी ऐसी हरकतें कर रहे हैं.'

क्या ट्विशा शर्मा केस की गूंज भी सुनाई दी?

दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामला देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. ट्विशा… जिसकी शादी को सिर्फ पांच महीने हुए थे. लेकिन फिर वह अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली. परिवार ने आरोप लगाया कि पति समर्थ और पूर्व जज सास गिरिबाला सिंह दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे. हालांकि दोनों ने इन आरोपों से इनकार किया है. अब इस केस की जांच सीबीआई कर रही है और ट्विशा का पति एजेंसी की हिरासत में है.

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