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HC के आदेश पर पुलिस हिरासत से 15 भैंसों की हुई रिहाई, जानें क्या था पूरा मामला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने एक मामले में 15 भैंसों को पुलिस हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है. पुलिस ने कथित रूप से भैंसों को मारने और बूचड़खाने तक ले जाने के संदेह में जब्त किया था.

Chhattisgarh High Court Buffaloes released
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Buffaloes released

( Image Source:  AI: Sora )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 22 Jan 2026 11:24 AM

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने एक मामले में 15 भैंसों को पुलिस हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया है. यह मामला महासमुंद जिले से जुड़ा है, जहां पुलिस ने कथित रूप से भैंसों को मारने और बूचड़खाने तक ले जाने के संदेह में जब्त किया था. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ पशुओं को कहीं से कहीं ले जाना ही अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उन्हें वध के लिए भेजा जा रहा हो.

हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार जैसवाल ने कहा कि कृषि और डेयरी से जुड़े पशुओं का स्थानांतरण कानून के तहत अपराध नहीं है. फैसले ने किसानों और डेयरी मालिकों के अधिकारों को मजबूती दी है और कृषि‑पशुओं के संरक्षण के मामलों में स्पष्ट दिशा‑निर्देश पेश किए हैं.

क्या था मामला?

पुलिस को सूचना मिली थी कि महासमुंद जिले में कुछ लोग लगभग 15‑20 भैंसों को पैदल लेकर बूचड़खाने की ओर जा रहे हैं. पुलिस ने इसे रोकते हुए भैंसों को हिरासत में ले लिया. हालांकि, कोर्ट ने मामले की गहन समीक्षा के बाद कहा कि भैंसों को सिर्फ ले जाना वध के इरादे का सबूत नहीं है.

हाई कोर्ट का तर्क

न्यायमूर्ति संजय कुमार जैसवाल ने स्पष्ट किया "खेती के काम आने वाले पशुओं को बूचड़खाने के अलावा किसी और मकसद से एक जगह से दूसरी जगह ले जाना उक्त कानून के तहत अपराध नहीं है." कोर्ट ने कहा कि यदि यह साबित नहीं हो कि पशुओं को कटाने या बूचड़खाने के लिए ले जाया जा रहा था, तो उन पर छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 (Section 6) लागू नहीं हो सकता.

भैंसों के मालिक जो खुद कृषक और डेयरी किसान हैं उन्होंने अदालत में कहा कि ये पशु उनके लिए आजीवन आजीविका का साधन हैं. हाई कोर्ट ने भी माना कि भैंसों को हिरासत में रखने से कोई सार्थक लाभ नहीं होगा और उन्हें वापस मालिकों को सौंपना ही उचित है.

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