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नितिन नबीन का पहला सियासी दांव, BJP को 2026-27 की बड़ी लड़ाइयों के लिए कैसे तैयार कर रहे हैं नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पद संभालते ही यह संकेत दे दिया कि स्थानीय निकाय चुनाव अब सेकेंडरी नहीं हैं. शहरी भारत को साधने की यह रणनीति 2026-27 की बड़ी सियासी लड़ाइयों की नींव मानी जा रही है.

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( Image Source:  ANI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 22 Jan 2026 10:09 AM

भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पद संभालते ही यह साफ कर दिया है कि उनका कार्यकाल केवल संगठनात्मक निरंतरता का नहीं, बल्कि रणनीतिक पुनर्गठन और चुनावी आक्रामकता का होगा. मंगलवार को अध्यक्ष पद की कमान संभालने के कुछ ही घंटों के भीतर नबीन ने जिस तेजी से केरल विधानसभा चुनाव, बेंगलुरु महानगर निगम और तेलंगाना के शहरी निकाय चुनावों के लिए चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति की, उसने पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह एक स्पष्ट संदेश दे दिया-BJP अब शहरी भारत को दोबारा जीतने की तैयारी में है.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नितिन नबीन के शुरुआती फैसलों को सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान से जोड़कर देखा जा रहा है, जो उन्होंने पार्टी मुख्यालय में अध्यक्ष घोषित होने के मौके पर दिया था. मोदी ने कहा था कि BJP अब केवल संसद और विधानसभा की पार्टी नहीं, बल्कि नगर पालिकाओं और नगर निगमों की भी पहली पसंद बन चुकी है.

नबीन की नियुक्तियां उसी सोच की व्यावहारिक शक्ल मानी जा रही हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए अध्यक्ष आने वाले दिनों में यह साबित करना चाहते हैं कि स्थानीय निकाय चुनाव अब ‘सेकेंडरी इलेक्शन’ नहीं, बल्कि 2026–27 की बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों का ट्रेलर हैं.

अनुभवी चेहरे, बड़े मोर्चे: किसे मिली कौन-सी जिम्मेदारी

नितिन नबीन ने जिन नेताओं को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी है, वे केवल नाम भर नहीं हैं, बल्कि BJP के आजमाए हुए रणनीतिकार माने जाते हैं. केरल विधानसभा चुनाव की कमान सौंपी गई है पार्टी के वरिष्ठ महासचिव विनोद तावड़े को. बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) चुनावों के लिए राम माधव को प्रभारी बनाया गया है - वही राम माधव, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक पार्टी की रणनीति गढ़ी है. तेलंगाना नगर निकाय चुनावों की जिम्मेदारी दी गई है महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और युवा चेहरा आशीष शेलार को. तावड़े को इसके अलावा 29 जनवरी के चंडीगढ़ मेयर चुनाव का पर्यवेक्षक भी नियुक्त किया गया है, जो यह दिखाता है कि पार्टी नेतृत्व उन्हें बेहद संवेदनशील चुनावों में उतारने से नहीं हिचक रहा.

बेंगलुरु: नगर निगम नहीं, ‘मिनी विधानसभा’ की लड़ाई

राम माधव ने खुद सोशल मीडिया पोस्ट में यह स्पष्ट किया कि BBMP कोई साधारण नगर निगम नहीं, बल्कि यह पांच निगमों, 120 से ज्यादा गांवों और करीब 90 लाख मतदाताओं वाला क्षेत्र है. यहां 369 वार्ड हैं, और यह लड़ाई किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं. उनकी मदद के लिए राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया और महाराष्ट्र के विधायक संजय उपाध्याय को सह-प्रभारी बनाया गया है. पार्टी के भीतर इसे राम माधव की संगठनात्मक राजनीति में वापसी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि वे पिछले कुछ समय से सक्रिय संगठनात्मक भूमिका से दूर थे.

केरल पर खास फोकस: ‘असंभव’ से ‘संभावना’ तक

विनोद तावड़े की केरल नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है. हाल ही में राज्य में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस-नेतृत्व वाला UDF भले ही आगे रहा हो, लेकिन BJP ने 125 से ज्यादा ग्राम पंचायतों में दूसरा स्थान, 14 नगरपालिकाओं में रनर-अप पोजिशन हासिल की. इसके अलावा तिरुवनंतपुरम नगर निगम में पार्टी की जीत को BJP नेतृत्व एक बड़े मनोवैज्ञानिक ब्रेकथ्रू के रूप में देख रहा है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तावड़े को केरल भेजना इस बात का संकेत है कि केंद्रीय नेतृत्व-खासकर गृह मंत्री अमित शाह - राज्य को लेकर बेहद गंभीर है.

तेलंगाना: युवा नेतृत्व + संगठनात्मक संतुलन

तेलंगाना में अगले महीने होने वाले नगर निकाय चुनावों के लिए आशीष शेलार को प्रभारी बनाना BJP की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें युवा नेताओं को बड़े शहरी मोर्चों पर आजमाया जा रहा है. उनके साथ पूर्व राजस्थान BJP अध्यक्ष अशोक परमार और राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा को सह-प्रभारी बनाया गया है, ताकि अनुभव और ऊर्जा का संतुलन बना रहे.

शहरी वोट बैंक: 2024 की सबसे बड़ी चिंता

नितिन नबीन की रणनीति की जड़ें सीधे 2024 लोकसभा चुनावों के नतीजों में छिपी हैं. BJP ने जहां 2019 की 303 सीटों में से 92 सीटें गंवाईं, वहीं 32 नई सीटें भी जीतीं—जिनमें मुंबई नॉर्थ सेंट्रल और मुंबई नॉर्थ ईस्ट जैसे कुछ शहरी क्षेत्र शामिल थे. लेकिन आंकड़ों का विश्लेषण यह भी बताता है कि तेजी से शहरीकरण वाले इलाकों में BJP का वोट शेयर घटा है और 2009 से 2019 तक बढ़ती शहरी पकड़ 2024 में कमजोर पड़ी. एक वरिष्ठ BJP नेता के मुताबिक, “ग्रामीण इलाकों को लेकर पार्टी आश्वस्त है, लेकिन शहरी मतदाता अब उतना भरोसेमंद नहीं रहा. नितिन नबीन का पहला मिशन इसी गैप को भरना है.”

संगठन की समीक्षा, चुनावी मोड ऑन

बुधवार को नितिन नबीन ने सभी राज्यों के BJP अध्यक्षों, राष्ट्रीय पदाधिकारियों, राज्य प्रभारियों और मोर्चा अध्यक्षों के साथ बैठक कर संगठनात्मक स्थिति और चुनावी तैयारियों की समीक्षा की. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को केरल दौरे पर जा सकते हैं, जबकि नितिन नबीन का खुद अगले महीने केरल जाने का कार्यक्रम बन रहा है.

आगे क्या? ‘युवा + अनुभवी’ टीम का संकेत

पार्टी सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन अगले दो महीनों में अपनी पूरी टीम का ऐलान कर सकते हैं, जिसमें युवा नेताओं, जमीनी संगठनकर्ताओं और अनुभवी चुनावी रणनीतिकारों का संतुलित मिश्रण होगा. उनका पहला कदम यह दिखाता है कि BJP अब लोकसभा हार की आत्ममंथन अवस्था से निकलकर, शहरी पुनर्जागरण के आक्रामक मोड में प्रवेश कर चुकी है.

नितिन नबीन का साफ संदेश

नितिन नबीन के शुरुआती फैसलों से पार्टी के भीतर एक बात साफ हो गई है कि 2026–27 के चुनाव केवल राज्यों की सत्ता नहीं, बल्कि शहरी भारत की राजनीतिक आत्मा की लड़ाई होंगे. और साथ ही नगर निगम, नगर पालिका और ग्राम पंचायत अब सिर्फ स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि BJP की राष्ट्रीय रणनीति की नींव हैं. और यही है नितिन नबीन का पहला, लेकिन बेहद साफ संदेश - “जो शहर जीतेगा, वही सत्ता की दिशा तय करेगा.”

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