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कुर्सी बड़ी, इम्तिहान और बड़े! महिला आरक्षण, नेक्‍स्‍ट जेनरेशन लीडर्स और 2029 का चुनाव - नितिन नबीन के पास 3 साल और 3 बड़े सवाल

BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे नितिन नबीन के लिए अगला तीन साल का कार्यकाल बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी, 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन, वन नेशन वन इलेक्शन, 2029 लोकसभा चुनाव की रणनीति और दक्षिण भारत में पार्टी का विस्तार - ये सभी बड़े मुद्दे उनके सामने होंगे. इसके साथ ही जाति जनगणना और बदलते वैश्विक हालात भी उनकी नेतृत्व क्षमता की असली परीक्षा लेंगे.

कुर्सी बड़ी, इम्तिहान और बड़े! महिला आरक्षण, नेक्‍स्‍ट जेनरेशन लीडर्स और 2029 का चुनाव - नितिन नबीन के पास 3 साल और 3 बड़े सवाल
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( Image Source:  ANI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 14 Jan 2026 4:50 PM IST

भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नेतृत्व परिवर्तन का मंच पूरी तरह तैयार है. पार्टी के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के अगले हफ्ते पार्टी अध्यक्ष बनने की औपचारिक घोषणा लगभग तय मानी जा रही है. लेकिन यह पद जितना प्रतिष्ठित है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी. 45 वर्षीय नितिन नबीन जब BJP की कमान संभालेंगे, तो उनके सामने ऐसे कई बड़े राजनीतिक, सामाजिक और संगठनात्मक मुद्दे होंगे, जो आने वाले वर्षों में देश की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं.

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, BJP 18 जनवरी को नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की अधिसूचना जारी कर सकती है. इसके अगले दिन यानी 19 जनवरी को नितिन नबीन अपना नामांकन दाखिल करेंगे. चूंकि उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार के उतरने की संभावना नहीं है, ऐसे में उनका निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है. 20 जनवरी को वे औपचारिक रूप से BJP के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल सकते हैं. खास बात यह है कि वे पार्टी के अब तक के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे और जे.पी. नड्डा की जगह लेंगे.

कौन हैं नितिन नबीन और क्यों खास है उनकी ताजपोशी?

नितिन नबीन को संगठन में एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जो जमीन से जुड़े हैं और संगठनात्मक कामकाज की अच्छी समझ रखते हैं. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि बदलते राजनीतिक माहौल में BJP को ऐसे ही नेतृत्व की जरूरत है, जो न सिर्फ चुनाव जीतने की रणनीति बनाए, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी पार्टी को तैयार करे. हालांकि, नितिन नबीन के लिए यह जिम्मेदारी आसान नहीं होगी. उनके तीन साल के कार्यकाल में BJP को कई बड़े और संवेदनशील मुद्दों से निपटना पड़ेगा, जिनका असर सिर्फ पार्टी पर नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति पर पड़ेगा.

महिला आरक्षण: बड़ा फैसला, बड़ी चुनौती

नितिन नबीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी. संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास किया था, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है. लेकिन यह आरक्षण सीधे लागू नहीं होगा. कानून के मुताबिक, यह आरक्षण उस जनगणना के बाद लागू किया जाएगा, जिसके आधार पर परिसीमन (डिलिमिटेशन) किया जाएगा. सरकार 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन कराने की तैयारी में है और लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने का है. इसका मतलब साफ है कि नितिन नबीन को BJP को ऐसे नए राजनीतिक हालात के लिए तैयार करना होगा, जहां टिकट वितरण, संगठनात्मक ढांचा और चुनावी रणनीति - सब कुछ बदला हुआ होगा.

परिसीमन: उत्तर बनाम दक्षिण की राजनीति

परिसीमन का मुद्दा पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है. दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होने से लोकसभा में उत्तर भारत की सीटें बढ़ेंगी और दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक वजन कम हो जाएगा. इस मुद्दे पर पहले से ही असंतोष है और आने वाले समय में यह और तेज हो सकता है. नितिन नबीन को न सिर्फ इस असंतोष को समझना होगा, बल्कि पार्टी के भीतर और बाहर संतुलन बनाकर चलना होगा. BJP के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, “परिसीमन सिर्फ सीटों का गणित नहीं है, यह संघीय ढांचे और राजनीतिक संतुलन से जुड़ा मामला है.”

वन नेशन, वन इलेक्शन: खेल बदलने वाला कदम?

मोदी सरकार की ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (ONOE) पहल भी नितिन नबीन के कार्यकाल की एक बड़ी चुनौती होगी. दिसंबर 2024 में लोकसभा में संविधान (129वां संशोधन) विधेयक पेश किया गया, जिसे अब संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा गया है. हालांकि, BJP नेताओं का मानना है कि अगर यह योजना लागू होती है, तो देश की पूरी चुनावी राजनीति बदल जाएगी. एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “अभी हमारे पास लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होते हैं, जिससे रणनीति सुधारने का मौका मिलता है. लेकिन अगर सारे चुनाव एक साथ होंगे, तो यह सुविधा खत्म हो जाएगी.” भले ही एक साथ चुनाव 2034 से पहले लागू होने की संभावना कम हो, लेकिन पार्टी को अभी से इसकी तैयारी करनी होगी.

2029 की तैयारी: असली परीक्षा

पार्टी नेताओं के मुताबिक, नितिन नबीन की असली परीक्षा 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी में होगी. यह चुनाव महिला आरक्षण, परिसीमन और संभावित नए चुनावी ढांचे की पृष्ठभूमि में होगा. एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, “नितिन नबीन को सिर्फ मौजूदा चुनाव नहीं देखना है, बल्कि पार्टी को नए दौर के लिए तैयार करना है. यह पूरी तरह बदला हुआ राजनीतिक परिदृश्य होगा.”

दक्षिण भारत: BJP की अधूरी कहानी

नितिन नबीन के सामने एक और बड़ी चुनौती होगी दक्षिण भारत में पार्टी का विस्तार. अभी तक BJP को कर्नाटक के अलावा दक्षिण के अन्य राज्यों में बड़ी सफलता नहीं मिली है. तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे राज्यों में BJP को अभी भी सीमित समर्थन मिलता है. पार्टी के एक नेता ने कहा, “कोई भी BJP अध्यक्ष दक्षिण में बड़ी छाप नहीं छोड़ पाया है. अगर पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होना है, तो दक्षिण में अपनी मौजूदगी बढ़ानी ही होगी.”

जाति जनगणना: नए समीकरण

आने वाली जाति जनगणना भी BJP के लिए नए राजनीतिक समीकरण लेकर आ सकती है. इसके आंकड़े समाज और राजनीति दोनों को प्रभावित करेंगे. पार्टी को यह समझना होगा कि इन आंकड़ों का असर वोट बैंक और सामाजिक संतुलन पर कैसे पड़ेगा.

वैश्विक हालात और विदेशी राजनीति

BJP के कुछ नेताओं का मानना है कि नितिन नबीन को सिर्फ घरेलू राजनीति ही नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक हालात पर भी नजर रखनी होगी. हाल ही में BJP और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के बीच संपर्क फिर शुरू हुआ है, जो 2009 के बाद पहली बार हुआ है. इसके अलावा, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर नए टैरिफ की घोषणा जैसे मुद्दे भी भारत और सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं. चूंकि BJP सत्तारूढ़ पार्टी है, इसलिए इन वैश्विक घटनाओं का असर पार्टी की रणनीति पर भी पड़ेगा.

युवा नेतृत्व तैयार करना बड़ी जिम्मेदारी

नितिन नवीन के सामने सबसे अहम जिम्मेदारी होगी पार्टी के लिए नए और युवा नेताओं की एक मजबूत टीम तैयार करना. आने वाले वर्षों में राजनीति का चेहरा तेजी से बदलने वाला है और BJP को भी उसी रफ्तार से खुद को ढालना होगा. एक पार्टी नेता के शब्दों में, “यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं है, बल्कि पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत है.”

नितिन नवीन का BJP अध्यक्ष बनना सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह आने वाले दशक की राजनीति की तैयारी का संकेत है. महिला आरक्षण, परिसीमन, वन नेशन वन इलेक्शन, दक्षिण भारत में विस्तार, जाति जनगणना और वैश्विक चुनौतियां - इन सबके बीच नितिन नवीन को संतुलन, रणनीति और नेतृत्व कौशल का पूरा प्रदर्शन करना होगा. आने वाले तीन साल यह तय करेंगे कि BJP 2029 की राजनीति में किस रूप में सामने आती है - और इसमें नितिन नवीन की भूमिका निर्णायक होगी.

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