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‘Farder-Mader...' अंग्रेजी में कान, आंख और नाक तक नहीं लिख पाए टीचर साहब, Video Viral होते ही हुए सस्पेंड

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले के एक टीचर का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कान, आंख और नाक की अंग्रेजी में गलत स्पेलिंग लिखते हुए नजर आ रहे हैं. अब इस मामले में शिक्षा विभाग ने टीचर को सस्पेंड कर दिया है.

‘Farder-Mader... अंग्रेजी में कान, आंख और नाक तक नहीं लिख पाए टीचर साहब, Video Viral होते ही हुए सस्पेंड
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( Image Source:  instagram-@statemirrornews )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 17 Nov 2025 3:06 PM IST

स्कूलों में बच्चों की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी जिन शिक्षकों पर होती है, कभी-कभी वही सबसे कमजोर कड़ी साबित हो जाते हैं. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले के एक प्राइमरी स्कूल से ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक असिस्टेंट टीचर बच्चों को अंग्रेजी के बेहद बुनियादी शब्द भी गलत लिखकर सिखा रहे थे.

वायरल वीडियो में टीचर साहब ‘Father-Mother’ को ‘Fader-Mader’ लिखते दिखाई दिए और कान, आंख, नाक जैसे आसान शब्दों की स्पेलिंग भी सही नहीं बता पाए. वीडियो सामने आते ही लोग भौंचक्के रह गए कि आखिर जिस पर बच्चों का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी हो, वह खुद बुनियादी ज्ञान से इतना दूर कैसे हो सकता है. वीडियो वायरल होने के बाद टीचर को सस्पेंड कर दिया गया है.

अंग्रेजी में आंख-नाक नहीं लिख पाए टीचर

इस वीडियो में टीचर ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को अंग्रेजी में बॉडी पार्ट्स की स्पेलिंग सिखाते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह आंख, कान और नाक को अंग्रेजी के शब्दों में सही से नहीं लिख पाएं. सिर्फ कान, नाक ही नहीं वह माता-पिता और संडे-मंडे की स्पेलिंग भी गलत लिख रहे थे. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद बवाल मच गया लोगों ने सवाल उठाए कि अगर टीचर ही गलत सिखाएंगे तो बच्चों के ज्ञान का आधार कैसा बनेगा?

शिक्षक को किया सस्पेंड

शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की. जिला शिक्षा अधिकारी एम.आर. यादव ने पूरी रिपोर्ट मांगी और क्लस्टर कोऑर्डिनेटर को स्कूल भेजा. जांच में यह साफ हो गया कि वीडियो में जो गलतियां दिख रही थीं, वे बिल्कुल सही थीं. इसी आधार पर असिस्टेंट टीचर प्रवीण टोप्पो को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया. इस प्राइमरी स्कूल में कुल 42 बच्चे और सिर्फ दो शिक्षक हैं. अब एक शिक्षक के हटने के बाद पूरी पढ़ाई ठप जैसी हो गई है, क्योंकि बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त स्टाफ ही नहीं बचा.

शिक्षा की गुणवत्ता पर किसकी जिम्मेदारी

यह घटना कोई पहला मामला नहीं है. पहले भी हिमाचल प्रदेश और राजस्थान में शिक्षकों के गलत स्पेलिंग या भाषा ज्ञान पर कार्रवाई हो चुकी है. लेकिन हर बार कार्रवाई के बावजूद सिस्टम नहीं बदलता. एक गंभीर प्रश्न सबके सामने है, जब शिक्षक ही बेसिक अंग्रेज़ी शब्द नहीं जानते, तो हम बच्चों से कैसी उम्मीद रख सकते हैं? क्या अब वक्त नहीं आ गया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ट्रेनिंग, मॉनिटरिंग और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाए? क्योंकि अगर शिक्षक गलत सिखाएंगे, तो आने वाली पीढ़ी की नींव ही हिल जाएगी

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