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चौथे अटेंप्ट में IAS, अब बक्सर की तेज-तर्रार DM, नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा में मोर्चा संभालने वाली साहिला हीर कौन?

IAS साहिला हीर वर्तमान में बक्स जिले की डीएम हैं. इससे पहले वह प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पद पर काम कर चुकी हैं.

चौथे अटेंप्ट में IAS, अब बक्सर की तेज-तर्रार DM, नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा में मोर्चा संभालने वाली साहिला हीर कौन?
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( Image Source:  X-@NitishKumar )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत3 Mins Read

Updated on: 28 March 2026 1:45 PM IST

चौथे प्रयास में UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर IAS बनने वाली साहिला हीर आज अपनी तेज-तर्रार वर्क स्टाइल के कारण सुर्खियों में हैं. बक्सर की जिलाधिकारी के रूप में वह न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रही हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करके लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं.

हाल ही में सीएम नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें और चर्चा में ला दिया. डीएम बनने से पहले उन्होंने प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में काम किया.

कौन हैं आईएएस साहिला हीर?

साहिला हीर का जन्म पंजाब के जालंधर में हुआ था. वह वर्तमान में बक्सर जिले की डीएम हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई MGN स्कूल से हुई, जिसके बाद उन्होंने पटियाला के थापर इंस्टीट्यूट से हायर एजुकेशन ली. सिविल सेवा में जाने का सपना उन्होंने शुरू से देखा और इसके लिए कड़ी मेहनत की.

चौथे अटेंप्ट में मिली सक्सेस

साहिला हीर ने रोजाना 12 से 14 घंटे तक पढ़ाई कर अपने लक्ष्य को हासिल किया. हालांकि, उन्हें तुरंत सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चौथे अटेंप्ट में UPSC एग्जाम क्लियर किया और 2018 में ऑल इंडिया रैंक 572 हासिल कर IAS अधिकारी बनीं.

किन-किन पदों पर रहीं साहिला हीर?

IAS बनने के बाद साहिला हीर को बिहार कैडर मिला. उनकी प्रशासनिक यात्रा कई अहम जिम्मेदारियों से भरी रही है:

  • SDM के रूप में नरकटियागंज में पहली पोस्टिंग हुई.
  • इसके बाद सहरसा और पूर्णिया में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली.
  • शिक्षा विभाग में Director of Primary Education के पद पर अपॉइंट किया गया.
  • वर्तमान में बक्सर की जिलाधिकारी (DM) हैं. हर पद पर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई और सिस्टम में सुधार की दिशा में काम किया.

क्या हैं साहिला हीर की अचीवमेंट्स?

साहिला हीर के कार्यकाल में कई अहम सुधार देखने को मिले, खासकर शिक्षा विभाग में:

  • शिक्षकों के ट्रांसफर में ट्रांसपेरेंसी सिस्टम लागू किया.
  • लंबे समय से रुकी प्रमोशन प्रोसेस को आगे बढ़ाया.
  • शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया.
  • मिड-डे मील योजना में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाई.

इन सुधारों की वजह से शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बढ़ा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं ज्यादा साफ और प्रभावी बनीं. उनके काम की राज्यभर में सराहना हुई और कई लोगों ने उन्हें फिर से शिक्षा विभाग में लाने की मांग भी की.

सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

वे MNREGA, PM-Kisan, आवास योजना और पेंशन जैसी योजनाओं को सही तरीके से लागू कराने पर खास ध्यान देती हैं. इसके साथ ही चुनाव तैयारियों और जन शिकायतों के निपटारे में भी उनकी सक्रिय भूमिका रहती है.


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