क्या ‘रॉबिनहुड’ को गिरफ्तार नहीं कर सकती पुलिस? पप्पू यादव के बहाने समझिए सांसदों को मिले विशेषाधिकार का पूरा गणित
क्या सांसद होने के बाद कोई ‘कानून से ऊपर’ हो जाता है? पप्पू यादव प्रकरण के बहाने जानिए संसद सदस्यों को मिले संवैधानिक विशेषाधिकार, गिरफ्तारी के नियम, पुलिस सीमाएं और आम नागरिक से अलग उनका दर्जा, सरल भाषा में ऐसे समझें.
एमपी पप्पू यादव को बिहार में दबंग और रॉबिनहुड स्टाइल वाले सांसद जनप्रतिनिधि की छवि है? लेकिन बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव को एक क्रिमिनल केस में बीती रात पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. उनकी गिरफ्तारी के बाद इस सवाल को लेकर चर्चा चरम पर है कि क्या वाकई कोई सांसद ‘रॉबिनहुड’ बनकर कानून से ऊपर हो सकता है? क्या पुलिस चाहकर भी उसे गिरफ्तार नहीं कर सकती? या फिर यह सिर्फ राजनीतिक नैरेटिव का खेल है? अगर ऐसा नहीं है तो गैर जमानती क्रिमिनल केस में पिछले 31 साल के दौरान गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ?
राजीव रंजन उर्फ पप्पू यादव को लेकर उठे सवालों ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है. क्या सांसदों को ऐसे विशेषाधिकार मिले हैं जो उन्हें आम नागरिक से अलग, ज्यादा सुरक्षित या ‘अस्पृश्य’ बना देते हैं? संविधान ने सांसदों को ताकत दी है, लेकिन क्या वह ताकत गिरफ्तारी से बचाव की ढाल है? या फिर यह आधी-अधूरी जानकारी का भ्रम?
सच यह है कि सांसद ‘अलहदा शख्स’ नहीं होते हैं, लेकिन उन्हें कुछ संवैधानिक सुरक्षा जरूर मिली है, जिसका दायरा, सीमा और शर्तें हैं. आइए, पूरे गणित को खोलते हैं, ताकि ‘विशेषाधिकार’ और ‘विशेष छूट’ के फर्क को साफ-साफ समझा जा सके कि सांसद को कानूनन कब गिरफ्तार नहीं किया जा सकता?
भारत के लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को पुलिस कार्रवाई से विशेषाधिकार हासिल है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है. जाने इस बारे में क्या है कानूनी स्थिति?
1. हाल के विवादों में (समय-समय पर) पप्पू यादव पर अलग-अलग मामलों में पुलिस कार्रवाई हुई है. जैसे सरकारी आदेश की अवहेलना, धारा 144 का उल्लंघन, भड़काऊ बयान देने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप और किसी विरोध प्रदर्शन या धरने में कथित नियम उल्लंघन के मामलों में. अक्सर ऐसी कार्रवाइयां प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी या शांति भंग की आशंका के आधार पर होती हैं.
2. बहुत लोगों को लगता है कि सांसद (MP) को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है.
3. सांसद को आपराधिक यानी क्रिमिनल मामले में गिरफ्तार किया जा सकता है. अगर किसी एमपी के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध (cognizable offence) है, जैसे हिंसा, भ्रष्टाचार, दंगा, हत्या, रेप आदि तो पुलिस गिरफ्तार कर सकती है.
4. ये बात भी सही है कि सांसदों को कुछ संवैधानिक सुरक्षा होती ली हुई है. देश के संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.
5. संसद सत्र के दौरान, सांसद को सिविल केस (जैसे कर्ज वसूली) में सत्र के दौरान और सत्र से 40 दिन पहले/बाद तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, लेकिन क्रिमिनल केस में गिरफ्तारी संभव है.
6. क्या पुलिस के लिए गिरफ्तारी की सूचना देना अनिवार्य है? अगर किसी सांसद को गिरफ्तार किया जाता है, तो संबंधित सदन (लोकसभा/राज्यसभा) के अध्यक्ष/सभापति को तुरंत सूचना देना जरूरी है. संसद परिसर के भीतर गिरफ्तार करने के लिए स्पीकर/चेयरमैन की इजाजत जरूरी है.
7. सांसद “कानून से ऊपर” नहीं होता. आपराधिक मामलों में एमपी की भी गिरफ्तारी संभव है. सिर्फ सिविल मामलों में सीमित सुरक्षा मिलती है.
पप्पू यादव सुर्खियों में क्यों?
दरअसल, पटना एसपी सिटी भानु प्रताप सिंह के अनुसार यह गिरफ्तारी गर्दानीबाग पुलिस स्टेशन में पुराने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के तहत दर्ज मामले से संबंधित है. आरोपों में धारा 419 (पहचान बदलकर धोखाधड़ी), 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 448 (घर में जबरन घुसपैठ), 506 (आपराधिक धमकी) और 120 बी (आपराधिक साजिश) शामिल हैं. बीती रात पटना पुलिस 31 साल पुराने एक मामले में MP पप्पू यादव को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर पहुंची, जब कोर्ट ने सुनवाई में बार-बार गैरहाजिर रहने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया.
इस मामले में शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल ने आरोप लगाया कि उनका घर धोखे से किराए पर लिया गया और बाद में उसे सांसद के ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल किया गया, जिसके बारे में उनका दावा है कि एग्रीमेंट के समय यह बात छिपाई गई थी.
पप्पू यादव के लगातार पेश न होने के कारण, कोर्ट ने पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. बाद में कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपियों के घरों पर नोटिस चिपकाए जाएं. इन कदमों के बावजूद कोर्ट में पेश न होने पर, कोर्ट ने अब पप्पू यादव और अन्य आरोपियों की प्रॉपर्टी अटैच करने का अंतिम आदेश दिया है.





