English Vinglish: विधानसभा में अंग्रेजी पढ़ने में फेल हुए बिहार के मंत्री जी, जानिए आदरणीय प्रमोद कुमार जी का पूरा सिजरा
बिहार विधानसभा के बजट सत्र में स्वास्थ्य विभाग के सवालों पर जवाब देने आए प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी अंग्रेजी शब्दों में उलझते नजर आए. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्ष मौज लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी तो वहीं यूजर्स ने भी कहा कि विधानसभा में अंग्रेजी पढ़ने में फेल हुए बिहार के मंत्री जी.
Bihar Minister Pramod Kumar
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के चौथे दिन सदन का माहौल उस वक्त अचानक बदल गया, जब स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सवालों का जवाब देने आए प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी खुद सवालों में उलझते नजर आए. मुद्दा गंभीर था, लेकिन जवाबों की विसंगति ने पूरे सदन को हंसी और हैरानी में डाल दिया. जिसके बाद उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो को लेकर यूजर्स कह रहे हैं कि अग्रेजी पढ़ने में फेल हुए मंत्री जी. आइए इस खबर में मंत्री प्रमोद कुमार के बारे में सब कुछ जानते हैं.
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अहम सवालों पर सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी मंत्री पर थी, मगर जिस तरह जवाब देने में वो अटकते रहे, उससे सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक हर कोई असहज दिखा. स्थिति यह रही कि स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा.
स्वास्थ्य विभाग के सवालों पर मंत्री क्यों उलझते नजर आए?
जब सदन में स्वास्थ्य सेवाओं, बजट और योजनाओं को लेकर सवाल पूछे गए, तो मंत्री प्रमोद कुमार कई बार यह समझ ही नहीं पाए कि किस प्रश्न का उत्तर किस संदर्भ में देना है. उनके जवाब अक्सर किसी दूसरे क्षेत्र या किसी और विभाग से जुड़े प्रतीत हो रहे थे, जिससे भ्रम और बढ़ गया.
ढाका का सवाल और बेलागंज का जवाब, सदन में क्या हुआ?
सबसे रोचक स्थिति तब बनी जब एक विधायक ने ढाका विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा प्रश्न पूछा. इसके उत्तर में मंत्री प्रमोद कुमार बेलागंज क्षेत्र का विवरण देने लगे. इस गलती पर सदन ठहाकों से गूंज उठा. हालात ऐसे बने कि विपक्षी विधायक ने टिप्पणी कर दी. इनको जवाब कैसे दिया जाता है उसका क्रैश कोर्स करवा दीजिए. इस एक पंक्ति ने पूरे सदन में चर्चा का माहौल बना दिया.
अंग्रेज़ी शब्दों में क्यों फंस गए मंत्री?
इससे पहले भी एक सवाल के दौरान जब स्वास्थ्य विभाग के मूल मंत्री मंगल पांडेय की जगह प्रभारी मंत्री प्रमोद कुमार जवाब देने खड़े हुए, तो वे लगातार अंग्रेज़ी शब्दों में उलझते चले गए. अंग्रेजी में जिस तरह उन्होंने जवाब देने की नाकाम कोशिश की, कि खुद सदस्यों को भी समझने में परेशानी हुई.
‘Expenditure’ शब्द ने कैसे बिगाड़ दी स्थिति?
सदन में अंग्रेज़ी के एक शब्द एक्सपेंडिचर (Expenditure) ने मंत्री को पूरी तरह उलझा दिया. मंत्री की असहजता देखकर सत्ता पक्ष हैरान था और विपक्ष को मुस्कुराने का मौका मिल गया. मंत्री की शैक्षणिक बैकग्राउंड को देखते हुए यह स्थिति और भी चौंकाने वाली रही, क्योंकि विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार वे एमए और पीएचडी की डिग्री ले रखी है.
मंत्री ने सदन में क्या कहा और कहां अटके?
मंत्री के शब्द हूबहू इस प्रकार रहे- 'इसमें गवर्नमेंट हेल्थ एक्सपर्ट..एक्सप्लेंशन.. अह.. ह.. ह.. 18 हजार एक्स.. एक्स...' इसके बाद मंत्री ने अपने नेहरू जैकेट की जेब टटोली, चश्मा खोजा जो पहले से आंखों पर था, फिर माइक पकड़कर बोले- 'एक्स.. ओह.. 8470 करोड़ रुपए दर्शाया गया है….' उन्होंने आगे खर्च और दवा मद से जुड़े आंकड़े गिनाए और कहा कि बिहार में स्वास्थ्य बजट में कई गुना वृद्धि हुई है.
GSDP और इंडोस्कोपी पर भी क्यों लड़खड़ाए?
मंत्री ने कहा कि नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2023 के प्रकाशित आंकड़ों में यह उल्लेख है कि बिहार का गवर्नमेंट हेल्थ एक्स.. एक्स.. एक्सपेंडिचर GDSP का 1.5 प्रकाशित है…' यहां वे GSDP को GDSP बोलते नजर आए. इसके बाद इंडोस्कोपी, कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी जैसे शब्दों पर भी वे बार-बार अटकते रहे.
प्रमोद कुमार कौन हैं?
डॉ. प्रमोद कुमार ने 1986 में ABVP से राजनीति की शुरुआत की थी. वे साधारण परिवार से आते हैं. उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है- अखबार और तेल बेचकर पढ़ाई करना, झोपड़ी में रहना और फिर राजनीति में ऊपर तक पहुंचना. उनकी पढ़ाई लिखाई के बारे में बात करे तो उन्होंने बिहार के मगध यूनिवर्सिटी के M.S कॉलेज से 1995 में ग्रेजूएशन किया है. इसके बाद उन्होंने PHD भी पूरी की.
उनकी संपत्ति और निजी जीवन में क्या है खास?
2023 के शपथ पत्र के अनुसार मंत्री की चल संपत्ति: 66.31 लाख रुपए, पत्नी की चल संपत्ति: 17.75 लाख रुपए, स्कॉर्पियो कार: 16.11 लाख रुपए (जिस पर 10 लाख से अधिक का लोन है)
किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति नहीं
भाजपा ने प्रमोद कुमार को मंत्री क्यों बनाया? जानिए 3 बड़े कारण
- प्रमोद कुमार चंद्रवंशी समाज से आते हैं, जो EBC वर्ग में शामिल है. प्रेम कुमार के मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद यह कोटा खाली हुआ और प्रमोद कुमार को मौका मिला.
- प्रमोद कुमार RSS बैकग्राउंड से आते हैं. संघ उन्हें भविष्य के EBC चेहरे के रूप में देखता है, जिससे पार्टी के भीतर उनका विरोध नहीं हुआ.
- भाजपा बिहार में नई नेतृत्व पीढ़ी तैयार करना चाहती है. प्रमोद कुमार उसी रणनीति का हिस्सा हैं-सामान्य कार्यकर्ता से मंत्री तक का सफर पार्टी की 'ग्रासरूट इमेज' को मजबूत करता है.





