Zubeen Garg death case: सिंगापुर कोर्ट की सुनवाई पर CM हिमंता की चुप्पी, पत्नी गरिमा ने FB पोस्ट में कहा - ‘सच सामने आना ही चाहिए’
असम के मशहूर गायक–संगीतकार जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है. सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में हालिया सुनवाई के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत से जुड़े मामलों में नेताओं को दूरी बनाए रखनी चाहिए. दूसरी ओर, जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने फेसबुक पोस्ट के जरिए सच सामने लाने की मांग दोहराई है.
असम के सांस्कृतिक प्रतीक और मशहूर गायक-संगीतकार जुबिन गर्ग की रहस्यमयी मौत को लेकर चल रही जांच एक बार फिर सुर्खियों में है. सिंगापुर की कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है. वहीं, जुबिन गर्ग की पत्नी गरिमा सैकिया गर्ग ने सोशल मीडिया पर एक भावुक लेकिन तथ्यपूर्ण पोस्ट के जरिए पूरी सच्चाई सामने लाने की मांग दोहराई है.
सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में हुई सुनवाई पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “मैंने भी इस बारे में अखबारों में ही पढ़ा है. इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि असम के लोग मेरे शब्दों का अलग-अलग अर्थ निकाल सकते हैं. अदालत से जुड़े मामलों में नेताओं को दूर रहना चाहिए.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि सिंगापुर पुलिस ने अपनी प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट दी है और वहां की न्यायिक प्रक्रिया अलग है, जबकि भारत की प्रक्रिया अलग तरीके से चल रही है.
सिंगापुर पुलिस का दावा और भारत में अलग जांच
सिंगापुर पुलिस ने 14 जनवरी 2026 को कोरोनर कोर्ट में कहा कि जुबिन गर्ग घटना के समय अत्यधिक नशे में थे और उन्होंने लाइफ जैकेट पहनने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद लाजरस आइलैंड के पास समुद्र में डूबने से उनकी मौत हुई. पुलिस ने फिलहाल किसी तरह की साजिश या फाउल प्ले की आशंका से इनकार किया है. हालांकि, भारत में तस्वीर बिल्कुल अलग है. असम पुलिस की CID द्वारा गठित SIT इस मामले की समानांतर जांच कर रही है. अब तक 7 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 4 पर हत्या, 1 पर गैर-इरादतन हत्या और 2 पर आपराधिक साजिश व विश्वासघात के आरोप तय किए गए हैं. पिछले महीने इस संबंध में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है.
पत्नी गरिमा का भावुक पोस्ट: ‘वीडियो देखकर शक गहराया’
गरिमा सैकिया गर्ग ने फेसबुक पर लिखे लंबे नोट में कहा कि जब यॉट से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए, तभी परिवार को एहसास हुआ कि जुबीन की मौत सामान्य नहीं हो सकती. इसके बाद तुरंत FIR दर्ज कर कानूनी रास्ता अपनाया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंगापुर पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया गया और जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गईं.
कोर्ट में उठाए गए अहम सवाल
गरिमा ने बताया कि 14 जनवरी 2026 को जुबिन के चाचा मनोज कुमार बोरठाकुर ने सिंगापुर की कोरोनर कोर्ट में विस्तृत बयान दिया, जिसमें कई अहम सवाल दर्ज कराए गए, जैसे - 19 सितंबर की आउटिंग की योजना कैसे बनी, उस समय जुबिन की शारीरिक और मानसिक स्थिति कैसी थी, यॉट पर सुरक्षा इंतजाम, समुद्र में उतरने की परिस्थितियां, संकट के समय आसपास मौजूद लोगों की प्रतिक्रिया, मेडिकल मदद की टाइमिंग और पर्याप्तता और ‘नो फाउल प्ले’ निष्कर्ष का आधार. गरिमा ने कहा, “जब किसी की जिंदगी अचानक और संदिग्ध हालात में खत्म होती है, तो सवाल उठाना परिवार का हक और कर्तव्य दोनों होता है.”
सरकार से अपील: भारत-सिंगापुर दोनों स्तरों पर निगरानी
गरिमा गर्ग ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि सिंगापुर की न्यायिक प्रक्रिया पर उच्च स्तर पर निगरानी रखी जाए और सभी कूटनीतिक व कानूनी कदम उठाए जाएं, ताकि कोई तथ्य छिपा न रह जाए. साथ ही उन्होंने भारत में चार्जशीट के आधार पर तेज़ और प्रभावी ट्रायल की भी मांग की.
‘सिर्फ सच चाहिए’
अपने पोस्ट के अंत में गरिमा ने लिखा, “हम सिर्फ एक ही चीज चाहते हैं - पूरी सच्चाई. हर कदम, हर पल, हर फैसले की पारदर्शी जांच हो और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले. इसके लिए हम हर कानूनी रास्ता पूरी निष्ठा और धैर्य के साथ अपनाते रहेंगे.” जुबिन गर्ग की मौत अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि दो देशों की कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा एक संवेदनशील मामला बन चुकी है, जिस पर पूरे असम और देश की नजरें टिकी हुई हैं.





