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‘दबाव जरूरी है, तभी छोड़ेंगे राज्य’, मियां समुदाय पर फिर भड़के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा

एक कार्यक्रम में बातचीत करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा सरमाने साफ शब्दों में कहा कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा.

Himanta Biswa Sarma statement Miya community
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Himanta Biswa Sarma

( Image Source:  ANI )
विशाल पुंडीर
Edited By: विशाल पुंडीर

Published on: 2 Feb 2026 1:12 PM

असम की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक नए बयान ने राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है. ‘मियां’ समुदाय को लेकर दिए गए उनके बयान को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया है.

एक सरकारी कार्यक्रम से इतर बातचीत में मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक वह सत्ता में हैं, तब तक ‘मियां’ समुदाय के लोगों को असम में मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा. उनके इस बयान को चुनावी राजनीति और राज्य की जनसांख्यिकी से जोड़कर देखा जा रहा है.

गोलपारा में क्या बोले मुख्यमंत्री?

गोलपारा में एक कार्यक्रम के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा "अगर मैं असम में रहा, तो उन्हें (मियां समुदाय के लोगों को) परेशानी का सामना करना पड़ेगा. वह यहां शांति से नहीं रह सकते. अगर हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे, तभी वह राज्य छोड़ेंगे." उन्होंने दावा किया कि ‘मियां’ समुदाय के लोग अवैध बांग्लादेशी हैं और इसलिए उन्हें असम में काम करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

‘दबाव जरूरी है, तभी छोड़ेंगे राज्य’

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव वाले राज्य को छोड़ने के लिए ‘मियां’ समुदाय पर लगातार दबाव और सख्ती बनाए रखना जरूरी है. उनके मुताबिक, जब तक उन्हें कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा, तब तक वे असम नहीं छोड़ेंगे.

रिक्शा चालक वाले बयान का जिक्र

हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि अगर ‘मियां’ समुदाय का कोई रिक्शा चालक पांच रुपये किराया मांगता है, तो उसे चार रुपये ही देने चाहिए। इस बयान को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है. उन्होंने इसे उनके “हित” में बताया और कहा कि कानून के मुताबिक उन्हें राज्य में काम करने की अनुमति नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा "अगर वह मेरा उनके हित में बोलना स्वीकार नहीं करते, तो फिर मुझे उनके खिलाफ काम करना पड़ेगा."

पहले भी लगाते रहे हैं गंभीर आरोप

यह पहली बार नहीं है जब असम के मुख्यमंत्री ने बांग्ला भाषी मुसलमानों पर इस तरह के बयान दिए हों. इससे पहले भी वह कई बार दावा कर चुके हैं कि अगली जनगणना में असम की कुल जनसंख्या में बांग्लादेशी मुसलमानों की हिस्सेदारी 40 फीसदी तक पहुंच सकती है. हिमंता बिस्वा सरमा ‘मियां’ समुदाय पर सत्राओं (वैष्णव परंपरा के धार्मिक केंद्रों) की जमीन पर कब्जा करने, लव जिहाद और फर्टिलाइजर जिहाद में शामिल होने जैसे आरोप भी लगाते रहे हैं.

विपक्ष का तीखा हमला

मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने उनके बयान की कड़ी आलोचना की है. विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री संविधान की मूल भावना के खिलाफ बयान दे रहे हैं और समाज में नफरत का बीज बो रहे हैं. कांग्रेस और अन्य दलों का कहना है कि इस तरह की भाषा न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाती है.

असम न्‍यूज
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