Budget 2026: बौद्ध सर्किट से E-बस तक बदलेगी नॉर्थ-ईस्ट की तस्वीर, असम समेत सेवन सिस्टर्स के लिए बजट में क्या-क्या?
Budget 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने असम समेत पूर्वोत्तर राज्यों को बड़ी सौगात दी है. बौद्ध सर्किट, 4000 ई-बस, हाई-स्पीड रेल और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से नॉर्थ-ईस्ट को नया विकास मॉडल मिलेगा.
वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने असम समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत को विकास की मुख्यधारा में लाने का स्पष्ट रोडमैप रखा है. लंबे समय से कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और औद्योगिक निवेश की कमी से जूझ रहे नॉर्थ-ईस्ट के लिए यह बजट उम्मीदों से भरा माना जा रहा है. सरकार का फोकस सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर को एक आधुनिक आर्थिक और सांस्कृतिक हब बनाने की दीर्घकालिक सोच इसमें झलकती है.
‘पूर्वोदय योजना’ के तहत पूर्वोत्तर राज्यों को इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, हरित परिवहन और मेडिकल टूरिज्म से जोड़ा गया है. इस बजट का मकसद क्षेत्रीय असंतुलन को कम करना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और पूर्वोत्तर की रणनीतिक व सांस्कृतिक ताकत को वैश्विक पहचान दिलाना है. असम से लेकर अरुणाचल, त्रिपुरा और मिजोरम तक विकास की यह श्रृंखला पूरे नॉर्थ-ईस्ट की तस्वीर बदलने का संकेत देती है.
बजट 2026 में असम समेत पूर्वोत्तर को क्या-क्या मिला?
- पूर्वी भारत में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण: पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत को जोड़ने के लिए नए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. इससे असम और आसपास के राज्यों में निवेश बढ़ेगा, मैन्युफैक्चरिंग को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा.
- दुर्गापुर औद्योगिक कॉरिडोर का विकास: दुर्गापुर को एक मजबूत कनेक्टिविटी नोड बनाकर पूर्वोत्तर के लिए इंडस्ट्रियल गेटवे के रूप में विकसित किया जाएगा. इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और कारोबार करना आसान होगा.
- अरुणाचल से त्रिपुरा तक बौद्ध सर्किट: अरुणाचल प्रदेश, असम, सिक्किम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट विकसित किया जाएगा. यह धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत करेगा.
- मठ-मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: पूर्वोत्तर के ऐतिहासिक मठों, मंदिरों और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं लाई जाएंगी, जिससे धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय पहचान को भी मजबूती मिलेगी.
- 4,000 इलेक्ट्रिक बसों का प्रावधान: पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों में 4,000 ई-बसें चलाई जाएंगी. इससे प्रदूषण कम होगा, सार्वजनिक परिवहन सस्ता होगा और शहरों की कनेक्टिविटी सुधरेगी.
- पांच पर्यटन स्थलों का विकास: पूर्वोदय राज्यों में 5 प्रमुख पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा. होटल, सड़क, एयर कनेक्टिविटी और स्थानीय सुविधाओं के विकास से पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
- वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर: वाराणसी से सिलीगुड़ी के बीच हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिससे उत्तर भारत और पूर्वोत्तर के बीच यात्रा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगी.
- मेडिकल टूरिज्म के लिए रीजनल हब: देश में 5 रीजनल मेडिकल हब स्थापित किए जाएंगे, जिनका लाभ पूर्वोत्तर को भी मिलेगा. इससे असम और आसपास के राज्यों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा.
- कृषि और बागवानी को बढ़ावा: पूर्वोत्तर में अगर के पेड़, पर्वतीय इलाकों में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्साहन दिया जाएगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी.
- वित्तीय मजबूती और स्थानीय निकायों को सहायता: 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राज्यों के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को मजबूती मिलेगी और विकास योजनाएं जमीन पर उतरेंगी.
कुल मिलाकर, बजट 2026 में असम समेत पूरा पूर्वोत्तर भारत इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, हरित परिवहन और स्वास्थ्य के चार मजबूत स्तंभों पर आगे बढ़ता नजर आता है. यह बजट नॉर्थ-ईस्ट को सिर्फ जोड़ने का नहीं, बल्कि उसे देश की विकास गाथा का केंद्र बनाने की कोशिश है.





