पिता करते दिहाड़ी, मां मिठाई की दुकान पर सफाई कर्मचारी... कौन हैं राजा मुथुपांडी, जिन्होंने CG 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के नाम एक और पदक हो गया है. पुरुषों की 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में राजा मुथुपांडी ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया है.
who is Raja Muthupandi
Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है, जहां बीते दिन मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा तो वहीं सोमवार को पुरुषों की 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ी राजा मुथुपांडी ने दमदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया. उन्होंने कुल 286 किलोग्राम वजन उठाकर भारत के पदकों की संख्या में एक और महत्वपूर्ण इजाफा किया.
राजा मुथुपांडी की यह उपलब्धि केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष, कठिन परिश्रम और कभी हार न मानने वाले जज्बे की कहानी भी बयां करती है. एक समय गंभीर चोटों और आर्थिक परेशानियों के कारण उनका करियर खत्म होने की कगार पर पहुंच गया था, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए देश के शीर्ष वेटलिफ्टर्स में अपनी जगह बनाई.
कैसा रहा राजा का प्रदर्शन?
ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की 65 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में राजा मुथुपांडी ने स्नैच में 126 किलोग्राम वजन उठाया. इसके बाद क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 160 किलोग्राम का सफल प्रयास किया. दोनों प्रयासों को मिलाकर उनका कुल वजन 286 किलोग्राम रहा, जिसके दम पर उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया. इस मुकाबले का गोल्ड मेडल मलेशिया के अज़नील बिदिन ने जीता. उन्होंने कुल 299 किलोग्राम वजन उठाकर नया कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज किया.
अब तक भारत के कितने वेटलिफ्टिंग मेडल?
राजा मुथुपांडी का सिल्वर मेडल भारत के लिए उस दिन का तीसरा वेटलिफ्टिंग पदक रहा. इससे पहले ऋषिकांत सिंह चनंबम ने सिल्वर मेडल हासिल किया था, जबकि मीराबाई चानू ने ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीतकर देश का गौरव बढ़ाया. इन शानदार प्रदर्शनों के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के कुल पदकों की संख्या चार हो गई है, जिसमें एक गोल्ड, दो सिल्वर और एक ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं.
कौन हैं राजा मुथुपांडी?
राजा मुथुपांडी का जन्म 12 जनवरी 2000 को तमिलनाडु के थूथुकुडी (तूतीकोरिन) जिले के कोविलपट्टी शहर में हुआ था. उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है. उनके पिता माचिस फैक्ट्री में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं, जबकि उनकी मां स्थानीय मिठाई की दुकान में सफाई कर्मचारी हैं. उनके बड़े भाई ने भी कुछ सालों तक वेटलिफ्टिंग का अभ्यास किया था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उन्हें खेल छोड़कर मजदूरी करनी पड़ी.
आज राजा चेन्नई में भारतीय रेलवे के विद्युत विभाग में कार्यरत हैं. इस नौकरी ने उन्हें आर्थिक स्थिरता दी, जिससे वह अपने खेल पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर सके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना साकार कर पाए.
चोटों के बावजूद नहीं रुके राजा
राजा मुथुपांडी का खेल सफर आसान नहीं रहा. एक समय उन्हें ऐसी गंभीर चोट लगी थी, जिससे उनका करियर पूरी तरह समाप्त हो सकता था. हालांकि, कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के दम पर शानदार वापसी की. साल 2019 से 2025 के बीच उन्हें कोहनी और घुटने की तीन बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा. लगातार चोटों और आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था, लेकिन दोस्तों और अपने कोच के सहयोग ने उन्हें फिर से खड़ा होने का हौसला दिया.
कौनसा था करियर का बड़ा प्रदर्शन?
राजा मुथुपांडी के करियर का सबसे यादगार दौर साल 2025 रहा. अहमदाबाद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल जीता था. इस प्रतियोगिता में उन्होंने अपने करियर का उस समय का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कुल 296 किलोग्राम वजन उठाया था. इसमें स्नैच में 128 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 168 किलोग्राम शामिल था. इस उपलब्धि ने उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग के उभरते सितारों में शामिल कर दिया.




