हर इंसान का पहला मजहब मां है... धांसू है Batwara 1947 का ट्रेलर, सनी देओल का दिखेगा 'गदर' रूप, 5 डायलॉग रह जाएंगे याद
Batwara 1947 का ट्रेलर आ गया है. फिल्म को 14 अगस्त को रिलीज किया जाएगा. इस ट्रेलर के फोकस में शबाना आजमी हैं जो इस घर की मालिक हैं जिसमे सनी अपने परिवार के साथ जाते हैं.
आमिर खान प्रोडक्शंस की नई फिल्म बटवारा 1947 का ट्रेलर रिलीज हो गया है. ट्रेलर में सनी देओल की दमदार एंट्री है. फिल्म दर्शकों को भारतीय इतिहास के सबसे काले दौर में से एक पर आधारित एक दमदार कहानी की झलक दिखाती है. यह फिल्म बंटवारे के दर्द, बेघर हुए परिवारों के संघर्ष और उन आम लोगों के साहस को दिखाती है जिन्होंने नफरत के बजाय इंसानियत को चुना. फिल्म के 5 ऐसे डायलॉग हैं जो गदर मचा देंगे.
ये वो डायलॉग हैं जो दिमाग पर गहरी छाप छोड़ते हैं. इसमें पहला है सनी देओल का जिसमें वो कहते हैं मंदिर तोड़ना इस्लाम नहीं है. दूसरा है अली जाफर का वो कहते हैं कोई मजहब बुरा नहीं होता है, अच्छा-बुरा आदमी होता है. तीसरा है प्रीति जिंटा का वो कह रही हैं जान के लिए ईमान तो नहीं छोड़ा जाता. चौथा है करण देओल का वो गदर अंदाज में कहते हैं तू मेरे बाप को नहीं जानता, वो न घर देखेंगे, न सरहद, सीधा घुसकर मारेंगे और आखिरी है सनी का जिसमें वो मां को परिभाषित करते हुए कहते हैं हिंदू औरत, वो मां है मां, मां को हिंदू मुसलमान में मत बांटिए, मां अपने आप में एक मजहब है, हर इंसान का पहला मजहब मां है.
ट्रेलर की शुरुआत में सनी देओल प्रीति जिंटा को मिठाई खिलाते हुए देश की आजादी की बधाई दे रहे हैं. इसके बाद वाले शॉट में प्रीति सनी से कहती हैं खुदा क् लिए यहां से निकलिए. फिर रेलवे स्टेशन का एक्शन सीन है जिसमें सनी उपद्रवियों की पिटाई कर रहे हैं. इसके बाद वो एक नये घर में चले जाते हैं और अली जाफर उन्हें बधाई देते हुए कहते हैं नया घर और नया सफर मुबारक हो.
फिर शबाना आजमी की एंट्री होती है. फिर कुछ लोग मंदिर तोड़ने की बात कहते हैं जिस पर विवाद के बाद सनी देओल कहते हैं 'मंदिर तोड़ना इसलाम नहीं है'. इसके बाद करण देओल की एंट्री होती है, वो कहते हैं कि हमें यहां पर खतरा है जिसके जवाब में प्रीति का धासू डायलॉग आता है 'जान के लिए ईमान तो नहीं छोड़ा जाता'.
इसी क्रम में अली जाफर का डायलॉग आता है, कोई मजहब बुरा नहीं होता है, अच्छा बुरा आदमी होता है. फिर आती है करण की बारी जिसमें वो कहते हैं, तू मेरे बाप को नहीं जानता, वो न घर देखेंगे, न सरहद, सीधा घुसकर मारेंगे. इसके बाद के सीन में सनी घोड़े पर भाग रहे हैं. भागते-भागते वो शबाना को बचाने के लिए पहुंचते हैं और कहते हैं हिंदू औरत, वो मां है मां, मां को हिंदू मुसलमान में मत बांटिए, मां अपने आप में एक मजहब है, हर इंसान का पहला मजहब मां है.
फिल्म को राजकुमार संतोषी ने डायरेक्ट किया है जबकि लेखन असगर वजाहत का है. विज़ुअल्स से पता चलता है कि फिल्म न सिर्फ उस समय की राजनीतिक चहल पहल दिखाती है बल्कि इंसानों के बलिदान और भावनाओं को भी दर्शाती है.
यह फिल्म असगर वजाहत के नाटक 'जिस लाहैर ने वेख्या ओ जमैया ही नहीं' के आधार पर बनी है. कहानी एक ऐसे मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है जिन्हें विभाजन के बाद एक घर दिया गया है. इसकी हिंदू मालिक भी यहीं रहती हैं जो है शबाना आजमी. वो मकान खाली करने से मना कर देती है. इसके बाद एक भावनात्मक विवाद शुरू हो जाता है. फिल्म के पहले दो टीजर भी आ चुके हैं. मूवी 14 अगस्त को रिलीज कर दी जाएगी.




