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प्रोफेसर वी. कामकोटी कौन हैं? प्रियंका गांधी के 'गौमूत्र एक्सपर्ट' बयान के बाद क्यों हैं चर्चा में- VIDEO

लोकसभा में प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटी सुर्खियों में आ गए हैं. जानिए SHAKTI माइक्रोप्रोसेसर प्रोजेक्ट, 'गौमूत्र' विवाद, वैज्ञानिक उपलब्धियां और NTA परीक्षा सुधार टास्क फोर्स में उनकी जिम्मेदारी.

प्रोफेसर वी. कामकोटी कौन हैं? प्रियंका गांधी के गौमूत्र एक्सपर्ट बयान के बाद क्यों हैं चर्चा में- VIDEO
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( Image Source:  ANI )

देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का गठन किया है. इस पैनल की कमान इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी को सौंपी गई है. हालांकि, संसद में इस टास्क फोर्स के गठन को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में पैनल की संरचना पर सवाल उठाते हुए एक सदस्य को लेकर तंज कसा और उन्हें 'गौमूत्र एक्सपर्ट' बताया.

प्रियंका गांधी की इस टिप्पणी के बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि आखिर यह वैज्ञानिक कौन हैं, उनका बैकग्राउंड क्या है और उन्हें परीक्षा सुधार जैसे अहम पैनल में क्यों शामिल किया गया है. आइए जानते हैं प्रोफेसर वी. कामकोटी की पूरी कहानी.

कौन हैं प्रोफेसर वी. कामकोटी?

प्रोफेसर वी. कामकोटी (V. Kamakoti) देश के जाने-माने कंप्यूटर वैज्ञानिक हैं. वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के निदेशक हैं और कंप्यूटर आर्किटेक्चर, साइबर सिक्योरिटी, माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन तथा VLSI टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञ माने जाते हैं. उन्होंने IIT मद्रास से ही कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमएस और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 2001 में संस्थान के फैकल्टी सदस्य बने और जनवरी 2022 में IIT मद्रास के निदेशक नियुक्त किए गए.

भारत का स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर बनाने वाली टीम का नेतृत्व

प्रो. कामकोटी का सबसे चर्चित योगदान SHAKTI Microprocessor Project है. उन्होंने उस टीम का नेतृत्व किया जिसने भारत का पहला स्वदेशी इंडस्ट्रियल-ग्रेड माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया. इस परियोजना का उद्देश्य रक्षा, संचार और रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी प्रोसेसर पर भारत की निर्भरता कम करना था.इसके अलावा उन्होंने सूचना सुरक्षा, माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों का नेतृत्व किया है.

कई राष्ट्रीय संस्थानों से भी जुड़े हैं

  • प्रो. कामकोटी केवल IIT तक सीमित नहीं हैं. वे कई महत्वपूर्ण सरकारी और तकनीकी संस्थाओं में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) के सदस्य रहे.
  • वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स का नेतृत्व किया.
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की टेक्नोलॉजी समितियों से जुड़े रहे.
  • IIT मद्रास में JEE चेयरमैन और एसोसिएट डीन की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं.

शोध और सम्मान की लंबी सूची

प्रो. कामकोटी ने अंतरराष्ट्रीय जर्नल और कॉन्फ्रेंस में 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं. उन्होंने कई पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और उद्योग तथा सरकार से जुड़े दर्जनों तकनीकी प्रोजेक्ट पूरे किए हैं. उन्हें पद्मश्री, DRDO Academic Excellence Award, Abdul Kalam Technology Innovation National Fellowship, IBM Faculty Award और VASVIK Industrial Research Award जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

'गौमूत्र' वाला विवाद क्या था?

जनवरी 2025 में चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रो. कामकोटी ने भारतीय नस्ल की गायों और प्राकृतिक खेती पर बोलते हुए कहा था कि गौमूत्र में जीवाणुरोधी (Antibacterial), फंगसरोधी (Antifungal) और पाचन संबंधी गुण बताए गए हैं. उन्होंने एक धार्मिक व्यक्ति का उदाहरण भी साझा किया था, जिसमें गौमूत्र के सेवन के बाद स्वास्थ्य में सुधार का दावा किया गया था.

उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों और वैज्ञानिक समुदाय के कुछ लोगों ने आलोचना की और कहा कि मनुष्यों में ऐसे दावों के समर्थन में पर्याप्त क्लिनिकल प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. बाद में प्रो. कामकोटी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कुछ प्रकाशित अध्ययनों और पारंपरिक ज्ञान का संदर्भ दिया था, न कि कोई चिकित्सकीय सलाह.

NTA सुधार टास्क फोर्स में क्या होगी भूमिका?

पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को देखते हुए गठित नई टास्क फोर्स में प्रो. कामकोटी की भूमिका तकनीकी ढांचे को मजबूत करने की होगी. उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देंगे. इसमें स्कोरिंग सिस्टम की पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा, डेटा संरक्षण और परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने जैसे विषय शामिल हैं.

प्रियंका गांधी की टिप्पणी के बाद फिर चर्चा में क्यों आए?

लोकसभा में प्रियंका गांधी ने टास्क फोर्स की संरचना पर सवाल उठाते हुए प्रो. कामकोटी का अप्रत्यक्ष रूप से जिक्र किया. इसके बाद उनका नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया. हालांकि, सरकार का कहना है कि उन्हें परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए पैनल में शामिल किया गया है.

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