'आग खुद लगाई, अब बाल्टी लेकर आए हैं'; पेपर लीक बिल पर अखिलेश, गौरव और अभिषेक का सरकार पर तीखा हमला
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, "आग खुद लगाई, अब बाल्टी लेकर आए हैं".
लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026 पर लंबी चर्चा हुई. पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए. जहां केंद्र सरकार ने बिल को परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने वाला कदम बताया, वहीं विपक्ष ने इसे सरकार की विफलता छिपाने की कोशिश करार दिया.
लोकसभा में दोपहर 2 बजे से विधेयक पर चर्चा शुरू हुई. शुरुआत में स्पीकर ओम बिरला ने 6 घंटे का समय तय किया था, लेकिन सभी दलों की सहमति के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि चर्चा को बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया गया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर चर्चा 10 घंटे तक भी चल सकती है.
'आग खुद लगाई, अब बाल्टी लेकर आए हैं...'
लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि 'हम इस विधेयक का समर्थन करते हैं. लेकिन मैं शुरुआत में ही यह साफ कर देना चाहता हूं कि सिर्फ इसलिए कि हम इस बिल और इसके संशोधन का समर्थन कर रहे हैं, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि सरकार यह उम्मीद करें कि हम उसकी तारीफ भी करेंगे. यह वैसा ही होगा जैसे कोई पहले पूरी दुनिया में आग लगा दे और फिर एक बाल्टी पानी लेकर आ जाए, और हम उसकी सराहना करने लगें.' उन्होंने अपने बयान के जरिए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बिल का समर्थन करना अलग बात है, लेकिन उन परिस्थितियों के लिए सरकार की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, जिनकी वजह से पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आईं.
अभिषेक बनर्जी ने कहा कि 'हर छात्र को यह भरोसा मिलना चाहिए कि परीक्षाएं निष्पक्ष होंगी. हर अभिभावक को विश्वास होना चाहिए कि सफलता मेहनत, प्रतिभा और ईमानदारी से मिलेगी, न कि पैसे, प्रभाव या संगठित अपराधी गिरोहों के दम पर. लेकिन इस विधेयक का समर्थन जवाबदेही का विकल्प नहीं हो सकता." उन्होंने आगे कहा कि सख्त कानून बनाना जरूरी है, लेकिन केवल कानून से समस्या का समाधान नहीं होगा.
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 'जिस बिल पर आज चर्चा हो रही है, वह समाधान नहीं बल्कि एक स्वीकारोक्ति है. यह इस बात की स्वीकारोक्ति है कि NDA और भाजपा सरकार परीक्षा प्रणाली की रक्षा करने में विफल रही. सरकार छात्रों की सुरक्षा नहीं कर सकी, मेरिट की रक्षा नहीं कर सकी और निष्पक्ष परीक्षाएं सुनिश्चित नहीं कर सकी." अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अब सरकार यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है कि सिर्फ सजा बढ़ा देने से पिछले 12 वर्षों की प्रशासनिक विफलताएं मिट जाएंगी.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 'इस सरकार ने एक कला में महारत हासिल कर ली है. जब शासन विफल होता है तो कानून बदल देती है, जब प्रशासन नाकाम होता है तो सजा बढ़ा देती है और जब संस्थाएं असफल होती हैं तो एक नई समिति बना देती है. लेकिन सुशासन सुर्खियों से नहीं, बल्कि नतीजों से तय होता है."
अपने भाषण के अंत में उन्होंने कहा कि देश ने लगातार पेपर लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और छात्रों के भविष्य से जुड़े संकट देखे हैं, जो यह साबित करते हैं कि केवल कानून में संशोधन पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी प्रशासन और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है.
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि जब वे संसद पहुंचे तो उनका स्वागत किया गया. अखिलेश ने व्यंग्य करते हुए कहा कि "एक 'प्रधान' को हटाकर आपने 'प्रधान मंत्री' को बचा लिया." उन्होंने कहा कि सरकार वादे कम और जुमले ज्यादा देती है तथा शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार की जरूरत है.
इसी के साथ अखिलेश ने जब लाठीचार्ज की बात की तो हंगामा हुआ सत्ता पक्ष ने इमरजेंसी का जिक्र किया जिसके बाद अखिलेश ने कहा कि उस समय तो कंरट नहीं लगाए गए थे आपके समय तो करंट लगाए गए हैं. इसी के साथ आगे कहा कि अगर इमरजेंसी का जिक्र कर दिया है उसके बाद परिवर्तन हुआ और फिर परिवर्तन होगा.
'जो चढ़ावे की चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे?'
अखिलेश यादव ने कहा कि 'जो लोग चढ़ावे की चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे? सरकार सिर्फ पुराने कानून में संशोधन लेकर आई है। आखिर आप किसे गुमराह करना चाहते हैं? अगर कानून इतना प्रभावी था, तो बीजेपी के दस साल के शासन में 20 परीक्षाओं के पेपर कैसे लीक हो गए?"
उन्होंने आरोप लगाया कि केवल कानून में संशोधन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
गौरव गोगोई ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है और यह संशोधन केवल दिखावा है. उन्होंने कहा कि यह बिल सरकार की नाकामी छिपाने की कोशिश है. दो साल पहले भी ऐसा ही कानून बनाया गया था, लेकिन पेपर लीक की घटनाएं नहीं रुकीं. NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद अधिकांश आरोपी जमानत पर बाहर हैं. इससे साफ है कि सरकार परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई करने में सफल नहीं रही.
21 छात्रों ने जान गंवाई...
गौरव गोगोई ने चर्चा के दौरान कहा कि परीक्षा व्यवस्था की गड़बड़ियों के बीच 21 छात्रों ने आत्महत्या कर ली. उन्होंने कहा कि जिस मंत्री के कार्यकाल में यह सब हुआ, उनके इस्तीफे के बाद जब वे सदन लौटे तो उनका स्वागत माला पहनाकर किया गया, मानो पाकिस्तान से जंग जीत कर आए हो तो वहीं आगे पीएम मोदी के रील बनाने को लेकर कहा कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार सोशल मीडिया पर ज्यादा ध्यान दे रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहली कैबिनेट बैठक में पेपर लीक, परीक्षा माफिया और शिक्षा सुधार पर व्यापक चर्चा करने के बजाय इंस्टाग्राम पर ज्यादा सक्रिय रहने की बात कही गई.
जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार 2024 में बनाए गए कानून को और मजबूत करना चाहती है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके. उन्होंने कहा कि 1992 और 2010 में भी परीक्षा सुधार की सिफारिशें की गई थीं. कांग्रेस और यूपीए सरकारों ने उन सिफारिशों को लागू नहीं किया. 2024 का कानून आजादी के बाद सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने वाला पहला व्यापक कानून था.नया संशोधन छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा को और मजबूत करेगा. सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है.




