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डोपिंग नहीं, मैच फिक्सिंग नहीं - टेनिस कोर्ट पर अंडरवियर स्कैंडल! क्यों ऑस्ट्रेलियन ओपन में खिलाड़ियों से उतरवाए जा रहे फिटनेस ट्रैकर?

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में फिटनेस ट्रैकर पहनने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. आयोजकों ने खिलाड़ियों से Whoop बैंड हटवाए, जिससे डेटा सुरक्षा और नियमों पर बहस तेज हो गई.

Australian Open Fitness Tracker Controversy
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Updated on: 30 Jan 2026 9:37 AM IST

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में इस बार विवाद का कारण न तो डोपिंग है, न मैच फिक्सिंग और न ही किसी खिलाड़ी की बदतमीजी - बल्कि मामला जुड़ा है एक फिटनेस ट्रैकर से. दुनिया के नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी कार्लोस अल्कराज को चौथे दौर के मुकाबले से पहले वार्मअप के दौरान अपनी कलाई से Whoop बैंड हटाने के लिए कहा गया, जिसके बाद खेल जगत में एक नई बहस छिड़ गई.

चेयर अंपायर मारिजा सिसाक ने अल्कराज की दाहिनी कलाई पर Whoop फिटनेस ट्रैकर देखा और तुरंत उन्हें इसे हटाने का निर्देश दिया. यह कोई पहली घटना नहीं थी. इससे पहले वर्ल्ड नंबर-2 यानिक सिनर और महिला वर्ग की नंबर-1 खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को भी ऐसे ही निर्देश मिल चुके हैं.

क्या है Whoop बैंड और खिलाड़ी इसे क्यों पहनना चाहते हैं?

Whoop बैंड एक हाई-एंड फिटनेस ट्रैकर है, जिसे खासतौर पर एलीट एथलीट्स इस्तेमाल करते हैं. यह सामान्य स्मार्टवॉच जैसा नहीं होता - इसमें स्क्रीन नहीं होती, लेकिन यह खिलाड़ी की हार्ट रेट, स्ट्रेस लेवल, कैलोरी बर्न, रिकवरी स्टेटस और परफॉर्मेंस डेटा को बेहद बारीकी से रिकॉर्ड करता है. यह डेटा मोबाइल फोन पर ब्लूटूथ के जरिए देखा जा सकता है.

यानिक सिनर ने एक मैच के बाद कहा था, “हम कोर्ट पर कुछ डेटा ट्रैक करना चाहते हैं, लेकिन असल में यह मैच के बाद ज्यादा काम आता है. इससे हमें समझ आता है कि दिल की धड़कन कैसी रही, कितनी कैलोरी जली और शरीर ने कितना दबाव झेला. फिर उसी हिसाब से ट्रेनिंग प्लान बनता है.” यही वजह है कि खिलाड़ी इन ट्रैकर्स को टूर्नामेंट के दौरान पहनना चाहते हैं, ताकि चोट की संभावना, थकान और रिकवरी को लेकर पहले से अनुमान लगाया जा सके.

फिर इन्हें हटाने को क्यों कहा जा रहा है?

टेनिस में नियम इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) फिटनेस ट्रैकर्स को अनुमति देता है, लेकिन शर्त यह है कि उनके हाप्टिक फीडबैक (वाइब्रेशन सिग्नल) बंद हों. वजह यह है कि कोच इस तकनीक का इस्तेमाल मैच के दौरान खिलाड़ियों से गुप्त संवाद के लिए कर सकते हैं. लेकिन ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट्स के अपने अलग नियम होते हैं. ऑस्ट्रेलियन ओपन का संचालन करने वाली संस्था Tennis Australia अभी इस मुद्दे पर नियम बदलने पर विचार कर रही है, लेकिन फिलहाल इन डिवाइसेज़ को लेकर स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई है.

एक और बड़ी चिंता डेटा के इस्तेमाल को लेकर है. अगर खिलाड़ी का रियल-टाइम फिजियोलॉजिकल डेटा बाहर चला गया, तो सट्टेबाजी कंपनियां इसका दुरुपयोग कर सकती हैं, डेटा ब्रोकर इसे बेच सकते हैं और विरोधी टीमें रणनीतिक फायदा उठा सकती हैं. इसके अलावा टूर्नामेंट आयोजकों के अपने डेटा पार्टनर होते हैं, जो मैच से जुड़ी सीमित जानकारी खिलाड़ियों को देते हैं, लेकिन फिटनेस ट्रैकर उससे कहीं ज्यादा निजी और संवेदनशील डेटा इकट्ठा करते हैं.

अंडरवियर में छिपा ट्रैकर! Whoop की चालाकी

यह विवाद यहीं खत्म हो सकता था, लेकिन Whoop कंपनी के सीईओ विल अहमद ने इसे एक अलग ही मोड़ दे दिया. उन्होंने ऐसे स्पोर्ट्स अंडरगार्मेंट्स (कंप्रेशन टी-शर्ट, ब्रा, शॉर्ट्स और अंडरवियर) बाजार में उतार दिए, जिनमें फिटनेस ट्रैकर रखने के लिए खास पॉकेट और सेंसर फिट किए गए हैं. मतलब अब खिलाड़ी अगर चाहें तो ट्रैकर को कलाई पर पहनने के बजाय कपड़ों के अंदर छिपाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे अंपायर को ट्रैकर दिखेगा भी नहीं, जांच करनी हो तो स्ट्रिप सर्च जैसी स्थिति बन सकती है, नियम लागू कर पाना और मुश्किल हो जाएगा और खेल जगत में इसे “नियमों को चकमा देने की चाल” बताया जा रहा है.

खिलाड़ी हित या मार्केटिंग चाल?

Whoop कंपनी का दावा है कि वह “खिलाड़ियों के हितों की रक्षा” कर रही है. लेकिन खेल विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कंपनी के लिए बड़ा मार्केटिंग स्टंट भी बन गया है. सोशल मीडिया पर चर्चा, मीम्स और बहस से Whoop को जबरदस्त पब्लिसिटी मिल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह पूरा मामला असल में एक अरबों डॉलर की टेक कंपनी और खेल नियामक संस्थाओं के बीच ताकत की लड़ाई बन चुका है.

आगे क्या?

अब सवाल यह है कि क्या ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट फिटनेस ट्रैकर्स की इजाजत देंगे? क्या ITF अपने नियम और सख्त करेगा? और क्या भविष्य में खिलाड़ी अपने अंडरवियर के अंदर सेंसर पहनकर कोर्ट में उतरेंगे? फिलहाल इतना तय है कि ऑस्ट्रेलियन ओपन का यह “अंडरवियर स्कैंडल” खेल और टेक्नोलॉजी की टकराहट का नया उदाहरण बन गया है.

स्‍पोर्ट्स न्‍यूज
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