67 साल का इंतजार खत्म! जम्मू-कश्मीर पहली बार बना रणजी चैंपियन; दिग्गजों के रहने के बावजूद कर्नाटक को क्यों मिली मायूसी?
Jammu and Kashmir Cricket Team ने पहली बार Ranji Trophy का खिताब जीत लिया. हुबली के KSCA Stadium में खेले गए फाइनल में टीम ने आठ बार की चैंपियन Karnataka Cricket Team को मात दी. मैच ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में 291 रन की बढ़त के आधार पर जम्मू-कश्मीर चैंपियन बना.
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम पहली बार बनी रणजी ट्रॉफी
28 फरवरी, दिन शनिवार और हुबली का एतिहासिक KSCA Stadium.... कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के कप्तानों ने जब एक-दूसरे से हाथ मिलाया, तो जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों और समर्थकों में जश्न शुरू हो गया. दशकों के इंतजार के बाद मिली यह ट्रॉफी न सिर्फ एक टीम की जीत है, बल्कि पूरे क्षेत्र के सपनों के सच होने जैसा पल है. जम्मू-कश्मीर ने पहली बार Ranji Trophy का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया. फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने आठ बार की चैंपियन Karnataka को पीछे छोड़ते हुए यह एतिहासिक उपलब्धि हासिल की. मुकाबला ड्रॉ जरूर रहा, लेकिन पहली पारी में 291 रन की बड़ी बढ़त ने जम्मू-कश्मीर को चैंपियन बना दिया.
फाइनल में जम्मू-कश्मीर ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा. पहली पारी में मिली 291 रन की लीड के बाद टीम ने दूसरी पारी में 4 विकेट पर 342 रन बनाकर कुल बढ़त 633 रन तक पहुंचा दी. ओपनर कमरान इकबाल 160 रन बनाकर नाबाद रहे, जबकि साहिल लोटरा ने 101 रन की शानदार पारी खेली. इस मजबूत प्रदर्शन के बाद कर्नाटक के पास वापसी का कोई रास्ता नहीं बचा.
जम्मू-कश्मीर को कैसे बनी चैंपियन?
- जम्मू-कश्मीर की इस एतिहासिक जीत में पूरी टीम का योगदान रहा. कप्तान परस डोगरा ने रणजी ट्रॉफी में अपने 10 हजार रन पूरे किए. यावर हसन, अब्दुल समद और कन्हैया वाधवान ने भी अहम अर्धशतक लगाए.
- गेंदबाजी में तेज गेंदबाज आकिब नबी ने कमाल का प्रदर्शन किया और इस सीजन में सातवीं बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया. सेमीफाइनल और फाइनल, दोनों में उनकी गेंदबाजी मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुई.
- बंगाल के खिलाफ सेमीफाइनल में पहली पारी में पिछड़ने के बाद टीम मुश्किल में थी, लेकिन आकिब नबी की घातक गेंदबाजी ने बंगाल को दूसरी पारी में सिर्फ 88 रन पर समेट दिया. शुभम पुंडीर के शतक की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने 584 रन का बड़ा स्कोर बनाया और वहीं से टीम को लगा कि इस बार ट्रॉफी दूर नहीं है.
- नौ बार की चैंपियन कर्नाटक टीम अनुभव के दम पर फाइनल में उतरी थी. मयंक अग्रवाल के 160 रन भी टीम को बचा नहीं सके. आखिरी दिन कर्नाटक एक भी विकेट नहीं ले पाई, जिससे साफ हो गया कि मैच पूरी तरह जम्मू-कश्मीर के नियंत्रण में है.
- जम्मू-कश्मीर की ओर से पहली पारी में यावर हसन ने 88, शुभम पुंडीर ने 121, पारस डोगरा ने 70, अब्दुल समद ने 61, कन्हैया वाधवान ने 70 और साहिल लोटरा ने 72 रन बनाए. कर्नाटक की ओर से प्रसिद्ध कृष्णा ने 5 विकेट चटकाए.
- कर्नाटक की ओर से पहली पारी में केएल राहुल ने 13, मयंक अग्रवाल ने 160, कप्तान देवदत्त पडिक्कल ने 11, करुण नायर ने 0, शमारन रविचंद्रन ने 0, श्रेयस गोपाल ने 0, क्रुथिक कृ्ष्णा ने 36 रन बनाए. जम्मू-कश्मीर की ओर से आकिब नबी डार ने 5 विकेट चटकाए.
- जम्मू-कश्मीर ने दूसरी पारी में कामरान इकबाल ने नाबाद 160 और साहिल लोटरा के नाबाद 101 रन की बदौलत 4 विकेट के नुकसान पर 342 रन बनाकर अपनी दूसरी पारी घोषित की. प्रसिद्ध कृष्णा ने 2 विकेट चटकाए.
67 साल का इंतजार हुआ खत्म
जम्मू-कश्मीर ने 67 साल पहले इस टूर्नामेंट में कदम रखा था, लेकिन अब तक खिताब नहीं जीत पाया था. टीम पहले 2013-14, 2019-20 और 2024-25 में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थी, लेकिन हर बार दबाव में हार गई. इस बार टीम पूरे आत्मविश्वास और ठंडे दिमाग के साथ उतरी और इतिहास रच दिया. यह जीत सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए गर्व का पल है. इससे राज्य के युवाओं को बड़ा संदेश मिला है कि मेहनत और टीमवर्क से किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है. क्रिकेट ढांचे के विकास को लेकर भी अब नई उम्मीद जगी है.




