15 साल के वैभव का धमाका, अय्यर की पहली ट्रॉफी! इंग्लैंड में हार का हिसाब भारत ने हरारे में किया बराबर, जिम्बाब्वे को 3-0 से रौंदा
टीम इंडिया ने जिम्बाब्वे को तीसरे टी20 में 35 रन से हराकर 3-0 से सीरीज अपने नाम कर ली. 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने 81 रन की विस्फोटक पारी खेलकर प्लेयर ऑफ द मैच और प्लेयर ऑफ द सीरीज दोनों अवॉर्ड जीते, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर ने अपने टी20 कप्तानी करियर की पहली सीरीज जीत दर्ज की.
India vs Zimbabwe T20I Series: कभी-कभी कोई सीरीज सिर्फ जीत नहीं होती, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत बन जाती है. हरारे के मैदान पर ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला. आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे की निराशा के बाद टीम इंडिया को जिस जवाब की जरूरत थी, उसने वह जवाब बल्ले, गेंद और जज्बे, तीनों से दिया.
भारत ने जिम्बाब्वे को तीसरे टी20 में 35 रन से हराकर तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली. यह सिर्फ क्लीन स्वीप नहीं था, बल्कि युवा भारतीय टीम का दमदार ऐलान था कि भविष्य सुरक्षित हाथों में है.
वैभव सूर्यवंशी ने 49 गेंदों पर ठोके 81 रन
मैच की शुरुआत भारत की बल्लेबाजी से हुई. पहले दो मुकाबलों में आक्रामक शुरुआत करने वाले वैभव सूर्यवंशी ने इस बार भी अपने इरादे साफ कर दिए. महज 49 गेंदों पर 81 रन, आठ चौके और चार छक्के… हर शॉट में आत्मविश्वास और हर रन में भविष्य की झलक दिखाई दी. 15 वर्षीय बल्लेबाज ने एक बार फिर साबित किया कि उम्र नहीं, हौसला क्रिकेट की सबसे बड़ी पहचान है.
हालांकि, अभिषेक शर्मा एक बार फिर ब्लेसिंग मुजरबानी का शिकार बने और सिर्फ 2 रन बनाकर लौट गए. विकेटकीपर ईशान किशन ने 29 रन जोड़कर पारी संभाली, कप्तान श्रेयस अय्यर ने तेज़ 27 रन बनाए और आखिर में रिंकू सिंह की 25 रन की विस्फोटक पारी ने भारत को 20 ओवर में 192/5 के मजबूत स्कोर तक पहुंचा दिया. भारत की बल्लेबाजी में शुरुआत से आखिर तक आक्रामकता बनी रही.
मयंक यादव ने पहली ही गेंद पर बेनेट को भेजा पवेलियन
दूसरी तरफ, 193 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे की उम्मीदों को मयंक यादव ने पहली ही गेंद पर तोड़ दिया... 147 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आई गेंद पर ब्रायन बेनेट आउट हो गए... पहली स्लिप में वैभव सूर्यवंशी ने शानदार कैच पकड़कर भारत को सपना जैसी शुरुआत दिला दी. यह मयंक यादव के टी20 अंतरराष्ट्रीय करियर का तीसरी बार पहला गेंद वाला विकेट था और उन्होंने भुवनेश्वर कुमार के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
इसके बाद जिम्बाब्वे ने संभलने की कोशिश जरूर की, लेकिन भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाते रहे. यश ठाकुर ने एक ही ओवर में डियोन मायर्स और कप्तान सिकंदर रज़ा को लगातार गेंदों पर आउट कर मुकाबले का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया. रवि बिश्नोई, मयंक यादव और अशोक शर्मा ने भी समय-समय पर विकेट लेकर मेजबान टीम की वापसी की हर कोशिश खत्म कर दी.
रेयान बर्ल ने बनाए 43 गेंदों में 54 रन
जिम्बाब्वे की ओर से रेयान बर्ल ने अकेले संघर्ष करते हुए 43 गेंदों में 54 रन बनाए, जबकि वेस्ली मधेवेरे ने 28 रन का योगदान दिया... लेकिन बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सके और पूरी टीम 20 ओवर में 157/7 तक ही पहुंच सकी.
पहली सीरीज जीत पर क्या बोले श्रेयस अय्यर?
इस जीत के साथ कप्तान श्रेयस अय्यर के चेहरे पर अलग ही संतोष दिखाई दिया. आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे पर जीत का इंतजार करने वाले अय्यर ने आखिरकार भारतीय कप्तान के रूप में अपनी पहली टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीत ली. मैच के बाद उन्होंने कहा कि टीम का सबसे बड़ा हथियार खिलाड़ियों का निडर रवैया और लगातार एक-दूसरे के लिए जिम्मेदारी लेना है. अय्यर ने यह भी कहा कि टीम का लक्ष्य सिर्फ जीतना नहीं बल्कि हर मैच में अपने स्तर को और ऊपर ले जाना है.
सिकंदर रजा ने क्या कहा?
दूसरी ओर, जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रज़ा हार के बावजूद निराश नहीं दिखे. उन्होंने माना कि भारत जैसी शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलने से ही उनकी टीम बेहतर बनेगी. रज़ा ने कहा कि यह युवा टीम सीख रही है और भविष्य में यही अनुभव उन्हें मजबूत बनाएगा. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह व्यक्तिगत रूप से रन नहीं बना सके, लेकिन उन्हें भरोसा है कि जल्द ही वह भी टीम की जीत में बड़ा योगदान देंगे.
मैच का सबसे भावुक पल तब आया जब सिकंदर रज़ा, जो हाल ही में जिम्बाब्वे के सबसे ज्यादा टी20 मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने हैं, उन्हें उनके पिता ने मैदान पर सम्मानित किया. पिता ने बेटे को गले लगाया और उसके माथे पर प्यार से चुंबन दिया. क्रिकेट के शोर के बीच यह पल हर दर्शक के दिल को छू गया.
वैभव सूर्यवंशी बने प्लेयर ऑफ द मैच और सीरीज'
उधर भारतीय ड्रेसिंग रूम में जश्न का माहौल था. कप्तान श्रेयस अय्यर ने ट्रॉफी उठाई, पूरी टीम उनके साथ फोटो के लिए जुटी और युवा खिलाड़ियों की मुस्कान बता रही थी कि यह सिर्फ एक सीरीज जीत नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की मजबूत नींव है.... लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे चमकदार किरदार रहे वैभव सूर्यवंशी... उन्होंने न सिर्फ प्लेयर ऑफ द मैच, बल्कि पूरी सीरीज में शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी जीता. अवॉर्ड लेते समय उन्होंने कहा कि हरारे का मैदान उन्हें हमेशा पसंद रहा है क्योंकि यहां वह अंडर-19 विश्व कप भी खेल चुके हैं.
सूर्यवंशी ने क्या बताया?
सूर्यवंशी ने बताया कि कप्तान, कोच और पूरी टीम ने उन पर भरोसा जताया और उनका प्रयास सिर्फ यही था कि टीम को तेज शुरुआत मिले और अगर शुरुआत अच्छी हो जाए तो पारी को बड़ा बनाया जाए. पहली फुट टाइम सीरीज में दोनों बड़े पुरस्कार जीतने को उन्होंने अपने जीवन का 'ड्रीम कम ट्रू' पल बताया.
भारत ने इस दौरे में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग, तीनों विभागों में जिम्बाब्वे को पीछे छोड़ दिया. इंग्लैंड दौरे की मायूसी अब हरारे की इस जीत में कहीं खो चुकी है. शायद यही इस सीरीज की सबसे बड़ी कहानी है- एक कप्तान को पहली ट्रॉफी मिली, एक 14 साल के बल्लेबाज ने नया सितारा बनने का संकेत दिया और टीम इंडिया ने दुनिया को बता दिया कि उसकी नई पीढ़ी बड़े मंच के लिए तैयार है.




