कौन हैं Nandan Nilekani, जिन्हें PM मोदी ने दी परीक्षा सुधार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी? 10 Points में जानिए
आधार कार्ड परियोजना के मुख्य वास्तुकार और इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए बनी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की कमान सौंपी है. तकनीक और डिजिटल गवर्नेंस में उनका लंबा अनुभव अब देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
Nandan Nilekani
Who Is Nandan Nilekani: अगर आपने कभी आधार कार्ड बनवाया है, यूपीआई से भुगतान किया है या भारत की डिजिटल व्यवस्था की ताकत को महसूस किया है, तो उसके पीछे जिन लोगों का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है, उनमें नंदन नीलेकणि का नाम सबसे ऊपर आता है. इन्फोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक, आधार (Aadhaar) परियोजना के मुख्य वास्तुकार और देश के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाले नंदन नीलेकणि को अब एक और बड़ी जिम्मेदारी मिली है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 सेकेंड का एक वीडियो जारी कर बताया कि केंद्र सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी कमान नंदन नीलेकणि को सौंपी गई है. ऐसे में हर किसी के मन में सवाल है कि आखिर नंदन नीलेकणि कौन हैं और सरकार ने उन्हीं पर भरोसा क्यों जताया?
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
- नंदन नीलेकणि भारत के जाने-माने तकनीकी उद्यमी और इन्फोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक हैं. उन्हें देश की डिजिटल पहचान योजना आधार (Aadhaar) के मुख्य वास्तुकार (आर्किटेक्ट) और यूआईडीएआई (UIDAI) के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में भी जाना जाता है.
- 2 जून 1955 को बेंगलुरु में जन्मे नंदन नीलेकणि ने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत पटनी कंप्यूटर सिस्टम्स से की, जहां उनकी मुलाकात एन.आर. नारायण मूर्ति से हुई.
- साल 1981 में उन्होंने नारायण मूर्ति और पांच अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की. आगे चलकर वह 2002 से 2007 तक कंपनी के सीईओ रहे. उनके नेतृत्व में इन्फोसिस ने दुनिया की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में अपनी पहचान बनाई.
- 2009 में नंदन नीलेकणि ने इन्फोसिस छोड़कर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की जिम्मेदारी संभाली. यहीं से देश की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान परियोजना 'आधार' की शुरुआत हुई.
- आज आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली मानी जाती है. इसके जरिए करोड़ों लोगों को एक यूनिक डिजिटल पहचान मिली, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाना आसान हुआ.
- नीलेकणि का योगदान सिर्फ आधार तक सीमित नहीं रहा. उन्हें उन विशेषज्ञों में गिना जाता है जिन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई.
- यूपीआई, डिजिटल भुगतान, सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण और तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने में उनके सुझावों और अनुभव का व्यापक प्रभाव रहा है.
- हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में सवाल उठे. इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है. इस टास्क फोर्स का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके और छात्रों का भरोसा मजबूत हो.
- नंदन नीलेकणि सिर्फ उद्योगपति ही नहीं, बल्कि समाजसेवा से भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपनी पत्नी रोहिणी नीलेकणि के साथ मिलकर 'एकस्टेप फाउंडेशन' की स्थापना की, जो बच्चों की बुनियादी शिक्षा और डिजिटल लर्निंग पर काम करती है. उन्होंने आईआईटी बॉम्बे को भी शोध और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़ा आर्थिक सहयोग दिया है.
- भारत सरकार ने वर्ष 2006 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया. वहीं टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया था. तकनीक, नीति और नवाचार के क्षेत्र में उनका योगदान उन्हें भारत के सबसे सम्मानित सार्वजनिक व्यक्तित्वों में शामिल करता है.
नई जिम्मेदारी के साथ अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या नंदन नीलेकणि अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के दम पर देश की परीक्षा प्रणाली को पहले से अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बना पाएंगे.




