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Paush Purnima: 3 जनवरी को साल की पहली पूर्णिमा, इस दिन ये काम करने से खुलती है किस्मत

साल की शुरुआत हमेशा नए अवसर और शुभता लेकर आती है, और 3 जनवरी को आने वाली पौष पूर्णिमा इसका सबसे खास दिन है. यह साल की पहली पूर्णिमा मानी जाती है, जिसे धार्मिक और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है. इस दिन सही समय पर स्नान, दान और पुण्यकारी कर्म करने से न केवल आध्यात्मिक लाभ होता है, बल्कि किस्मत के दरवाजे भी खुलने की संभावना बढ़ जाती है.

Paush Purnima: 3 जनवरी को साल की पहली पूर्णिमा, इस दिन ये काम करने से खुलती है किस्मत
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( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro

Updated on: 3 Jan 2026 6:30 AM IST

हिंदू धर्म में हर माह आने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. पूर्णिमा तिथि को बहुत शुभ तिथि माना जाता है. इस तिथि पर पूजा-पाठ, जप, तक स्नान,दान और पुण्य कार्य करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है. पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा अपनी सभी 16 कालाओं से परिपूर्ण होता है.

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पौष माह की पूर्मिणा साल 2026 की पहली पूर्णिमा है. पौष पूर्णिमा नए साल पर 03 जनवरी को पड़ेगी. आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा का महत्व और तिथि.

पौष पूर्णिमा 2026 तिथि

पौष पूर्णिमा तिथि पर स्नान, तप और दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्दि होती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल 2026 की पहली पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 जनवरी 2026 को शाम 6 बजकर 53 मिनट से होगा, जबकि इसका समापन 3 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर पौष पूर्णिमा का व्रत 3 जनवरी 2026, शनिवार को रखा जाएगा.

शुभ मुहूर्त

पौष पूर्णिमा पर गंगास्नान और दान का विशेष महत्व होता है. पौष पूर्णिमा पर दान और स्नान का मुहूर्त 3 जनवरी 2026 को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 6 बजकर 21 मिनट रहेगा. वहीं अभिजीत मुहूर्त पर भी दान और स्नान करने का विशेष महत्व होता है इस दिन दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से लेकर 12 बजकर 47 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पौष माह की पूर्णिमा तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है.. यह दिन तप, दान, स्नान और पुण्य कर्मों के लिए विशेष फलदायी होता है. धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन किए गए दान-पुण्य से न केवल वर्तमान जीवन के कष्ट दूर होते हैं, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों का भी क्षय होता है. पौष पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विशेष महत्व होता है. इन दिन सूर्योदय से पहले पवित्र नदी, सरोवर या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है. स्नान के बाद भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करें इससे जीवन में आरोग्य, तेज और यश की प्राप्ति होती है. पौष पूर्णिमा से प्रयागराज में एक माह तक चलने वाले माघ मेले में कल्पवास का प्रारंभ भी होता है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है.

पौष पूर्णिमा पर दान का महत्व

  • पौष पूर्णिमा पर वस्त्रों का दान करना बहुत ही शुभ साबित होता है. पौष पूर्णिमा पर सर्दी ज्यादा होती है ऐसे में गर्म कपड़ों का दान करना बहुत शुभ होता है. पौष पूर्णिमा पर वस्त्र दान करने से दरिद्रता का नाश होता है. पौष पूर्णिमा पर विशेष रूप से ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को करना श्रेष्ठ माना गया है.
  • पौष पूर्णिमा पर तेल का दान करने का विशेष महत्व होता है. पौराणिक मान्यता है कि तेल दान करने से शनि दोष और दरिद्रता के प्रभाव कम होते हैं.
  • पौष पूर्णिमा पर गुड़ का दान करनी भी अच्छा और शुभ माना जाता है. गुड़ के दान करने से जीवन में मिठास और पारिवारिक संबंध मजबूत होते हैं. साथ ही आर्थिक परेशानियों में वृद्धि होती है.
  • पौष पूर्णिमा पर ठंड के मौसम में कंबल दान को सर्वोत्तम दान माना गया है. पौष पूर्णिमा पर कंबल दान करने से सौ यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है.
धर्म
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